The Lallantop

'Telegram नया डार्क वेब, आतंकी यूज करते हैं', प्लेटफॉर्म पर केंद्र के गंभीर आरोप

टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध (Temporary Ban) के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में कहा कि यह प्लेटफॉर्म अपराधियों, साइबर जालसाजों और आतंकियों का पसंदीदा माध्यम बन चुका है.

Advertisement
post-main-image
सरकार ने हाईकोर्ट में टेलीग्राम पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं (फोटो- India today)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • दिल्ली हाई कोर्ट ने टेलीग्राम पर केंद्र सरकार के अस्थायी प्रतिबंध की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसका आदेश 19 जून को आने की संभावना है।
  • टेलीग्राम पर जांच एजेंसियों के लिए पहचान छुपाने वाले फीचर्स और ऐप के क्लाउड बेस्ड सिस्टम के कारण आतंकवादी, साइबर अपराधी और नशीली दवाओं के तस्कर इसका उपयोग कर रहे हैं।
  • सरकार ने टेलीग्राम पर 21 जून से 22 जून तक अस्थायी प्रतिबंध लगाया है और मेसेज एडिटिंग फीचर को 30 जून तक बंद रखने का निर्देश भी दिया है।

टेलीग्राम (Telegram) पर केंद्र सरकार की ओर से अस्थायी बैन के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. 19 जून को इस मसले पर कोर्ट का आदेश आने की उम्मीद है. इससे पहले सरकार के वकील ने हाईकोर्ट के सामने अपना पक्ष रखते हुए टेलीग्राम पर कई गंभीर आरोप लगाए. सरकार ने इसे लेकर कोर्ट में हलफनामा भी दाखिल किया है. इसमें कहा गया कि टेलीग्राम एक ‘नया डार्क वेब’ बन गया है, जिसका प्रयोग खतरनाक अपराधी, साइबर जालसाज और आतंकवादी करने लगे हैं. यह आतंकियों का सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन गया है.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

सरकार की ओर से हाईकोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आगे कहा कि टेलीग्राम कई तरह की अवैध गतिविधियों का अड्डा बन गया है. यहीं से नीट जैसी परीक्षाओं के लीक होने की संभावना बनती है. साइबर धोखाधड़ी के अलावा बाल यौन शोषण के कॉन्टेंट भी यहां शेयर किए जा रहे हैं. नशीली दवाओं की तस्करी के लिए भी टेलीग्राम का इस्तेमाल किया जा रहा है. सबसे बड़ा दावा करते हुए केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि आतंकी गतिविधियों के लिए Telegram सबसे सुविधाजनक प्लेटफॉर्म बन गया है. 

सरकार के मुताबिक, इस ऐप की गोपनीयता और पहचान छिपाने वाले फीचर्स अपराधियों और आतंकियों का काम आसान कर देती हैं. ऐसे में अपराधी तेजी से टेलीग्राम का इस्तेमाल कर रहे हैं. वो टेलीग्राम चैनलों पर डार्क वेब तक पहुंचाने वाले लिंक शेयर करते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों की पहचान का पता लगाना मुश्किल हो जाता है. 

Advertisement
टेलीग्राम ही क्यों?

केंद्र सरकार का कहना है कि टेलीग्राम के प्राइवेसी और Anonymity (पहचान छिपाने) वाले फीचर्स अपराधी गिरोहों को आकर्षित करते हैं. इस ऐप के यूजर्स अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स के जरिए फोन नंबर और टेलीग्राम-ID जैसी पहचान छिपा सकते हैं. यही वजह है कि जांच अधिकारियों के लिए किसी अकाउंट के पीछे मौजूद असली व्यक्ति तक पहुंचना और उसकी पहचान करना काफी कठिन हो जाता है. इसका फायदा उठाकर अपराधी टेलीग्राम का इस्तेमाल नशीली दवाओं की तस्करी, साइबर अपराध, आतंकवाद, बाल यौन शोषण जैसी गतिविधियों के लिए करते हैं. 

केंद्र ने कहा कि टेलीग्राम का स्ट्रक्चर ही जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है. टेलीग्राम क्लाउड बेस्ड सिस्टम पर काम करता है. इसकी वजह से जांच एजेंसियां असली यूजर तक नहीं पहुंच सकतीं. वहीं, ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ऐसी है कि अगर कोई अकाउंट डिलीट कर दे तो उससे जुड़ा सारा डेटा भी डिलीट हो जाता है. इस वजह से जांच के लिए जरूरी जानकारी नहीं बचती. सरकार ने कहा कि ये सारी समस्याएं फेसबुक, वॉट्सऐप जैसे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं दिखतीं. इनमें किसी यूजर्स के अकाउंट और उसकी पहचान तक पहुंचना आसान होता है. 

टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध

बता दें कि NEET पेपर लीक मामले ने देश में बड़ा विवाद खड़ा किया था. लीक हुए पेपर के सर्कुलेशन में टेलीग्राम का भी इस्तेमाल किया गया था. इस वजह से सरकार ने 21 जून को होने वाले NEET के री-एग्जाम को लेकर टेलीग्राम के एक्सेस पर अस्थायी बैन लगा दिया है. 22 जून तक टेलीग्राम ऐप का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. इसके अलावा, सरकार ने ऐप से मेसेज एडिटिंग फीचर को भी 30 जून तक बंद रखने को कहा है.   

Advertisement

वीडियो: फरहान अख्तर की पीरियड ड्रामा फिल्म में लीड रोल करेंगे सलमान खान?

Advertisement