भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने समाजसेवी अन्ना हजारे को T-55 टैंक गिफ्ट किया है. पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में इस टैंक का इस्तेमाल हुआ था. इन दोनों लड़ाइयों के समय अन्ना हजारे भी भारतीय सेना का हिस्सा थे.
अन्ना हजारे को बर्थडे गिफ्ट में जो टैंक मिला, उसका इस्तेमाल कब हुआ था?
भारत सरकार की ओर से समाजसेवी अन्ना हजारे को उनके 90वें जन्मदिन से पहले T-55 टैंक गिफ्ट किया गया है. पाकिस्तान के खिलाफ साल 1965 और 1971 की लड़ाई में इस टैंक का इस्तेमाल हुआ था. अन्ना हजारे भी इस दौरान भारतीय सेना में शामिल रहे थे.


T-55 टैंक को देखकर अन्ना की युद्ध की यादें ताजा हो गईं और वे भावुक हो गए. समाजसेवी और लोकपाल आंदोलन 2011 के अगुआ अन्ना हजारे 15 जून को 90 साल के होने जा रहे हैं. इसी को देखते हुए उनके सम्मान में भारत सरकार ने उनको T-55 टैंक तोहफे में दिया है. ये टैंक 11 जून को अन्ना के गांव रालेगण सिद्धि पहुंचा. टैंक को अन्ना हजारे के हिंद सेवा ट्रस्ट के गेट के सामने रखा गया है.
अन्ना हजारे ने टैंक पर फूल माला चढ़ाई और मिलिट्री शैली में उसको सैल्यूट भी दिया. इस गिफ्ट से अन्ना काफी खुश और भावुक नजर आए. उन्होंने बताया कि साल 1971 की लड़ाई में इसी टैंक के चलते दुश्मन मैदान छोड़कर भागने को मजबूर हुए थे.
सोवियत संघ (अब रूस) ने साल 1950 में इस टैंक को बनाना शुरू किया था. भारत ने साल 1960 में सोवियत से इसको खरीदा था. साल 1965 और 1971 के युद्ध में इस टैंक का इस्तेमाल किया गया था.
अन्ना हजारे सेना में ड्राइवर थे
प्रख्यात समाजसेवी किशन बाबूराव हजारे उर्फ अन्ना हजारे कभी सेना में ड्राइवर थे. साल 1963 में अन्ना मराठा रेजीमेंट में बतौर ड्राइवर भर्ती हुए थे. उनकी पहली पोस्टिंग पंजाब में हुई. वहां उन्हें ट्रक चलाने की जिम्मेदारी दी गई. साल 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान अन्ना खेमकरण बॉर्डर पर तैनात थे. 12 नवंबर 1965 को अचानक उनकी चौकी पर पाकिस्तान ने बमबारी कर दी. भारतीय सैनिकों ने पोजिशन लेने की कोशिश की. लेकिन सब बेकार साबित हुआ. अन्ना को छोड़कर बाकी सभी साथी शहीद हो गए. अन्ना भी इस हमले में बुरी तरह से जख्मी हुए.
नौकरी के बाद शुरू की समाजसेवा
इस घटना के बाद अन्ना ने 13 और साल तक सेना की नौकरी की. इस दौरान उनकी तैनाती मुंबई और कश्मीर में भी रही. साल 1975 में जम्मू में तैनाती के दौरान सेना में 15 साल पूरे होने पर उन्होंने वॉलियंटरी रिटायरमेंट ले लिया. सेना से रिटायर होकर अपने गांव भिंगारी नहीं गए, बल्कि रालेगण सिद्धि गांव में रहने लगे. अवैध शराब के लिए मशहूर इस गांव को अन्ना ने एक आदर्श गांव के तौर पर स्थापित किया.
फिर धीरे-धीरे अन्ना सामाजिक कामों में एक्टिव होते गए. उन्होंने महाराष्ट्र में कई घोटाले उजागर किए. जन आंदोलन चलाए और सूचना के अधिकार के समर्थन में भी आगे आए. साल 2011 में उन्होंने लोकपाल बिल को लेकर हुए जनआंदोलन का भी नेतृत्व किया. साल 1990 में उनको पद्म श्री और साल 1992 में पद्म भूषण से सम्मानित किया जा चुका है.
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