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CJP तो बना ली, पर 'कॉकरोच' चुनाव चिह्न फंसा न दे, जानें चुनाव आयोग के नियम

Cockroach Janta Party: भारत में चुनाव चिह्न भारतीय चुनाव आयोग यानी ECI तय करता है. चिह्न दो तरह के होते हैं. एक होते हैं "रिजर्व सिंबल" जो बड़ी और मान्यता-प्राप्त पार्टियों को मिलते हैं. क्या कॉकरोच जनता पार्टी अपना पार्टी सिंबल 'कॉकरोच' रख सकती है? नियम जान लीजिए.

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कॉकरोच जनता पार्टी ने खुद चुनाव लड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है. (फोटो -इंडिया टुडे)

भारत की राजनीति में आपने हाथ देखा है, कमल देखा है, साइकिल, लालटेन, झाड़ू, यहां तक कि पतंग, सीटी और कप-प्लेट भी देखा होगा. लेकिन क्या कभी आपने सोचा था कि एक दिन राजनीति के मैदान में ‘कॉकरोच’ भी एंट्री मार देगा?

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सिर्फ 6 दिन पहले बनी एक नई पार्टी- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’. नाम भी यूनिक, आइकन भी यूनिक और दावा भी सबसे अलग. लेकिन कहानी में एक ट्विस्ट है. अगर ये पार्टी भविष्य में चुनाव लड़ना चाहे, तो क्या चुनाव आयोग इसे कॉकरोच चुनाव चिन्ह देगा? या फिर आयोग के नियम इस रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बन जाएंगे? वो इसलिए कि चुनाव चिन्हों को लेकर आयोग के नियमों में जानवरों, पक्षियों और जीव-जंतुओं पर एक अलग पॉलिसी है.

ECI के नियम क्या कहते हैं? 

भारत में चुनाव चिह्न भारतीय चुनाव आयोग यानी ECI तय करता है. चिह्न दो तरह के होते हैं. एक होते हैं "रिजर्व सिंबल" जो बड़ी और मान्यता-प्राप्त पार्टियों को मिलते हैं. जैसे BJP का कमल, कांग्रेस पार्टी का हाथ और AAP का झाड़ू. दूसरे होते है “फ्री सिंबल”. ये नई और छोटी पार्टियों को या फिर निर्दलीय उम्मीदवारों को दिए जाते हैं. इनकी एक लंबी सूची है जिसमें 100 से ज्यादा चिन्ह हैं, जैसे ताला-चाबी, एयर कंडीशनर, लैपटॉप, शतरंज का बोर्ड, CCTV कैमरा, नेल कटर वगैरह-वगैरह.

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अब बात करते हैं कॉकरोच जनता पार्टी की और उसको मिलने वाले चिह्न की. तो सबसे पहले तो CJP को पहले ECI के सामने खुद को बतौर पार्टी रजिस्टर करवाना होगा. जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की सेक्शन 29A के तहत होता है. उसके बाद ही पार्टी चुनाव चिन्ह की मांग कर सकती है.

एक रजिस्टर्ड पार्टी चुनाव आयोग के सामने अपनी पसंद के 3 नए चिन्ह भी प्रस्ताव कर सकती है. लेकिन 1968 के चुनाव चिन्ह आदेश में एक साफ नियम है कि नया चिन्ह किसी पक्षी या जानवर जैसा नहीं होना चाहिए. पर कॉकरोच चुनाव पार्टी का तो चिह्न ही कॉकरोच है. जो कि एक जानवर है. और अब यहीं नियम CJP के लिए टेंशन बन सकता है.

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'कॉकरोच' बन सकता है सिंबल? 

वैसे इस पूरे नियम-कानून में एक टर्म और कंडीशन भी है, जो CJP के लिए राहत भरी हो सकती है. क्योंकि अंतिम फैसला चुनाव आयोग का होता है. और ECI यह तय करेगी कि तिलचट्टे को "जानवर" की कैटेगरी में रखना है या नहीं.

यह नियम 1991 से लागू है. उस समय पशु अधिकार कार्यकर्ता ने शिकायत की थी कि चुनाव प्रचार के दौरान असली जानवरों को घुमाया जाता है और उन पर जुल्म होता है. 2012 में ECI ने पार्टियों को कहा भी था कि चुनाव प्रचार में जानवरों का इस्तेमाल न करें. इसीलिए जानवर वाले चिन्ह देना बंद कर दिए गए. लेकिन जो पुरानी पार्टियां पहले से ऐसे चिह्न लेकर बैठी थीं जैसे BSP का हाथी और फॉरवर्ड ब्लॉक का शेर, उन्हें छूट मिली हुई है.

CJP को अगर कॉकरोच नहीं मिला तो वो मोबाइल फोन को अपना चिह्न बना सकती है. क्योंकि CJP ने कहा है कि उसका चुनाव चिह्न मोबाइल फोन हो सकता है. लेकिन ये भी इतना आसान नहीं है. क्योंकि ECI की "फ्री सिंबल" वाली लिस्ट में मोबाइल फोन है ही नहीं. लिस्ट में लैंडलाइन फोन और मोबाइल चार्जर जरूर हैं, पर मोबाइल फोन का नाम नहीं है. कुल मिलाकर देखें तो CJP अभी सिर्फ सोशल मीडिया पर खूब चमक रही है. पर चुनाव की दुनिया में आना इतना आसान नहीं होगा, और कॉकरोच का स‍िंबल लेना तो और भी मुश्किल है. वैसे कॉकरोच जनता पार्टी ने खुद चुनाव लड़ने का कोई ऐलान नहीं किया है.

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