चीन खुद को दुनिया की बड़ी ताकत के तौर पर पेश करता रहता है. ग्लोबल वर्ल्ड में होने वाली बातचीत से लेकर, नैरेटिव सेट करने का दावा भी करता रहा है. मार्केट में ऐसी कोई खबर छोड़ो कि बातचीत का नैरेटिव सेट हो सके. डिफेंस सेक्टर की ये पुरानी तरकीब है. इस बार उसने 'गॉसिप मार्केट' को एक नया टॉपिक दिया है. नाम है DF-17 यानी डोंगफेंग-17 मिसाइल. चीन के सरकारी टेलीविजन ने बाकायदा इस पर एक शो प्रसारित किया है.
चीन ने दिखाई अपनी मारक मिसाइलों की ताकत, भारत पर दबान बनाने के लिए नई चाल?
चीन ने एक बार फिर अपनी सैन्य और मिसाइल ताकत की नुमाइश की है. DF-17 मिसाइल को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है. यह कॉम्बैट ड्यूटी यानी जंग के लिए रेडी है. साथ ही, उड़ान के दौरान साइड में मुड़ते हुए Hypersonic Missile से चल सकती है.

इस शो में मिसाइल के टेस्ट लॉन्च, दुनिया के पहले हाइपरसॉनिक ग्लाइड हथियार का प्रदर्शन किया गया. चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने DF-17 का वीडियो जारी किया है. वीडियो में मिसाइल का कमांड एंड कंट्रोल, रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम और फील्ड ऑपरेटर्स को दिखाया गया है.
DF-17 में क्या खास है?चीनी की मिलिट्री मामलों के एक्सपर्ट झांग जुनशे ने इस मुद्दे पर वहां के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स से बात की है. झांग ने बताया कि DF-17 चीन की मिसाइल फोर्स का एक अहम हिस्सा है. यह मॉडर्न एयर-डिफेंस ऑपरेशंस का रुख पूरी तरह बदल सकता है. उन्होंने कहा कि इस हथियार की स्पीड हाइपरसॉनिक है. ये इसे एडवांस्ड एयर-डिफेंस सिस्टम से बचकर निकलने में सक्षम है. साथ ही, अहम मिलिट्री ठिकानों पर सटीक निशाना लगाने में मदद करती है.
लेकिन इस सबसे इतर एक बात झांग ने कही जो कि भारत के लिए चिंता का विषय है. झांग ने कहा कि इस मिसाइल को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है. यह कॉम्बैट ड्यूटी यानी जंग के लिए रेडी है. उनके मुताबिक, यह उड़ान के दौरान साइड में मुड़ते हुए हाइपरसॉनिक स्पीड से चल सकती है. इससे इसके रास्ते का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने कहा कि इन खूबियों की वजह से पारंपरिक एयर-डिफेंस सिस्टम के लिए इस हथियार को ट्रैक करना और उसे रोकना मुश्किल होता है.

दूसरी ओर हॉन्ग-कॉन्ग के समाचार चैनल साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) ने भी DF-17 पर एक रिपोर्ट छापी है. SCMP ने PLA की ओर से जारी वीडियो पर एक लेख छापा है. वीडियो में एक एक्सरसाइज को दिखाया गया है. एक्सरसाइज के दौरान, एक TEL यूनिट को अपनी लॉन्च की तैयारी रोकने का आदेश दिया गया. इसके बाद उसे दूसरी जगह जाने और तय समय पर देरी से हमला करने का निर्देश दिया गया. डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक, मिसाइल की अंदरूनी थर्मल बैटरी पहले ही चालू हो चुकी थी. लेकिन यूनिट मिसाइल को सफलतापूर्वक लॉन्च करने से पहले काफी दूरी से सुरक्षित रूप से बाकी गतिविधियां करने में सक्षम थी.
मिसाइल के लिए पारंपरिक ऑपरेशनल प्रोटोकॉल हैं. इसके तहत, एक बार अंदरूनी बैटरी चालू हो जाने के बाद, मिसाइल को एक तय समय-सीमा में किसी निश्चित जगह से ही लॉन्च किया जाना चाहिए. चालू हालत में उसे लंबी दूरी तक ले जाना जोखिम भरा माना जाता है. हालांकि, डेटा की जांच करने के बाद, मौके पर मौजूद वैज्ञानिकों ने मिसाइल को आगे की गतिविधियों और लॉन्च के लिए मंजूरी दे दी. ऑपरेटर्स ने हथियार प्रणाली और अपनी ट्रेनिंग पर पूरा जताते हुए कहा कि वे लॉन्च के लिए तैयार हैं.
कुल मिला कर देखें तो इस वीडियो में मिसाइल लॉन्च और ऑपरेशनल क्षमता के लिए तैयारी दिखाया है. चीनी सेना दुनिया को अपनी तैयारियों का संदेश दे रही है. साथ ही ये बयान देना कि ये हथियार जंग के लिए रेडी है, दूसरे देशों पर दबाव बनाने की टेक्निक है. क्योंकि ये मिसाइल 2019 से ही चीन के पास है. 2019 में पहली बार इसे दुनिया के सामने रखा गया था. लेकिन अब इसे फिर से 2026 में दिखाया गया है.
इस मिसाइल के कुछ फीचर्स पर नजर डालें तो DF-17 में DF-16B शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के ही रॉकेट बूस्टर का इस्तेमाल किया गया है. बैलिस्टिक मिसाइल के मुकाबले, इसके ग्लाइड व्हीकल DF-ZF को एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना ज्यादा मुश्किल होता है. क्योंकि बैलिस्टिक मिसाइल का रास्ता पहले से पता लगाया जा सकता है. लेकिन ये अपना रास्ता बदलती रहती है. कम सुरक्षित हथियारों के इस्तेमाल से पहले, एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को कमज़ोर करने के लिए DF-17 से हमला किया जा सकता है. मिसाइल में हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल लगा है. जिससे वायुमंडल में स्किम यानी सतह के साथ-साथ चलने की सुविधा देता है. इससे यह उतनी ही दूरी तय करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल की तुलना में ज्यादा दूरी तक रडार की पकड़ में नहीं आती है. इस मिसाइल की रेंज 1800 से 2500 किलोमीटर होने का दावा किया जाता है.
जवाब में भारत के पास क्या है?भारत भी लगातार हाइपरसॉनिक हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. 2006-07 में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने भी हाइपरसॉनिक मिसाइल की जरूरत महसूस की थी. उस मशहूर कांफ्रेंस में उन्होंने कहा था कि अगले 15 सालों में भारत हाइपरसॉनिक मिसाइल डेवलप करेगा.
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2023 तक भारत ने एक लॉन्ग रेंज एंटी शिप हाइपरसॉनिक मिसाइल का टेस्ट कर लिया. इसकी रफ्तार मैक 10 बताई जाती है. साथ ही इसकी रेंज 1500 किलोमीटर तक है. भारत के तटों की रक्षा में ये मिसाइल एक अहम रोल अदा करती हैं. यानी भारत भी चीन को कह रहा है, तू डाल-डाल मैं पात-पात. संदेश साफ है कि अगर चीन भारत की तरफ कोई आक्रामकता दिखाएगा, तो भारत उसका उसी की भाषा में जवाब देगा. इसके अलावा भारत लगातार दूसरे हाइपरसॉनिक हथियारों पर भी काम कर रहा है.
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