भारत में जनगणना 2027 (Census 2027) की औपचारिक घोषणा कर दी गई है. सरकार ने 22 जनवरी 2026 को हाउस लिस्टिंग (घरों की सूचीकरण) चरण के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दी है. ये देश का पहला डिजिटल सेंसस होगा. इसमें लगभग 30 लाख लोग एंड्रॉयड और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से डेटा कलेक्ट करेंगे. कुल खर्च लगभग 11,718 करोड़ रुपये का होगा.
Census 2027 का नोटिफिकेशन जारी, पहले फेज में ये 33 सवाल पूछे जाएंगे
पहला चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस) अप्रैल 2026 से शुरू होगा. दूसरा चरण (जनसंख्या गणना) फरवरी 2027 में होगा.


जनगणना दो चरणों में पूरी होगी. पहला चरण (हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस) अप्रैल 2026 से शुरू होगा. प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच 30 दिनों की अवधि चुनकर ये काम पूरा करेंगे. इसमें घर-घर जाकर या सेल्फ-एनुमरेशन के जरिए जानकारी ली जाएगी. फील्ड ऑपरेशन शुरू होने से पहले 15 दिनों का सेल्फ-एनुमरेशन विंडो भी उपलब्ध होगा.

दूसरा चरण (जनसंख्या गणना) फरवरी 2027 में होगा. जिसमें आबादी की गिनती के साथ-साथ जाति आधारित आंकड़े भी स्वतंत्रता के बाद पहली बार शामिल किए जाएंगे. पिछली व्यापक जाति जनगणना 1881-1931 के बीच हुई थी.
सरकार ने गुरुवार, 22 जनवरी को 33 सवालों की लिस्टी जारी की, जो गणनाकर्ता (इन्यूमरेटर्स) 1 अप्रैल से शुरू होने वाली हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के दौरान नागरिकों से पूछेंगे. ये सवाल रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया, मृत्युंजय कुमार नारायण ने गजट नोटिफिकेशन में जारी किए हैं. नोटिफिकेशन में कहा गया है,
हाउस लिस्टिंग चरण में 33 सवाल“केंद्र सरकार निर्देश देती है कि सभी जनगणना अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र की सीमाओं में, सभी व्यक्तियों से लिस्ट में दिए गए सवाल पूछ सकते हैं.”
पहले चरण में गणनाकर्ता 33 सवाल पूछेंगे. ये सवाल घर की संरचना, सुविधाओं, संपत्ति और परिवार की बुनियादी जानकारी पर केंद्रित हैं. 33 सवालों में शामिल हैं:
- भवन संख्या (नगर निगम या स्थानीय प्राधिकरण या जनगणना संख्या)
- मकान संख्या
- मकान के फर्श की प्रमुख सामग्री
- मकान की दीवार की प्रमुख सामग्री
- मकान की छत की प्रमुख सामग्री
- मकान का उपयोग
- मकान की स्थिति (Condition)
- परिवार संख्या (Household number)
- परिवार में सामान्य रूप से रहने वाले व्यक्तियों की कुल संख्या
- परिवार के मुखिया का नाम
- परिवार के मुखिया का लिंग
- क्या परिवार का मुखिया अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य से संबंधित है
- मालिकाना हक की स्थिति (Ownership status)
- परिवार के पास विशेष रूप से उपलब्ध आवासीय कमरों की संख्या
- परिवार में रह रहे विवाहित जोड़े की संख्या
- पेयजल का मुख्य स्रोत (Main source of drinking water)
- पेयजल स्रोत की उपलब्धता (Availability of drinking water source)
- लाइट का मुख्य स्रोत (Main source of lighting)
- शौचालय तक पहुंच (Access to latrine)
- शौचालय का प्रकार (Type of latrine)
- वेस्ट वाले पानी की व्यवस्था (Waste water outlet)
- स्नान की सुविधा की उपलब्धता (Availability of bathing facility)
- रसोईघर की उपलब्धता और LPG/PNG कनेक्शन
- खाना पकाने का मुख्य ईंधन (Main fuel used for cooking)
- रेडियो / ट्रांजिस्टर
- टेलीविजन
- इंटरनेट तक पहुंच
- लैपटॉप / कंप्यूटर
- टेलीफोन / मोबाइल फोन / स्मार्टफोन
- साइकिल / स्कूटर / मोटरसाइकिल / मोपेड
- कार / जीप / वैन
- परिवार में मुख्य रूप से खाया जाने वाला अनाज (Main cereal consumed in the household)
- मोबाइल नंबर (केवल जनगणना संबंधी संचार के लिए)
हाउस लिस्टिंग से प्राप्त डेटा दूसरे चरण की जनसंख्या गणना के लिए मजबूत आधार तैयार करेगा. सरकार का कहना है कि ये अभियान पारदर्शी और तकनीकी रूप से उन्नत होगा. जनगणना के आंकड़े नीति निर्माण, संसाधन वितरण, विकास योजनाओं और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण होंगे.
बता दें कि ये जनगणना मूल रूप से 2021 में होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण टल दी गई थी. अब 2011 के बाद पहली बार अपडेटेड आधिकारिक जनसंख्या आंकड़े सामने आएंगे. 2011 की जनगणना में भारत की आबादी 121.02 करोड़ थी, जिसमें 62.37 करोड़ पुरुष और 58.65 करोड़ महिलाएं थीं.
वीडियो: जातिगत जनगणना का एलान होने से पहले BJP नेताओं ने क्या-क्या कहा था?











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