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बंदर ने नवजात बच्ची मां से छीनकर कुएं में फेंक दी, जिंदा बचने की कहानी दंग कर देगी

कुछ देर पानी में रहने की वजह से काफी पानी बच्ची के शरीर में चला गया था. संयोग से राजेश्वरी राठौर नाम की एक नर्स भी वहां मौजूद थीं. उन्होंने बिना समय गंवाए बच्ची को तुरंत CPR देना शुरू किया. इससे बच्ची की सांसें चलने लगीं.

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छत्तीसगढ़ में 20 दिन की नवजात को बंदर ने कुंए में फेंका. (फोटो- इंडिया टुडे)
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दुर्गेश यादव

छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा में एक नवजात बच्ची को बंदर ने कुएं में फेंक दिया. बच्ची का जन्म महज 20 दिन पहले हुआ है. घटना के वक्त वो अपनी मां की गोद में थी. बताया गया कि बंदर ने मां के हाथ से बच्ची को खींच कर उसे कुएं में फेंक दिया. हालांकि बच्ची की जान नहीं गई. गांव वालों की तत्परता और एक स्थानीय नर्स की सूझबूझ से बच्ची को बचा लिया गया.

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घटना नैला थाना क्षेत्र के सिवनी गांव की है. इंडिया टुडे से जुड़े दुर्गेश यादव की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां की निवासी सुनीता राठौर अपनी 20 दिन की बेटी को लेकर घर के बरामदे में बैठी थीं. पड़ोस की छत पर बंदरों का एक झुंड उछल-कूद मचा रहा था. अचानक एक बड़ा बंदर बरामदे में बैठी सुनीता की ओर लपका और उनकी 20 दिन की नवजात को छीनकर छत पर चढ़ गया.

बच्ची छिनते ही सुनीता ने चीखना शुरू कर दिया. उनकी आवाज सुनकर परिजन और गांव वाले बंदर के पीछे दौड़े. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10 मिनट तक बंदर बच्ची को लेकर इधर-उधर भागता रहा. बाद में लोगों के डर से उसने बच्ची को एक कुएं में फेंक दिया. लेकिन बच्ची डूबी नहीं. गांव वालों का कहना है कि उन्हें वो पानी में तैरती हुई नजर आई. ग्रामीणों ने तेजी से बच्ची को बचाया. उन्होंने कुएं में रस्सी की मदद से एक बाल्टी को डाला और बच्ची को बाहर निकाल लिया.

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कुछ देर पानी में रहने की वजह से काफी पानी बच्ची के शरीर में चला गया था. संयोग से राजेश्वरी राठौर नाम की एक नर्स भी वहां मौजूद थीं. उन्होंने बिना समय गंवाए बच्ची को तुरंत CPR देना शुरू किया. इससे बच्ची की सांसें चलने लगीं. बाद में उसे पास के ही सरकारी हॉस्पिटल में लाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत अब स्थिर है. उसे किसी गंभीर चोट का खतरा नहीं है.

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बच्ची के पिता अरविंद राठौर मड़वा पावर प्लांट में काम करते हैं. घटना के समय वह ड्यूटी पर थे. उन्होंने कहा कि गांव में बंदर अक्सर दिखते हैं, लेकिन ऐसी घटना पहले कभी नहीं हुई. अगर गांव वालों और नर्स की मदद नहीं मिलती, तो कुछ भी हो सकता था. उन्होंने लोगों से अपील की है कि छोटे बच्चों को कभी अकेला न छोड़ा जाए.

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