कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल में होने वाले उपचुनाव से पहले सिंबल देने से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि इलेक्शन कमिशन (EC) की वजह से हमारी परेशानी बढ़ती है. हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि आयोग के फैसलों की वजह से पार्टियों को मजबूरी में कानूनी रास्ता अपनाना पड़ता है. पार्टियां अपनी शिकायत लेकर कोर्ट आती हैं और इन सबसे हमारा काम बढ़ता है.
हाई कोर्ट ने लगाई चुनाव आयोग को फटकार, 'तंग आ गए हैं आपसे, अधिकारी निष्पक्ष होकर काम करें'
West Bengal Bypoll: कलकत्ता हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने ISF का चुनाव चिह्न ‘लिफाफा’ दूसरी पार्टी को देने पर EC से तीखे सवाल पूछे. कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग की वजह से कोर्ट का काम बढ़ रहा है.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस कृष्णा राव ने चुनाव आयोग से कहा, 'EC अधिकारियों को निष्पक्ष और सही तरीके से काम करना चाहिए.' जस्टिस राव ने कहा, ‘हम आपसे (चुनाव आयोग) परेशान हो चुके हैं. किसी दूसरी पार्टी को देने के लिए 183 चुनाव चिह्नों में से 'लिफ़ाफ़ा' (envelope) ही क्यों चुना. आयोग को ऐसे विवादों में पड़ने की क्या जरूरत है? इससे राजनीतिक पार्टियां परेशान होती हैं. कानूनी मसले खड़े होते हैं.'
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग के वकील से कहा
क्या है पूरा मामला?हम सच में तंग आ चुके हैं. एक बार चुनाव शुरू होते ही आयोग परेशानी खड़ी करना शुरू कर देता है. फिर पार्टियां कोर्ट आती हैं, जिससे हम पर बोझ पड़ता है.
यह मामला बंगाल विधानसभा चुनाव से जुड़ा है. चुनाव नतीजे आए तो काफी समय हो गया है. लेकिन, आयोग के फैसले की वजह है शुरू हुआ विवाद खिंचता चला गया. दरअसल आयोग ने 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए लिफाफा सिंबल डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को दे दिया. आयोग के इस फैसले से पहले 2026 विधानसभा चुनाव में ये निशान नौशाद सिद्दीकी की अगुवाई वाली ISF के पास था. ISF ने विधानसभा चुनाव में भांगड़ सीट जीती थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, ISF ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. पार्टी की मांग थी कि चुनाव आयोग लिफाफा चिह्न को फ्रीज करने का निर्देश दे. डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को 'लिफाफा' चिह्न आवंटित किया गया है. आयोग ने ISF को उपचुनाव के लिए 'अलमारी' (almirah) चिह्न दिया है. ISF के वकील और सीनियर एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने कोर्ट में जज से कहा,
चुनाव आयोग ने कोर्ट में क्या कहा?हमारे वोटर कन्फ्यूज़ हो जाएंगे. हमने 2026 का विधानसभा चुनाव लिफाफा चिह्न के साथ लड़ा था और हम उपचुनाव भी लड़ रहे हैं.
चुनाव आयोग के वकील ने भी इस मामले में अपना पक्ष रक्षा है. आयोग के वकील ने तर्क दिया कि ISF एक रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है. ऐसी पार्टियों के लिए कोई सिंबल आरक्षित नहीं होता है. ISF को दो बार 'लिफाफा' (envelope) सिंबल दिया गया था, जिसमें आखिरी बार 2026 के विधानसभा चुनाव में ऐसा हुआ था. इसके जवाब में ISF ने कहा कि उपचुनाव विधानसभा चुनाव का ही अगला हिस्सा है.
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जब जस्टिस राव ने पूछा कि क्या ISF ने उपचुनाव के लिए किसी सिंबल की मांग की थी? इसपर उनके वकील ने कहा कि सिंबल अलॉटमेंट के लिए राजनीतिक पार्टियों से फॉर्म 10b जमा करने को लेकर कोई नया नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया था. इस पर जस्टिस राव ने EC को फटकार लगाई. उन्होंने कहा,
अगर आपको (EC) पता था कि सिर्फ़ चार महीने पहले ही एक राजनीतिक पार्टी ने उस सिंबल का इस्तेमाल किया था, तो उपचुनाव के लिए आपने वही खास सिंबल क्यों चुना? आप उसे दूसरों की तरह आरक्षित रख सकते थे. आपने उसे आरक्षित क्यों नहीं रखा?
रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने इस टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है.
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