बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोमवार, 17 अगस्त को अपनी नई टीम का ऐलान किया. इसके कुछ ही देर बाद ‘दी लल्लनटॉप’ में सोशल मीडिया टीम को लीड करने वाले प्रशांत ने एक ऐसी चीज की ओर ध्यान दिलाया, जो नॉर्मल नहीं था. नबीन ने जिन लोगों को पार्टी की सोशल मीडिया टीम का प्रभार सौंपा था, वो अचानक से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ से ‘गायब’ हो गए. उनमें से कुछ ने या तो अपने पोस्ट्स पर ‘ताला’ लगा दिया. या फिर अकाउंट ही डिलीट कर दिया. सोशल मीडिया कन्वीनर बनाए गए दीपक म्हास्के हों या को-कन्वीनर प्रीति गांधी, आलोक भट्ट, शिवानंद द्विवेदी या अरुण यादव. सबके ‘एक्स’ अकाउंट से पुराने पोस्ट सार्वजनिक पटल से गायब हो गए.
प्रीति गांधी, आलोक भट्ट... BJP की नई सोशल टीम के 'सोशल' अकाउंट्स कहां गए?
नितिन नबीन की नई टीम के ऐलान के कुछ घंटों बाद बीजेपी के कई सोशल मीडिया पदाधिकारियों के X अकाउंट पर पुराने पोस्ट सार्वजनिक तौर पर दिखाई देना बंद हो गए. कुछ अकाउंट प्राइवेट हुए तो कुछ डिलीट या एक्सेस से बाहर नजर आए.

प्रीति गांधी मुंबई की रहने वाली हैं. एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उनका पता @MrsGandhi है. यहां वह लंबे समय से एक्टिव थीं. उनके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स थे. अक्सर तीखे और आक्रामक अंदाज में पोस्ट करती रहीं लेकिन सोमवार, 17 अगस्त को (कम से कम ये खबर लिखे जाने तक तो) उनका अकाउंट खुल ही नहीं रहा. न तो उस पर कोई पोस्ट दिखाई दे रहा है. उनका नाम सर्च करने पर अमित शाह के अकाउंट से दिया गया एक जवाब दिखता है, जो प्रीति गांधी की किसी पोस्ट पर था. अब वो पोस्ट ही ‘एग्जिस्ट’ ही नहीं कर रहा.

आलोक भट्ट (@alok_bhatt) के साथ भी ऐसा है. उनका भी अकाउंट अब नहीं दिख रहा. आलोक भट्ट राजनीतिक और पॉलिसी से जुड़े मुद्दों पर लंबी पोस्ट और थ्रेड लिखने के लिए जाने जाते हैं. वह भी लंबे समय से BJP के समर्थन में सोशल मीडिया पर एक्टिव रहे हैं.
नितिन नबीन ने दीपक म्हास्के को बीजेपी का सोशल मीडिया कन्वीनर बनाया है. इससे पहले ये जिम्मेदारी अमित मालवीय के पास थी. म्हास्के ने लंबे समय से इस पद पर रहे अमित मालवीय की जगह ली है. उनके अकाउंट पर जाने पर आखिरी पोस्ट 19 सितंबर 2023 की दिख रही है.

को-कन्वीनर बनाए गए शिवानंद द्विवेदी के एक्स पर 4605 फॉलोवर हैं. वहीं, अरुण यादव के फॉलोवर्स की संख्या 8 लाख 11 हजार से ज्यादा है. दोनों ही के अकाउंट पर पोस्टें नहीं दिख रहीं. एक नोटिस दिख रहा, जिस पर लिखा है- ‘These posts are protected.’

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इंडिया टुडे से जुड़े पीयूष मिश्रा के मुताबिक, इसके संभावित कारण हो सकते हैं,
पुराने पोस्ट की सफाई
पार्टी में आधिकारिक पद मिलने के बाद सोशल मीडिया पर पुराने पोस्ट को लेकर ज्यादा सावधानी बरती जाती है. पुराने प्राइवेट, एग्रेसिव या बाद में गलत साबित हुए पोस्ट आगे चलकर परेशानी खड़ी कर सकते हैं. ऐसे में अकाउंट को प्राइवेट करने से पुराने पोस्ट की समीक्षा, उसे डिलीट करने या आर्काइव करने के लिए समय मिल सकता है.
पार्टी की गाइडलाइंस
कम्युनिकेशन (संचार) से जुड़े पदों पर नियुक्त लोगों से अक्सर पार्टी की आधिकारिक लाइन के मुताबिक पोस्ट्स की उम्मीद की जाती है. प्राइवेट अकाउंट की पोस्ट को सीमित करने से ये रिस्क कम हो सकता है कि किसी निजी पोस्ट को पार्टी का आधिकारिक बयान समझ लिया जाए. खासकर संवेदनशील या तेजी से बदलते मुद्दों पर.
विवाद से बचने के लिए
ज्यादा एंगेजमेंट वाले पर्सनल अकाउंट कभी-कभी पार्टी के आधिकारिक कम्युनिकेशन पर हावी हो सकते हैं या उसे मुश्किल बना सकते हैं. विजिबिलिटी को कंट्रोल करने से अलग-अलग वायरल मोमेंट्स के बजाय व्यवस्थित कैंपेन पर ध्यान बनाए रखने में मदद मिलती है.
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