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'सरकार बदलने' की बात सोशल मीडिया पर लिखी, CRPF ने DIG को कर दिया सस्पेंड

Central Reserve Police Force के एक DIG रैंक के अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया. साथ ही करीब 20 अन्य अधिकारियों का भी ट्रांसफर कर दिया गया.

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CRPF के DIG रैंक के अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स के सीनियर DIG बीसी पात्रा को सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ पोस्ट करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है और कई अन्य अधिकारियों का भी ट्रांसफर किया गया है।
  • सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल 2026 के संसद में पास होने के बाद कुछ CAPF अधिकारियों और उनके परिवारों ने इसका विरोध करते हुए प्रदर्शन किए थे।
  • अधिकारियों के सस्पेंशन और ट्रांसफर के बाद विभिन्न paramilitary संगठनों ने इसे टारगेटेड उत्पीड़न बताया है, जबकि CRPF के डायरेक्टर जनरल ने नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की पुष्टि की है।

सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के एक सीनियर DIG रैंक के ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया गया है. अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने ‘सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) बिल 2026’ के संसद में पास होने के समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई ऐसे कंटेंट शेयर किए थे, जो सरकार के खिलाफ थे. इस मामले में कई अधिकारियों का ट्रांसफर भी किया गया है. CAPF बिल वही बिल है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अप्रैल 2026 में मंजूरी दी थी. अब यह एक कानून बन गया. सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज के कैडर अधिकारियों ने इस बिल का विरोध किया था. साथ ही इसे ‘भेदभावपूर्ण’ बताया था. 

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सस्पेंड अधिकारी कौन?

सस्पेंड हुए अधिकारी की पहचान बीसी पात्रा के तौर पर हुई है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, बीसी पात्रा अगरतला में CRPF के त्रिपुरा सेक्टर के हेडक्वार्टर में तैनात हैं. पात्रा 1994 बैच के CRPF कैडर के अधिकारी है. उन्होंने NSG के साथ डेप्युटेशन पोस्टिंग पूरी करने के बाद अप्रैल में ही फोर्स में वापस लौटे. मामले पर अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद उन्हें कुछ दिन पहले ही CCS (CCA) रूल्स, 1965 (10) सब-रूल (1) का हवाला देकर सस्पेंड कर दिया गया था.

आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने का आरोप

अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पात्रा पर लगे आरोप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियो- वीडियो और फोटो शेयर करने से जुड़ा है. इन पोस्ट्स में कथित तौर पर CAPF बिल के पास होने के समय देश की मौजूदा सरकार को ‘बदलने’ की बात कही गई थी. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, खबर ये भी है कि CRPF के करीब 20 अधिकारियों का भी ट्रांसफर कर दिया गया है. सस्पेंड हुए अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने या उनके परिवारों ने सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 के खिलाफ आवाज उठाया था.

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अधिकारियों के ट्रांसफर और सस्पेंशन पर ‘अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री एसोसिएशन’ के जनरल सेक्रेटरी रणबीर सिंह का बयान आया है. उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों के परिजनों ने 23 मार्च और 6 मई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में भाग लिया था, उन्हें CRPF के टॉप ऑफिसर्स निशाना बना रहे थे.

‘टारगेटेड उत्पीड़न’ का आरोप

रणबीर सिंह ने अपने बयान में कहा कि वो केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी ध्यान CRPF अधिकारियों के साथ होने वाले ‘टारगेटेड उत्पीड़न’ की ओर लाना चाहते हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों के सस्पेंशन और उनके ट्रांसफर की पुष्टि CRPF के डायरेक्टर जनरल JP सिंह ने की. उन्होंने अपने बयान में कहा कि CRPF के सभी सेवारत और वर्दीधारी अधिकारी नियमों, कानूनों और ली गई शपथ से बंधे हुए हैं. ऐसे में कोई भी शब्द, चाहे वो लिखित हो या मौखिक या ऐसी कोई भी कार्रवाई, जो इन नियमों का उल्लंघन करती हो, तो उसके साथ देश के कानून के मुताबिक ही निपटा जाएगा.

कुछ अधिकारियों ने पात्रा के खिलाफ हुई इस कार्रवाई को ‘दुर्भावनापूर्ण’ और ‘अनुचित’ बताया. अधिकारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ इसलिए टारगेट किया जा रहा है क्योंकि वह CAPF कैडर अधिकारियों के मुख्य याचिकाकर्ता थे, जो प्रमोशन और IPS के सर्विस समानता और उससे जुड़े मामलों के लिए सुप्रीम कोर्ट तक चले गए थे. 

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