दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर लगे अस्थाई बैन को हटाने से इनकार कर दिया है. टेलीग्राम ने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत NEET-UG री-एग्जाम तक टेलीग्राम पर टेम्परेरी बैन लगाया गया था. अब कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया है. अदालत ने कहा कि सरकार के उठाए गए कदम सही थे और एग्जाम में गड़बड़ी की चिंताओं को दूर करने के लिए उठाए गए थे.
दिल्ली हाई कोर्ट ने Telegram को दिया झटका, NEET एग्जाम से पहले तक लगा रहेगा बैन
Delhi High Court ने Telegram पर लगाए गए अस्थाई बैन के फैसले को सही ठहराया है. कोर्ट ने कहा कि पेपर लीक जैसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार का यह कदम बिल्कुल जायज है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस तेजस कारिया ने टेलीग्राम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ‘इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000’ की धारा 69A के तहत ब्लॉकिंग ऑर्डर को चुनौती दी गई थी. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा,
"सरकार के उपाय कम से कम पाबंदी वाले हैं. यह नहीं कहा जा सकता कि आदेश जरूरत से ज्यादा सख्त हैं."
3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद उसे रद्द कर दिया गया था और दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया गया था. NEET UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून को होगा. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने भारत में 22 जून तक टेलीग्राम पर टेम्परेरी बैन लगा दिया. इसके पीछे तर्क दिया गया कि टेलीग्राम पर चलने वाले कई चैनल ऐसा दावा कर रहे थे कि उनके पास NEET का क्वेश्चन पेपर है.
टेलीग्राम ने दी चुनौतीटेलीग्राम ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया. कंपनी का तर्क था कि सरकार ने बिना किसी ठोस वजह के सिर्फ उनके प्लेटफॉर्म को निशाना बनाया, जबकि दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बिना ऐसी किसी रोक-टोक के काम करने की इजाजत दी. कंपनी का कहना था कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है और यह कदम जरूरत से ज्यादा सख्त था.
टेलीग्राम ने कोर्ट को क्या बताया?सुनवाई के दौरान, टेलीग्राम ने कहा कि वह मई से ही सरकारी एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में था. कंपनी के मुताबिक, जब अधिकारियों ने 9 जून को कुछ खास URL शेयर किए, तो उस कंटेंट को एक घंटे के भीतर हटा दिया गया. टेलीग्राम ने आगे कहा कि उसने NEET से जुड़े गैर-कानूनी कंटेंट वाले 900 से ज्यादा लिंक हटा दिए थे.
टेलीग्राम की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट ध्रुव मेहता ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए और तर्क दिया कि अधिकारियों ने सेक्शन 69A के तहत अधिकार का इस्तेमाल करते समय मामले पर ठीक से विचार नहीं किया. सरकार के आदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने तर्क दिया,
"आदेश में कहा गया है, भारत की संप्रभुता और अखंडता के हित में? क्या NEET जैसी परीक्षा भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करेगी? इसमें किस तरह से सोच-विचार किया गया है?"
मेहता ने फिर से कहा कि टेलीग्राम अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में था और उसने चिह्नित चैनलों और कंटेंट के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की थी.
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सरकार ने क्या पक्ष रखा?केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार के एक्शन का बचाव किया और कहा कि अधिकारियों ने पेपर लीक रोकने और एग्जाम की ईमानदारी बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया. उन्होंने साफ किया कि टेलीग्राम की बनावट और गोपनीयता (प्राइवेसी) नियमों के कारण इस पर गलत चीजें रोकना बहुत मुश्किल है, क्योंकि अकाउंट डिलीट होते ही इसके मैसेज और सारा डेटा हमेशा के लिए गायब हो जाता है.
उन्होंने दलील दी कि इस ऐप के गलत इस्तेमाल से देश को बहुत गंभीर नुकसान हो सकते थे, इसलिए सरकार ने सुरक्षा के लिए पहले ही यह जरूरी कदम उठाया है. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भी सरकार के फैसले का समर्थन किया.
वीडियो: दिल्ली हाई कोर्ट में केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को लेकर क्या कहा?















