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दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद को मिली बेल, हाईकोर्ट ने लगाई ये शर्तें

Umar Khalid's bail granted: उमर खालिद ने 15 दिन के लिए जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे ट्रॉयल कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था. अब दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें 3 दिन की अंतरिम जमानत दे दी है. हालांकि जमानत के साथ-साथ उनपर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं.

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उमर खालिद को तीन दिन की मिली अंतरिम जमानत. (फोटो-इंडिया टुडे)

दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद (Umar Khalid bail granted) को तीन दिन की अंतरिम जमानत दे दी है. दिल्ली दंगों के आरोपी को  1 से 3 जून तक अपनी मां की सर्जरी के लिए जमानत मिली है. उन्होंने इससे पहले ट्रॉयल कोर्ट में अपनी याचिका डाली थी जो खारिज कर दी गई. हालांकि जमानत के साथ-साथ उनपर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं. उन्हें दिल्ली-NCR से बाहर जाने की अनुमति नहीं है. 

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लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, उमर खालिद ने 15 दिन के लिए जमानत की याचिका दायर की थी जिसमें दो वजहें शामिल थीं. एक, चाचा के निधन के बाद होने वाली चेहल्लुम रस्म में शामिल होने के लिए और दूसरी, 2 जून को मां की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल के लिए. कोर्ट ने कहा कि चेहल्लुम रस्म में शामिल होना ज़रूरी नहीं है. सर्जरी वाली बात के विरोध में दिल्ली पुलिस ने कहा कि सर्जरी उतनी ज़रूरी नहीं है. एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुझाव दिया कि उमर खालिद को पुलिस की निगरानी में ही बाहर जाने की अनुमति हो. 

कोर्ट ने कड़े प्रतिबंध लगाए

उमर खालिद दिल्ली दंगों की ‘साजिश’ रचने के आरोप में करीब 6 साल से जेल में हैं. उनपर UAPA की धारा लगाई गई है. जस्टिस प्रतिभा सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने ये फैसला लिया.  कोर्ट ने कड़े प्रतिबंधों के साथ जमानत दी है. उमर खालिद केवल उसी पते पर रह सकते हैं जिनकी जानकारी अधिकारीयों के पास पहले से है. अस्पताल से कहीं और जाने की अनुमति उन्हें नहीं है. इस अंतराल में वो केवल एक ही मोबाइल का इस्तेमाल कर सकते हैं. हालांकि फाइनल ऑर्डर में और भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. 

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ये भी पढ़ें: उमर खालिद के लिए नई उम्मीद, SC ने बेल नहीं देने के अपने ही फैसले पर सवाल उठाए

कोर्ट ने अपने ही फैसले पर किया सवाल

कोर्ट का फैसला ऐसे समय पर आया है, जब एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद को जमानत देने से इनकार करने वाले अपने ही पिछले फैसले पर आपत्ति जताई थी. कहा था कि उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न देने का फैसला ठीक नहीं था. राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर किसी व्यक्ति को बेमियादी समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता. अदालत सैयद इफ्तिखार अंद्राबी से जुड़े नार्को- टेररिज्म मामले पर सुनवाई कर रही थी. इस दौरान कोर्ट ने माना कि UAPA से जुड़े केस में भी 'जमानत नियम है, जेल अपवाद है' का सिद्धांत लागू होता है. उमर खालिद दिल्ली दंगों के आरोप में 5 साल 3 महीने से जेल में हैं. दिल्ली में फरवरी 2020 में हिंसा भड़की थी, जिसमें 53 लोग मरे थे और 250 से ज्यादा घायल हुए थे.

वीडियो: उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

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