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सीएम भगवंत मान को बचाने के लिए पंजाब पुलिस के अफसरों ने दी 10 लाख की रिश्वत? 2 अरेस्ट

फरियादी जसप्रीत सिंह ने बताया कि जून 2026 में Gurugram के एक होटल में बैठकें हुईं, जिनमें कथित तौर पर पंजाब सरकार के सीनियर अफसरों ने हिस्सा लिया. आरोप है कि इन बैठकों में CM Bhagwant Mann के कथित वीडियो को फर्जी बताने को कहा गया.

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पंजाब के सीएम भगवंत मान (दाएं) के कथित वीडियो पर बवाल बढ़ता जा रहा है. (PTI)

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  • पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े विवादित वीडियो को लेकर हरियाणा की गुरुग्राम पुलिस ने 23 जून को एक FIR दर्ज की है, जिसमें पंजाब सरकार के सीनियर अफसरों पर दबाव बनाने का आरोप लगाया गया है।
  • इस मामले की पृष्ठभूमि में जनवरी में सामने आए विवादित वीडियो और उसके बाद अकाल तख्त द्वारा वीडियो को असली बताने तथा पंजाब सरकार और अकाल तख्त के बीच विवाद शामिल है, जिससे फर्जी रिपोर्ट बनाने के आरोप उभरे।
  • गुरुग्राम पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है और डिजिटल सबूत को जब्त करने के साथ मामले की जांच जारी है, जबकि राजनीतिक दलों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मांग भी की है।
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अरविंद ओझा

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित विवादित वीडियो के मामले में नया मोड़ आ गया है. 23 जून को हरियाणा में गुरुग्राम पुलिस ने एक FIR दर्ज की. इसमें फरियादी जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सी ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार के कुछ सीनियर अफसरों ने उन पर सीएम भगवंत के कथित वीडियो को AI बताने का दबाव बनाया. इल्जाम है कि अफसरों ने जसप्रीत को इस वीडियो को AI से बना हुआ, फर्जी या छेड़छाड़ किया गया बताने के लिए कहा. गुरुग्राम पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है.

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इंडिया टुडे से जुड़े अरविंद ओझा और अमन कुमार भारद्वाज की रिपोर्ट के मुताबिक, जसप्रीत सिंह का दावा है कि उसने पंजाब के अफसरों को साफ तौर पर कहा था कि कथित वीडियो का कॉन्टेंट ऐसा नहीं है कि उससे किसी व्यक्ति की पहचान या AI हेरफेर के बारे में भरोसेमंद नतीजा निकाला जा सके. इसके बावजूद उन पर लगातार दबाव बनाया गया. शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनकी गाड़ी में करीब 10 लाख रुपये जबरन रखे गए, ताकि मनचाही रिपोर्ट हासिल की जा सके.

श्री अकाल तख्त साहिब पहले ही इस वीडियो को असली बता चुका है. FIR दर्ज हुई तो अकाल तख्त ने भगवंत मान पर निशाना साधते हुए इस पूरे मामले को सिख समुदाय को गुमराह करने की साजिश बताया.

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गुरुग्राम के होटल में मिले पंजाब सरकार के अफसर

FIR के अनुसार, जसप्रीत सिंह ने बताया कि जून 2026 में गुरुग्राम के एक होटल में बैठकें हुईं, जिनमें कथित तौर पर पंजाब के सीनियर अफसरों ने हिस्सा लिया. आरोप है कि इन बैठकों में वीडियो को फर्जी साबित करने के लिए मनचाही फोरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने का प्लान बनाया गया. शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इन बैठकों के कथित वीडियो X पर शेयर किए. उन्होंने लिखा,

“गुरु की आज्ञा ना मानने वाले और खालसा पंथ के विरोधी भगवंत मान ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके श्री अकाल तख्त साहिब को गलत साबित करने के लिए जो नकली लैब रिपोर्ट बनवाई थीं, उनकी सच्चाई इन वीडियो से सामने आ गई है. इन वीडियो में लुधियाना के पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा और SP साइबर क्राइम जसनदीप सिंह गुरुग्राम के एक बड़े होटल में एक नकली फोरेंसिक लैब एक्सपर्ट से मिले और पैसे के बदले नकली रिपोर्ट बनवाने का सौदा किया.”

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सुखबीर सिंह बादल ने कार्रवाई के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का धन्यवाद करते हुए लिखा,

"मैं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने वहां के पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया है, साथ ही मैं यह भी अपील करता हूं कि गुरु साहिब का सम्मान करते हुए इन दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए."

फर्जी लैब रिपोर्ट का आरोप

शिकायत के मुताबिक, बाद में जसप्रीत सिंह को अरुण महेंद्र और अंकित से मिलवाया गया. अरुण और अंकित कथित तौर पर दो प्राइवेट लैब- साइफर सेंटिनल लैब और साइबरयान लैब से रिपोर्ट का इंतजाम करने में शामिल थे. जसप्रीत का कहना है कि उसे इन लैब की सरकार से मान्यता और कानूनी जरूरतों के बारे में पता नहीं था. गुरुग्राम पुलिस ने अरुण और महेंद्र दोनों को गिरफ्तार लिया है.

जसप्रीत सिंह ने रिपोर्ट तैयार करने, ड्राफ्ट बनाने, अप्रूव करने, सर्कुलेट करने और इस्तेमाल करने में शामिल सभी लोगों की भूमिका की डिटेल्ड जांच की मांग की है. शिकायत में मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव, ईमेल, वॉट्सऐप चैट, CCTV फुटेज, क्लाउड स्टोरेज रिकॉर्ड और मामले से जुड़े दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डेटा समेत डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने और जब्त करने की भी मांग की है.

ACP क्राइम-1 नवीन शर्मा ने बताया,

"दो लोगों को गिरफ्तार किया है. एक जींद जिले का रहने वाला अंकित है और दूसरा सिरसा जिले का रहने अरुण है. लैब का जिक्र है. लैब किसी भी सरकारी डिपार्टमेंट या उससे मान्यता प्राप्त नहीं है. "

ACP नवीन शर्मा ने आगे बताया,

"गुरुग्राम पुलिस की जांच में 10 लाख रुपये के लेन-देन का पता लगा है. शिकायतकर्ता ने कुछ पैसा अपने बैंक अकाउंट में जमा किया है. शिकायत में एक बड़े साहब का जिक्र है. उनसे लोग मिले थे... तो इन्वेस्टिगेशन का विषय है. जांच में जैसी चीजें सामने आएंगी, तो कार्रवाई की जाएगी."

जसप्रीत ने दावा किया कि कुछ निजी लैब्स से रिपोर्ट हासिल करने की कोशिश की गई और रिपोर्टों के ड्राफ्ट भी कथित तौर पर सीनियर अफसरों को दिखाए गए. शिकायत में यह भी कहा गया कि रिपोर्ट में बदलाव और जोड़-घटाव के सुझाव दिए गए ताकि नतीजा पहले से तय कहानी के मुताबिक हो.

मामले की जांच के बाद गुरुग्राम पुलिस के ACP क्राइम-1 नवीन शर्मा के आदेश पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (IT Act) की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. शिकायतकर्ता ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को खतरा बताते हुए हरियाणा पुलिस से सुरक्षा भी मांगी है.

अकाल तख्त ने क्या कहा?

पूरे घटनाक्रम पर अकाल तख्त ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. इंडिया टुडे से जुड़े असीम बस्सी की रिपोर्ट के मुताबिक, श्री अकाल तख्त साहिब के मीडिया सलाहकार जसकरण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के आपत्तिजनक वीडियो को झूठा साबित करने और अकाल तख्त को गलत ठहराने की कोशिश बेहद गंभीर मामला है. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जिन्होंने भी अकाल तख्त की मर्यादा को चुनौती दी, उन्हें नुकसान उठाना पड़ा.

अकाल तख्त का कहना है कि सरकार ने सिख समुदाय और पंजाब के लोगों को गुमराह करने के लिए फर्जी रिपोर्ट का सहारा लेने की कोशिश की. जसकरण सिंह ने हरियाणा पुलिस से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और गंभीर जांच हो, ताकि कथित साजिश में शामिल सभी लोगों की भूमिका सामने लाई जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि गुरु साहिब और अकाल तख्त को धोखा नहीं दिया जा सकता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद जनवरी में सामने आया था, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कथित तौर पर गुरुद्वारों की 'गोलक' पर टिप्पणी की थी, जिसका आपत्तिजनक वीडियो सामने आया. इस मामले में उन्हें अकाल तख्त के सामने पेश होने के लिए कहा गया था. उस समय सीएम भगवंत मान ने वीडियो को AI से तैयार बताया था और इसकी जांच की मांग की थी. 15 जून को अकाल तख्त ने अपने नतीजे में कहा कि वीडियो AI से बना हुआ नहीं है और इसे असली बताया.

अकाल तख्त ने कथित वीडियो के आधार पर मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु दोखी' और 'पंथ विरोधी' करार दिया. इसके बाद अकाल तख्त ने सीएम भगवंत मान और पंजाब कैबिनेट को 29 जून को पेश होने के लिए तलब किया था.

यह भी पढ़ें: सिख गुरुओं की बेअदबी करने वाला 'दो इंच लंबा' था, अब भगवंत मान फोरेंसिक रिपोर्ट ले आए

अकाल तख्त ने वीडियो असली बताया और वीडियो में सीएम भगवंत मान के ही मौजूद होने का दावा किया, तो पंजाब सरकार ने अकाल तख्त के दावों को चुनौती दी. पंजाब सरकार में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया था कि वीडियो में दिखाई देने वाला शख्स भगवंत मान नहीं हैं. सरकार ने गुरुग्राम की दो निजी लैब्स की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा था कि वीडियो से मुख्यमंत्री की पहचान साबित नहीं होती. अब उन्हीं रिपोर्ट को लेकर गुरुग्राम में FIR दर्ज हुई, जिससे मामला और भड़क गया है.

कांग्रेस-अकाली दल ने AAP को घेरा

राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार को घेरना शुरू कर दिया है. शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की है.

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अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का पोस्ट. (X)

उन्होंने आरोप लगाया कि अकाल तख्त को गलत साबित करने के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया. वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी कहा कि अगर आरोप सही साबित होते हैं तो मुख्यमंत्री नैतिक आधार पर पद पर बने रहने का अधिकार खो चुके हैं.

वीडियो: अकाल तख्त के फैसले पर भगवंत मान ने उठाए सवाल, सफाई भी दी

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