CBSE की 12वीं की बोर्ड परीक्षा. देश के लाखों बच्चों का भविष्य तय करने वाला एग्जाम. लेकिन इस बार कॉपियां चेक करने के नाम पर ऐसी गड़बड़ी सामने आई कि खुद बोर्ड को अपनी ही चुनी कंपनी पर एक्शन लेने की तैयारी करनी पड़ गई. कहीं बच्चों को अपनी कॉपी की जगह किसी और की कॉपी दिख गई, तो कहीं स्कैन इतने धुंधले थे कि जवाब पढ़ना तक मुश्किल हो गया.
OSM विवाद पर CBSE की सफाई, COEMPT पर एक्शन की तैयारी, जांच में क्या निकला?
CBSE OSM row: इस बार CBSE ने सिस्टम में कुछ बदलाव किए. पहली बार On-Screen Marking OSM system इंट्रोड्यूस किया गया था. इसके लिए CBSE ने जिस कंपनी को चुना वो पहले से ही विवादों में थी. फिर से हुई गड़बड़ी के बाद CBSE ने अपना पक्ष रखा है.


हैरानी की बात ये है कि हैदराबाद बेस्ड जिस कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड (Coempt Eduteck Pvt. Ltd.) कंपनी को ये जिम्मेदारी दी गई थी, उसका नाम पहले भी बड़े विवादों में आ चुका है. साल 2019 में तेलंगाना बोर्ड के रिजल्ट विवाद में भी इसी कंपनी पर सवाल उठे थे, जब लाखों बच्चों के रिजल्ट में भारी गड़बड़ी हुई थी. अब वही कंपनी फिर सुर्खियों में है. सवाल ये कि आखिर CBSE के डिजिटल सिस्टम में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? और क्या लाखों छात्रों के भविष्य के साथ एक बार फिर लापरवाही हुई? सब कुछ सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं.
OSM फेल होने की पूरी कहानीइस बार CBSE ने सिस्टम में कुछ बदलाव किए. पहली बार On-Screen Marking OSM system इंट्रोड्यूस किया गया था. ये सिर्फ 12th क्लास के लिए था. पहले टीचर स्टूडेंट्स की आंसर शीट्स खुद चेक करते थे. इस बार आंसर शीट्स को पहले स्कैन किया गया. फिर उनकी डिजिटल कॉपीज को एक सिक्योर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया. इसके बाद टीचर्स कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठकर आंसर चेक करते और डिजिटली स्कोरबोर्ड तैयार हुआ. और इसी तरह 18 लाख स्टूडेंट्स की 1 करोड़ आंसर बुक्स चेक की गईं.
रिजल्ट आने के बाद स्टूडेंट्स को रिचेकिंग का मौका मिलता है, इस बार रिचेकिंग से पहले स्कैंड कॉपीज दिखा दी गईं. जिससे स्टूडेंट्स पहले खुद अपनी कॉपी देख लें फिर रिचेकिंग के लिए अप्लाई करें. इन्हीं स्कैंड कॉपीज में सारी गड़बड़ियां पाई गई थीं.
इंडियन एक्सप्रेस ने एक ऑफिशियल सोर्स का हवाला देकर बताया है कि CBSE की एक टीम जांच करेगी कि स्कैनिंग में कितनी बड़ी गड़बड़ हुई है. इसके बाद, जितनी कॉपियों में गलती पाई जाएगी, उसी हिसाब से कंपनी पर जुर्माने की रकम तय होगी.
2019 में कंपनी की गड़बड़ीअब आपको कंपनी से जुड़े 2019 के OSM विवाद के बारे में बताते हैं. CBSE ने जिस Coempt एजूटेक कंपनी को OSM का कॉन्ट्रैक्ट दिया, वो पहले भी विवादों में रह चुकी है. 2019 में तब ये कंपनी ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (Globarena Technologies Private Limited) नाम से जानी जाती थी. तेलंगाना बोर्ड के करीब 10 लाख स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया था और इनमें 3 लाख फेल हो गए. रिजल्ट के एक हफ्ते के अंदर 18 बच्चों ने अपनी जान ले ली थी. तब राज्य में बीआरएस की सरकार थी, उसने तुरंत कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था.
तब तेलंगाना पेरेंट्स एसोसिएशन ने भी इस गड़बड़ी पर सवाल उठाए थे. तेलंगाना सरकार की एक जांच कमेटी ने बाद में अपनी रिपोर्ट में बताया कि जल्दी रिजल्ट निकालने के दबाव में ये गलतियां हुई थीं. इस कमेटी का कहना था कि कॉपियां जांचने वाले कई टीचर्स की ड्यूटी तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भी लगी थी. इस वजह से उन्होंने कॉपियां जांचने का काम बहुत जल्दबाजी में किया. इस विवाद के तुरंत बाद ग्लोबारेना टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड ने अपना सारा कामकाज समेटकर सहयोगी कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड में शिफ्ट कर दिया था.
अब CBSE ने क्या फैसला लिया?CBSE ने पिछले साल जून में OSM को मंजूरी दी थी. बोर्ड की कमेटी को ये सुझाव दिया था कि इस ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को पूरे देश में लागू करने से पहले, CBSE के अलग-अलग रीजनल ऑफिसों में पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाए. पर ऐसा नहीं किया गया और जनवरी में केवल पांच स्कूलों में इस सिस्टम का एक ड्राय रन किया गया. इसके बाद, तीन दिनों के इस प्रॉसेस से जो सुझाव मिले, उनके आधार पर सॉफ्टवेयर को अपडेट कर दिया गया.
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कंपनी को क्यों चुना गया और गलती कहां हुई?कंपनी के सलेक्शन को लेकर अधिकारियों ने बताया कि CBSE ने बकायदा टेंडर निकाला था और इस कंपनी ने सबसे कम कीमत की बोली लगाई थी. सोर्सेज के मुताबिक CBSE ने 40 पन्नों की एक कॉपी को स्कैन करने और सॉफ्टवेयर के काम के लिए इस कंपनी को केवल 25 रुपये प्रति कॉपी का पेमेंट किया, जबकि दूसरी सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी ने इसके लिए 60 रुपये मांगे थे.
एक अधिकारी के मुताबिक, ‘कॉपियों की अदला-बदली शायद मास्किंग के दौरान हुई. मास्किंग वो प्रोसेस है जिसमें गोपनीयता बनाए रखने के लिए जांच से पहले छात्रों के रोल नंबर छिपा दिए जाते हैं. सोर्सेज ने इस बात पर जोर दिया कि समस्या ऑनलाइन स्क्रीन मार्किंग की तकनीक में नहीं थी, बल्कि इसे लागू करने के दौरान कुछ मानवीय गलतियों की वजह से हुई थी.
वहीं, CBSE ने अपने बचाव में कहा कि अचानक आई इस रिकॉर्ड तोड़ भीड़ और सिस्टम में इंटरफेरेंस की कोशिशों की वजह से ये गड़बड़ी हुई. CBSE भले ही इसे ‘मानवीय गलती’ बता रहा हो, लेकिन हजारों धुंधली कॉपियां और दूसरे छात्रों की आंसर शीट भेजे जाने जैसी गलतियां मामूली कहकर टाली नहीं जा सकतीं.
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