ट्रेन में टिकट के साथ चढ़े हों या पास लेकर. अपना पहचान पत्र साथ रखना भूल गए तो ‘बेटिकट’ ही माने जाएंगे. ये नया ‘फरमान’ सेंट्रल रेलवे का है, जो 1 अक्टूबर से ट्रेनों में टिकटों की गहनता से जांच करने का कैंपेन शुरू करने वाला है.
1 अक्टूबर से रेलवे सख्त, ट्रेन टिकट होने के बाद भी माने जाएंगे 'बेटिकट' अगर...
सेंट्रल रेलवे 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक टिकटों की गहन जांच का अभियान चलाएगा, जिसमें यात्रियों को सफर के दौरान मूल पहचान पत्र साथ रखना होगा.

रेलवे का ये कैंपेन 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक चलेगा. यानी त्योहारों से भरपूर इस पूरे महीने में अगर रेल से कहीं जाना है तो आईडी कार्ड भूलने की गलती मत करें. इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस स्पेशल जांच की जद में हर वो शख्स होगा, जो ट्रेन में यात्रा कर रहा है. कोई भी ये कहकर नहीं बच सकता कि उसके पास स्पेशल पास है. जो भी ट्रेन में मिलेगा, टीटीई उससे पहचान पत्र मांगेंगे. नहीं दिखाने पर वही कार्रवाई होगी जो बिना टिकट यात्रा करने वालों के साथ होती है.
आईडी न होना छोटी गलती नहींरेलवे ने कहा कि इस पूरे अभियान के दौरान आईडी साथ न रखना किसी भी पैसेंजर के लिए ‘छोटी गलती’ नहीं माना जाएगा. अभी तक टिकट होने, लेकिन आईडी न होने पर भी टीटीई थोड़ी रियायत दे देते थे. लेकिन इस एक महीने तो ऐसी कोई छूट नहीं मिलने वाली. अगर एक टिकट पर कई लोग यात्रा कर रहे हैं तो उनमें कम से कम एक के पास तो वैलिड आईडी होनी ही चाहिए. अगर उनमें से किसी के पास भी पहचान पत्र नहीं होगा तो उस टिकट पर यात्रा कर रहे सभी पैसेंजरों को बेटिकट माना जाएगा. इसके बाद उन पर भी वही जुर्माना लगेगा, जो बिना टिकट वालों पर लगता है.
आरक्षित कोटा या रियायती कोटा वाले लोगों की जांच की जाएगी. इसमें महिला यात्री, सीनियर सिटिजन, वीआईपी, विकलांग आदि सभी यात्री शामिल होंगे. ऐसे लोग सिर्फ टिकट या पास दिखाकर नहीं बच पाएंगे. उनके पहचान पत्र से इसकी भी जांच की जाएगी कि वो उस सुविधा के हकदार हैं या नहीं, जिसके आधार पर वो ट्रेन में घूम-फिर रहे हैं.
ये नया रूल ई-पास और पीटीओ वालों के लिए भी होगा.
रेलवे कर्मचारियों और उनके परिवार वालों की ट्रेन यात्रा के लिए दो सुविधाएं होती हैं. एक तो ई-पास होता है, जो एक डिजिटल सुविधा है. इससे रेलवे कर्मचारी फ्री में कहीं भी यात्रा कर सकते हैं. दूसरा पीटीओ यानी प्रिविलेज टिकट ऑर्डर होता है. यह रेलवे कर्मचारियों के परिवार वालों के लिए होता है, जिसके जरिए उन्हें कन्सेशन के साथ टिकट मिलता है. रेलवे उनसे किराये का सिर्फ एक तिहाई वसूलता है. सेंट्रल रेलवे ने साफ किया है कि E-Pass या PTO के जरिए यात्रा करने वाले हर व्यक्ति को सफर के दौरान अपना मूल पहचान पत्र साथ रखना होगा. नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है.
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जनरल टिकट वाले भी रहें सावधानये सख्ती सिर्फ रिजर्वेशन वाले यात्रियों के लिए नहीं है. जनरल टिकट वाले भी सावधान रहें. रेलवे के अधिकारी जनरल टिकट पर यात्रा करने वालों की भी जांच कर सकते हैं. किसी के टिकट पर शक होगा तो तुरंत टीटीई ऐप पर उसे चेक किया जाएगा. मुंबई लोकल से सफर करने वालों से भी कहा गया है कि यात्रा के दौरान वो अपनी वैध आईडी अपने साथ रखें. अक्टूबर महीने में रेलवे अपनी जांच में काफी सख्त होने वाला है.
अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद रेलवे की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का मिसयूज रोकना है. कई यात्री स्पेशल छूट वाले टिकट और पास का गलत इस्तेमाल करते हैं. ऐसे लोगों पर लगाम लगाने और रेलवे की रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ये अभियान चलाया जा रहा है.
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