अब तो हर साल की बात है. फरवरी आती है. बजट आता है. आंकड़े आते हैं. पक्ष-विपक्ष के वार-प्रहार आते हैं और फिर आते हैं रामदास आठवले. वे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के सुप्रीमो और केंद्र सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री हैं. बजट के बाद जब देश के बड़े-बड़े अर्थशास्त्री आंकड़ों पर अपना सिर खपा रहे होते हैं, घाटा और मुनाफा जोड़ रहे होते हैं, ठीक उसी समय आठवले अपनी कविताओं की पंक्तियां 'जोड़-तोड़' रहे होते हैं. पिछले कई सालों का इतिहास गवाह है.
रामदास आठवले की ये कविता सुनकर बजट का 'दुख-सुख' भूल जाएंगे
Budget 2026: संसद में वित्तमंत्री का भाषण चाहे जितना ‘भारी-भरकम’ और ‘जरूरी’ हो लेकिन असली ‘पब्लिक डिमांड’ तो रामदास आठवले की उन चार लाइनों की होती है, जिसकी तुकबंदी सुनकर मिर्जा गालिब की जन्नत में भी बांछें खिल जाएं.


संसद में वित्तमंत्री का भाषण चाहे जितना ‘भारी-भरकम’ और ‘जरूरी’ हो लेकिन असली ‘पब्लिक डिमांड’ तो रामदास आठवले की उन चार लाइनों की होती है, जिसकी तुकबंदी सुनकर ‘मिर्जा गालिब की जन्नत’ में भी बांछें खिल जाएं. तमाम छोटे-बड़े शायर तो अपनी पदवी से इस्तीफा दे दें.
आठवले जी की शायरी का अपना ही एक अंदाज है, जिसे किस खांचे में रखा जाए ये तो आचार्य रामचंद्र शुक्ल भी तय न कर पाएं. इसमें अपने लोगों की तारीफ होती है. विपक्ष पर करारा व्यंग्य होता है. हमला होता है. और ऐसी करारी तुकबंदी वाली कविता होती है कि लय मिले न मिले, लेकिन राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना बहुत 'भीषण' होता है.
साल 2026 का बजट रविवार, 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया. इसके बाद झटपट आठवले जी ने ‘प्रतिक्रिया की कविता’ बना ली और बोले,
खुश हो जाएगा गांव-गांव का बच्चा. क्योंकि यह बजट है बहुत ही अच्छा. इसीलिए और नरेंद्र मोदी जी हैं प्रधानमंत्री सच्चा. लेकिन राहुल गांधी जी हैं बहुत कच्चा.
आगे उन्होंने कुछ बातें ‘गद्य’ में भी कहीं. जैसे,
मुझे लगता है ये बजट बहुत ही अच्छा बजट है और इस बजट से देश की प्रगति होगी. अनेक शहरों को ध्यान में रखा है. शहरों का डेवलपमेंट है. गांवों का डेवलपमेंट है. इस बजट से देश ऊंचाई तक पहुंचेगा, ऐसा हमें पूरा विश्वास है.
ऐसे ही, पिछले साल के बजट पर भी आठवले साहब ने एक कविता लिख मारी थी. इसके शब्द कुछ यूं थे,
2025-26 का ये नहीं है खाली बजट. ये है विकास का आईना. ये बजट सुनकर परेशान हो जाएगा चाइना. खड़गेजी मत छेड़ो मोदीजी के नैना. नहीं तो 2029 में भी हो जाएगा आपका रैना. बजट से खुश है मैन कॉमन. क्योंकि इसे पेश किया है हमारी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण. अब तो टूट रहा है विपक्षी दल. मोदीजी के हाथ में है कल. हर घर में पहुंच रहा है नल से जल. मोदीजी ही निकाल सकते हैं समस्या का हल.
रुको जरा. सबर करो. आगे और भी है.
इस बजट से जाग गई है गांव-गांव की गल्ली. बिना मतलब मत उड़ाओ हमारे बजट की खिल्ली. इस बजट से हो रही है मोदीजी की बल्ली-बल्ली. टूट रही है विपक्ष की कल्ली. पूरे देश की बोल रही है दादी. बहुत ही अच्छे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.
बजट कोई पेश करे. कुछ भी पेश करे. लोगों की एक्साइटमेंट अब आठवले जी की कविता पर टिकी होती है कि इस बार वह क्या परोसने वाले हैं. साल 2022 के बजट के बाद उनकी जो 'कविता' आई थी, वो ऐसी है,
2022 का निर्मला सीतारमण जी का बजट है विकास की गंगा. कांग्रेस वाले मत लेना मोदी जी से पंगा. मत बोलो दंगा. नहीं तो संकट आ जाएगा अंगा. कांग्रेस ने किया है भारत को भकास लेकिन मोदी जी ने किया है भारत का विकास. मोदी जी ने दिया है अंधेरे में प्रकाश. इसलिए दिख रहा है नीला-नीला आकाश.
2021 के बजट पर 'कविराज' रामदास लिखते हैं,
कुछ लोग बोल रहे हैं कि ये बजट खाली जुमला है. लेकिन मेरा कहना है कि ये बजट विरोधी दलों पर हमला है. ये बजट है सभी वर्गों को न्याय देने वाला. ये बजट है कांग्रेस और विरोधी दल से बदला लेने वाला.
अब आखिरी, 2020 के बजट वाली कविता सुन लीजिए. फिर गंगा नहा आइए. इस कविता में कवि संसद में कहता है,
अच्छे बजट के लिए हम मोदी सरकार का स्वागत करते हैं. इसलिए कांग्रेस वाले डरते हैं. देश के लिए हम मरते हैं. इसलिए चुनाव में आप हारते हैं.
अच्छा जाते-जाते एक बात और बता दें. सोशल मीडिया पर आठवले साहब का 'नाइस बजट' वाला वीडियो बहुत वायरल हो रहा है. उसको देखकर ऐसा मत समझिएगा कि वो वैसा ही है और इसी साल का है. पहले तो वह एडिटेड है. दूसरा वह कई सालों से वायरल है. सही वीडियो 2019 के बजट के बाद का है, जिसमें आठवले बजट को ‘नाइस’ तो बता रहे हैं और अंग्रेजी में बता रहे हैं.
इट इज आल्सो वेरी इंपोर्टेंट बजट. वेरी नाइस बजट. दिस बजट फॉर द मिडल क्लास पीपल. फॉर द शेड्यूल कास्ट पीपल. शेड्यूल ट्राइब पीपल. ओबीसी पीपल. फॉर द फार्मर्स एंड दिस बजट इज आल्सो वेरी नाइस बजट. एंड दिस इज आल्सो अ चैलेंज फॉर द राहुल गांधी एंड अपोजिशन बिकॉज दिस बजट विल बी विन नरेंद्र मोदी इन द 2019.
सही वीडियो में ऐसी ही बातें आठवले जी ने कही हैं. उनके कहने का मतलब कुल मिलाकर यही था कि बजट बहुत अच्छा है और यह लोगों के लिए है. किसानों के लिए है. शेड्यूल कास्ट, शेड्यूल ट्राइब्स के लिए है और इस बजट की वजह से ही मोदी जी 2019 में चुनाव जीतकर फिर प्रधानमंत्री बनेंगे. यह बजट लोकसभा चुनाव 2019 से पहले पेश किया गया था.
वीडियो: Budget 2026: कंटेंट क्रिएटर्स को लेकर क्या ऐलान हुआ?






















