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SIR में 13 करोड़ नाम काटने पर मचे बवाल के बीच EC का डैमेज कंट्रोल, जोड़े जाएंगे छूटे नाम

ECI Meeting With State CEOs: एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और नाम काटने के विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है. आयोग ने नए और छूट गए वोटरों के नाम शामिल करने का निर्देश दिया है.

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ECI ने राज्य के CEOs के साथ की मीटिंग. (Courtesy- ECI)

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  • भारत के चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में छूटे हुए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का आदेश दिया है।
  • SIR प्रक्रिया में आवेदन फॉर्म 6 को पूरा करने में नए नियमों के कारण कई मतदाता फॉर्म जमा नहीं कर सके, जिससे छूट होने के कारण यह कदम उठाया गया।
  • इस आदेश के तहत सरकार 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विशेष ड्राइव चलाकर छूटे मतदाताओं को जोड़ने के लिए कदम उठाएगी, जिससे आगामी चुनावों में उनकी भागीदारी सुनिश्चित होगी।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के मुद्दे पर देश की राजनीति में घमासान मचा हुआ है. कथित गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी दल हमलावर हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली के जंतर मंतर और मुंबई में प्रदर्शन भी हो रहा है. भारत के चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में छूट गए वोटर्स को शामिल करने का आदेश दिया है. आयोग ने इसके लिए एक विशेष अभियान चलाने के लिए कहा है. यह आदेश उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है, जहां पर SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. ECI के कामकाज पर उठ रहे सवालों के बीच आया यह आदेश डैमेज कंट्रोल की तरह है. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, ECI ने 29 सितंबर को लिखित आदेश जारी किया था. गुरुवार, 1 अक्टूबर को सभी राज्यों के CEOs के साथ एक मीटिंग की गई. इस बैठक में भी स्पेशल ड्राइव की बात दोहराई गई. ECI के सचिव ने सभी CEOs को 29 सितंबर को एक लेटर जारी किया. लेटर के मुताबिक,

‘जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया पूरी हो गई है. वहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और EROs क्षेत्र में स्पेशल ड्राइव चलाएंगे. इसमें SIR में छूट गए वोटरों और पहली बार के वोटरों को वोटर लिस्ट में जोड़ा जाएगा.’

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SIR फॉर्म क्यों नहीं सबमिट हुआ?

रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान फॉर्म 6 के तहत चलाया जाएगा. इसमें जुलाई में शामिल किए गए सवाल नहीं लिए जाएंगे. दरअसल, ऑनलाइन फॉर्म में नए आवेदकों से उनके माता-पिता के बारे में सवाल किया जाता था. जैसे- उनका या उनके माता-पिता का नाम पिछली SIR के बाद वोटर लिस्ट में था? इस सवाल का जवाब दिए बिना आवेदक अपना फॉर्म सबमिट नहीं कर पाते थे.

20 राज्यों में SIR पूरा

ऐसे में 18 साल के उन युवाओं के पास कोई रास्ता नहीं बचता था, जिनके पेरेंट्स का नाम लिस्ट में न हो. केवल सरकार ही नियमों में बदलाव करके ऐसा कर सकती थी. 29 सितंबर के लेटर में इस आदेश को सिर्फ SIR फेज तक सीमित किया गया है. जिन 20 राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो गई है, वहां पहली बार वोट देने वाले और छूट गए लोग सादा कानूनी फॉर्म भर पाएंगे. 

मीटिंग में आदेश दिया गया कि SIR के पहले और बाद की लिस्ट की तुलना की जाए. साथ ही हटाए और छूट गए लोगों की पहचान करें. एक अधिकारी ने कहा,

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‘ऐसा आदेश दिया गया है कि घर-घर जाकर वोटरों का फॉर्म 6 भरवाया जाए, जिनका नाम कहीं दर्ज नहीं है. इनमें मृतकों और डुप्लिकेट नाम वाले वोटर्स शामिल नहीं होंगे. छूट गए नागरिक ही शामिल होंगे.’

रिपोर्ट के मुताबिक, CEOs से कहा गया है कि वे इस काम में राजनीतिक दलों की मदद ले सकते हैं. यह भी कहा गया है कि अगर किसी का नाम छूट गया है, तो उसे वापस फॉर्म 6 के जरिए जोड़ा जाए.

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गोवा के CEO को भी यही तरीका अपनाने का निर्देश दिया गया है. साथ ही जिन 97 वोटर्स का नाम काटने को लेकर विवाद हुआ था, उन्हें फिर से वोटर लिस्ट में शामिल किया जा रहा है.

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