क्या राहुल गांधी और अभिजीत दिपके मेंं ठन गई है? दोनों ही बीजेपी और चुनाव आयोग के खिलाफ हैं, दोनों CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन एक-दूसरे के साथ खड़े होने को तैयार नहीं. क्या जंतर-मंतर से निकली CJP अब कांग्रेस के वोटर और युवा समर्थकों के बीच अपनी अलग जगह बना रही है? और क्या कांग्रेस और सीजेपी के बीच इस टकराव का फायदा बीजेपी को मिल रहा है?
राहुल के ऑफर पर दिपके का इनकार, CJP-कांग्रेस के बीच किस बात पर खिंची लकीर?
राहुल गांधी के 3 अक्टूबर के ‘सत्याग्रह’ ट्वीट के बाद CJP की तरफ से आए बयानों ने दोनों के रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लीडरशिप को लेकर एक बहस छिड़ गई है. कांग्रेस के नेता CJP पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं CJP कार्यकर्ता कांग्रेस को निशाने पर ले रहे हैं. पूरी कहानी क्या है?

राहुल गांधी के 3 अक्टूबर के ‘सत्याग्रह’ ट्वीट के बाद CJP की तरफ से आए बयानों ने इन सवालों को और हवा दे दी है. आखिर कांग्रेस और CJP के बीच खटास की असली वजह क्या है? और क्या ये टकराव आगे चलकर विपक्ष की राजनीति को बदल सकता है? पूरी कहानी समझते हैं.
राहुल गांधी ने क्या ट्वीट किया?राहुल गांधी ने अपने X अकाउंट से एक डिजिटल ‘सत्याग्रह’ कैंपेन शुरू किया. कहा कि देशभर में अलग-अलग मुद्दों को लेकर चल रहे संघर्षों को एक साथ लाने की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने संसद से लेकर सड़कों तक जहां भी जरूरत हो, वहां इन आंदोलनों के समर्थन का भरोसा दिया.
यानी कुल मिलाकर देखें तो उन्होंने ना सिर्फ तमाम विपक्षी दल बल्कि अलग-अलग ग्रुप जो अलग-अलग मुद्दे पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं, सबको साथ आने की अपील की. राहुल गांधी ने नाम नहीं लिया, मगर CJP की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया. लेकिन CJP ने ऐसा करने से इनकार कर दिया.
CJP के जवाब से भड़की कांग्रेस3 अक्टूबर को CJP के आशुतोष रांका और सौरव दास ने एक पोस्ट किया. उन्होंने एक ‘स्वघोषित लिबरल’ पर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके को निशाना बनाने का आरोप लगाया. दोनों ने कांग्रेस का नाम नहीं लिया, लेकिन सौरव दास ने बीजेपी के अलावा एक और पार्टी का जिक्र किया. फिर क्या था, कांग्रेस पार्टी के नेता तुरंत एक्टिव हो गए और इस इशारे को अपने पर लेकर CJP को निशाने पर लेने लगे.
CJP के असम में स्कूल ऑडिट अभियान के दौरान इसके को-कन्वीनर आशुतोष रांका और 40 से ज्यादा वॉलंटियर्स को गुवाहाटी में एक बैठक से पहले हिरासत में लिया गया था. कांग्रेस प्रवक्ता रीतम सिंह ने कहा था कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनकी रिहाई में मदद की. रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद रांका ने असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई से मिलने से इनकार कर दिया.
कांग्रेस पार्टी के इन्हीं आरोपों पर अब CJP की सफाई आई. सौरव दास ने कहा कि बीजेपी के अलावा एक और पार्टी है जो केवल खुद को भारत और संविधान बचाने का जिम्मेदार मानती है.
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लीडरशिप की लड़ाईदरअसल, CJP जंतर-मंतर के प्रदर्शनों के बाद खुद को एक डिसेंट्रलाइजेशन मूवमेंट और बाकी पॉलिटिकल पार्टीज से अलग बताती है. वहीं, कांग्रेस नेताओं ने CJP को अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी से समर्थन मिलने का आरोप लगाया है.
CJP के स्कूल ठीक करो अभियान के दौरान कांग्रेस ने भी सरकारी स्कूलों के मुद्दे पर अपनी सक्रियता बढ़ाई. जिसके बाद कांग्रेस पर CJP का आइडिया कॉपी करने का आरोप लगा. CJP के विरोध को लेकर खुद कांग्रेस के अंदर भी टकराव है. कांग्रेस नेता तुषार गांधी ने कहा कि कांग्रेस, CJP और AISA एक ही विरोधी के खिलाफ लड़ रहे हैं और एक-दूसरे पर निशाना साधने का ये समय नहीं है.
CJP और कांग्रेस दोनों बीजेपी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. दोनों के मुद्दे लगभग एक जैसे हैं पर फिर भी टकराव है. इसके पीछे कई कारण है, जैसे, क्रेडिट और लीडरशिप की लड़ाई. इससे पहले दोनों ने पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ अलग-अलग प्रदर्शन किए थे, लेकिन मांग एक ही थी ‘उनका इस्तीफा’.
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के बाद CJP, जेन जी के बीच काफी फेमस हो गई है. कांग्रेस चाहती है कि ये सारे विरोध-प्रदर्शन उसके सत्याग्रह प्लेटफॉर्म के तहत आएं. वहीं, CJP खुद को किसी राजनीतिक पार्टी से अलग और स्वतंत्र बताती है. वो कांग्रेस के कंट्रोल में नहीं आना चाहती.
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