अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग का 11वां दिन है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से ग्लोबल तेल की सप्लाई चरमरा गई है. नतीजा, सोमवार 9 मार्च को कच्चे तेल का रेट 119 डॉलर प्रति बैरल को छू गया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के लिए यह एक बड़ी चिंता है. तेल महंगा हुआ, तो हर चीज पर महंगाई बढ़ेगी.
तेल महंगा होने से ट्रंप परेशान, कीमत कम करने में लगे, इतना खौफ खाने की वजह पता चली
Crude Oil Price: Donald Trump ने पिछले महीने कहा था कि अमेरिका को अपने 'नए दोस्त और पार्टनर' वेनेजुएला से 8 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल मिला है. दरअसल, जंग के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर असर पड़ा है.


डॉनल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के लिए यह महंगाई बहुत रिस्की है, क्योंकि मिडटर्म के चुनाव सिर पर हैं. अगर अमेरिका में महंगाई मुद्दा बनी, तो अमेरिकी संसद 'कांग्रेस' पर रिपब्लिकन की पकड़ कमजोर पड़ सकती है. ट्रंप ऐसा होना अफॉर्ड नहीं कर सकते. उनकी चिंता का कारण ये इलेक्शन ही है. इसलिए दुनिया भर में तेल की सप्लाई स्मूद रखने पर उनका खासा जोर है. सवाल उठ रहे हैं कि क्या वेनेजुएला की तरह अमेरिका ईरान के तेल रिजर्व पर भी कब्जा जमाएगा. इस पर ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रेसिडेंट ने NBC न्यूज को बताया,
"आप वेनेजुएला को देखें... लोगों ने इसके बारे में सोचा है, लेकिन इस बारे में बात करना अभी जल्दबाजी होगी."
ट्रंप ने पिछले महीने कहा था कि अमेरिका को अपने 'नए दोस्त और पार्टनर' वेनेजुएला से 8 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल मिला है. दरअसल, जंग के बीच ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है. यहां से ग्लोबल ऑयल का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल सप्लाई होता है. अब तेल की सप्लाई रुकी, तो कीमत बढ़ गई. अमेरिका दावा है कि उसने तो इसकी पहले से तैयारी कर रखी थी.
वाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने एक बयान में कहा,
"वाइट हाउस इस जरूरी मुद्दे पर संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार कोऑर्डिनेट कर रहा है, क्योंकि यह प्रेसिडेंट के लिए टॉप प्रायोरिटी है. प्रेसिडेंट ट्रंप और उनकी पूरी एनर्जी टीम के पास ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने से बहुत पहले ही एनर्जी मार्केट को स्टेबल रखने का एक मजबूत गेम प्लान था, और वे सभी भरोसेमंद ऑप्शन का रिव्यू करते रहेंगे."
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, वाशिंगटन में भी अधिकारी तेल बाजार को ठंडा करने के लिए कई तरीकों पर विचार कर रहे हैं. इसमें ग्रुप ऑफ सेवेन (G7) की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सदस्य देशों के साथ मिलकर स्ट्रेटेजिक रिजर्व से कच्चे तेल को रिलीज करना भी शामिल है.
बातचीत से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जिन दूसरे ऑप्शन पर विचार किया जा रहा है, उनमें अमेरिकी ऑयल एक्सपोर्ट पर रोक लगाना, ऑयल फ्यूचर्स मार्केट में दखल देना, फ्यूल पर कुछ फेडरल टैक्स माफ करना और जोन्स एक्ट के तहत कुछ समय के लिए शर्तों को हटाना शामिल है. रॉयटर्स ने बताया कि इसके तहत घरेलू फ्यूल शिपमेंट सिर्फ अमेरिकी झंडे वाले जहाजों पर ही जाने चाहिए.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन तेल की कीमतों को काबू में रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है. इसमें G7 देशों के साथ मिलकर रणनीतिक तेल भंडार से एक साथ कच्चा तेल जारी करना भी शामिल है. ताकि तेल सप्लाई में कोई कमी ना आए और तेल की कीमत आसमान ना छुए.
हालांकि, एनालिस्ट्स का कहना है कि जब तक वेस्ट एशिया की जंग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल एक्सपोर्ट को रोकती रहेगी, तब तक वाशिंगटन के पॉलिसी ऑप्शन का ग्लोबल तेल मार्केट पर बहुत कम असर होगा.
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