इंडियन आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि चीन के साथ बॉर्डर की स्थिति अब ‘स्थिर’ है, लेकिन सेंसिटिव है. रिटायरमेंट से एक दिन पहले, 29 जून को आर्मी चीफ ने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों में धीरे-धीरे सामान्य होने के संकेत भी दिख रहे हैं.
'चीन के साथ बॉर्डर पर हालात स्थिर लेकिन...', आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने जाते-जाते क्या कह दिया?
आर्मी चीफ उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर फिलहाल हालात शांत हैं, लेकिन स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है. इससे पहले एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन अरुणाचल प्रदेश में भारतीय जमीन पर 'कब्जा' करने की कोशिश कर रहा है.


एनडीटीवी से बातचीत में उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर फिलहाल हालात शांत हैं, लेकिन स्थिति अब भी संवेदनशील बनी हुई है. उन्होंने कहा,
हालात शांत होने का मतलब ये नहीं है कि लापरवाही बरती जाए. भारतीय सेना पूरी तरह सतर्क है और सीमा पर मजबूत तैनाती बनाए हुए है, ताकि किसी भी खतरे का सामना किया जा सके और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
सेना प्रमुख ने कहा कि उत्तरी सीमा पर भारत-चीन के बीच तनाव अब कुछ कम होता दिख रहा है. दोनों देश अब एक-दूसरे की चिंताओं को पहले के मुकाबले ज्यादा समझ रहे हैं और उन पर बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं.
सेना प्रमुख ने कहा,
दोनों देशों के बीच सेना को पीछे हटाने (डिसएंगेजमेंट) के समझौतों से सीमा पर हालात बेहतर हुए हैं. पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत फिर शुरू हुई है, जिससे तनाव कम करने, सीमा से जुड़े रोजमर्रा के मुद्दों को सुलझाने और आपसी भरोसा बढ़ाने में मदद मिली है.
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के रिश्तों के धीरे-धीरे सामान्य होने के संकेत मिल रहे हैं. इसके लिए दोनों देशों ने कई कूटनीतिक कदम उठाए. इनमें सीमा तय करने के विकल्पों पर काम करने के लिए WMCC के तहत विशेषज्ञों का समूह बनाना, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने की पहल, तीन दर्रों के जरिए सीमा व्यापार पर सहमति और वीजा नियमों में ढील जैसे कदम शामिल हैं.
उन्होंने कहा कि सैन्य स्तर पर भी दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए नियमित रूप से कई कदम और अभ्यास किए जा रहे हैं. आर्मी चीफ ने बताया,
भारत और चीन के बीच हर साल सीमा पर 1,100 से ज्यादा बार जमीनी स्तर पर बातचीत होती है. दोनों देशों के अधिकारी फोन, आमने-सामने की बैठकों और सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिए सीमा से जुड़े छोटे-मोटे विवाद और समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करते हैं.
हालांकि, उन्होंने ये भी साफ कहा कि भारतीय सेना किसी तरह की लापरवाही नहीं बरत रही है. उन्होंने कहा,
हालात सामान्य हैं, लेकिन सेना किसी तरह की ढिलाई नहीं बरत रही है. भारतीय सेना सीमा पर पूरी तरह मुस्तैद है और किसी भी खतरे या आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. सीमा पर सड़कें और दूसरी जरूरी सुविधाएं बेहतर बनाई जा रही हैं. साथ ही निगरानी और सेना की तैयारियों को भी लगातार मजबूत किया जा रहा है. हमारी सेना हर तरह की चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है.
जनरल उपेंद्र द्विवेदी का ये बयान ऐसे समय में आया है जब अरुणाचल प्रदेश में बॉर्डर से सटे गांवों में 'चीन के कब्जे' का दावा किया गया है. एक रिपोर्ट में स्थानीय आदिवासियों के हवाले से कहा गया कि पिछले 6 सालों में चीनी सेना भारतीय इलाके में कथित तौर पर मिलिट्री कैंप लगा रही है. सड़कें बना रही है.
भारत-चीन सीमा विवादभारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में LAC पर कई सालों तक तनाव रहा. 2020 की गलवान झड़प में भारत के कई जवानों के शहीद होने की बात कही गई. चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे. इसके बाद दोनों देशों के बीच लगातार सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत हुई. अब दोनों सेनाएं डेपसांग और डेमचोक समेत सभी प्रमुख विवादित जगहों से पीछे हट चुकी हैं.
हाल ही में बीजिंग में हुई बैठक में दोनों देशों ने सीमा पर शांति बनाए रखने पर सहमति जताई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने पर चर्चा कर चुके हैं. हालांकि अभी भी ऐसे दावे सामने आते हैं कि चीनी सेना भारतीय इलाके में मिलिट्री कैंप और सड़कें बना रही है.
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