आईटी सेक्टर में 'मूनलाइटिंग' यानी एक नौकरी के साथ दूसरी नौकरी करने को लेकर अक्सर बहस होती रही है. लेकिन अब ऐसा ही एक मामला सरकारी नौकरी से जुड़ गया है. बिहार में एक सरकारी कर्मचारी पर आरोप है कि उसने करीब 10 साल तक दो अलग-अलग राज्यों में नौकरी करते हुए दोनों जगहों से सैलरी ली. हालांकि, यह मामला सिर्फ मूनलाइटिंग का नहीं, बल्कि सरकारी सेवा नियमों के कथित उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं का भी है.
बिहार में क्लर्क, झारखंड में भी नौकरी, 10 साल तक दो जगह से सैलरी उठाने वाले शख्स का क्या हुआ?
सरकारी कर्मचारी पर आरोप है कि उसने करीब 10 साल तक दो अलग-अलग राज्यों में नौकरी करते हुए दोनों जगहों से सैलरी ली. हालांकि, यह मामला सिर्फ मूनलाइटिंग का नहीं, बल्कि सरकारी सेवा नियमों के कथित उल्लंघन और वित्तीय अनियमितताओं का भी है.


पूरा मामला बिहार और झारखंड से जुड़ा है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एक व्यक्ति ने दो राज्यों में एक साथ नौकरी की और 10 साल से ज्यादा समय तक दो अलग-अलग विभागों से वेतन लिया. मामला सामने आने के बाद जांच कराई गई और जांच पूरी होने पर कर्मचारी कृष्णा प्रसाद वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया.
यह मामला तब सामने आया जब पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने औरंगाबाद की जिलाधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा से शिकायत की. शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिला सिविल सर्जन कार्यालय में क्लर्क के तौर पर तैनात कृष्णा प्रसाद वर्मा, झारखंड की BCCL (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) में भी कर्मचारी थे. शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए.
जिलाधिकारी ने जांच के लिए तीन लोगों की एक समिति बनाई. समिति ने बिहार स्वास्थ्य विभाग और झारखंड स्थित BCCL के रिकॉर्ड की जांच की. जांच में पता चला कि कृष्णा प्रसाद वर्मा की नियुक्ति 6 जुलाई 2005 को बिहार के औरंगाबाद में क्लर्क के रूप में हुई थी. वहीं BCCL के रिकॉर्ड के अनुसार, वह 24 नवंबर 2008 से 12 मार्च 2017 तक झरिया ईस्ट स्थित BCCL में भी कार्यरत थे. सर्विस बुक और अन्य दस्तावेजों से भी इसकी पुष्टि हुई.
औरंगाबाद के डीएम ने बताया कि वर्मा को बिहार लोक सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 16 का उल्लंघन करते हुए एक ही समय में दो विभागों में नौकरी करने और दोनों जगहों से वेतन लेने के आरोप में निलंबित किया गया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी.
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सस्पेंशन के दौरान कृष्णा प्रसाद वर्मा का मुख्यालय गोह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रहेगा और नियमों के तहत उन्हें गुजारा भत्ता (Subsistence Allowance) मिलेगा. सिविल सर्जन उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई करेंगे, जबकि जांच की निगरानी के लिए एक डिप्टी कलेक्टर को नियुक्त किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान कृष्णा प्रसाद वर्मा को दो बार नोटिस भेजकर अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का मौका दिया गया था. लेकिन वह अपने बचाव में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके.
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