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तिहाड़ से रिहाई के अगले दिन CJP नेताओं को समन, अब क्राइम ब्रांच करेगी पूछताछ

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर घुसने और प्रदर्शन के दौरान तिरंगा फहराने की कोशिश से जुड़े दो मामलों की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है. सौरव दास और आशुतोष रांका 21 अक्टूबर को तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे.

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सौरव और आशुतोष को क्राइम ब्रांच ने पूछताछ के लिए बुलाया है (COURTSEY- ITG)

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को समन भेजा है. ये समन जंतर-मंतर पर हुए उनके विरोध-प्रदर्शन से जुड़े दो मामलों में बयान दर्ज कराने के लिए भेजा गया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, CJP के सदस्य अजिंक्य शिंदे को भी समन भेजा गया है. यह जांच बिना परमिशन कहीं एंट्री करने (trespassing) और किसी सरकारी अधिकारी के आदेशों का पालन न करने के आरोपों से जुड़ी है.

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सौरव दास और आशुतोष रांका को 22 अक्टूबर, दोपहर 12 बजे राजौरी गार्डन स्थित क्राइम ब्रांच ऑफिस में पेश होने के लिए कहा गया है. यह समन तब आया है, जब ये दोनों नेता एक हफ्ते तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद तिहाड़ जेल से रिहा हुए हैं.

जंतर-मंतर परिसर में घुसने की कोशिश 

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच CJP से जुड़े दो मामलों की जांच कर रही है. ये जांच CJP सदस्यों द्वारा जंतर-मंतर में घुसने और विरोध-प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने की कोशिश से जुड़ी है. यह विरोध-प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (CEC Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर की घटना से जुड़े दोनों मामलों को आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया. इनमें से एक मामला कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन में, जबकि दूसरा संसद मार्ग (पार्लियामेंट स्ट्रीट) पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था. पुलिस के अनुसार, दास, रांका और CJP के दूसरे मेंबर्स ने जंतर-मंतर इलाके में घुसने की कोशिश की थी. ये उन्होंने तब किया जब जंतर-मंतर की विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में मान्यता खत्म कर दी गयी थी. 

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सात दिन जेल के बाद रिहाई

21 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका तिहाड़ जेल से बाहर आए. एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने दिल्ली पुलिस की उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की गई थी. दोनों नेता 14 अक्टूबर से ही हिरासत में थे. उन पर शांति भंग करने और पहले भरे गए बॉन्ड का उल्लंघन करने के आरोप में कार्रवाई की गई थी. मजिस्ट्रेट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया. 

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कोर्ट ने माना कि दोनों नेताओं द्वारा दिए गए आश्वासन को देखते हुए, उन्हें और अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रखने की जरूरत नहीं है. उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे अपने बॉन्ड और वचनों का पालन करें और आगे की कानूनी कार्यवाही में उपस्थित हों.

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