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असम में बाढ़ का तांडव: 75 मौतें और लाखों बेघर, पूर्वोत्तर के जलप्रलय के पीछे की क्लाइमेट मिस्ट्री

Assam flood: असम में बाढ़ की स्थिति दिन ब दिन खराब होती जा रही है. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बाढ़ के चलते राज्य अब तक 78 मौतें हो चुकी हैं. और तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं.

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असम में बाढ़ का कहर (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • असम में इस साल मानसून की अत्यधिक बारिश और बाढ़ के कारण 78 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सात जिलों में तीन लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं और राहत कार्य जारी हैं।
  • ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के उफान के कारण असम में बाढ़ आई है, जिसका कारण ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन से मानसूनी हवाओं के पैटर्न में बदलाव माना जा रहा है।
  • राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर राहत शिविरों का संचालन कर रही हैं, साथ ही कर्ज राहत के लिए बैंक प्रतिनिधियों की बैठक हुई है और मौसम विभाग ने भविष्य की भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

असम में इस बार मानसून ने जो तबाही मचाई है, वो पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ रही है. पूर्वोत्तर के इस राज्य में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं, जिससे हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है. असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के सरकारी बुलेटिन के मुताबिक, इस साल बाढ़ और बारिश से जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की कुल संख्या 78 तक पहुंच गई है.

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इड़िया टुडे के मुताबिक शिवसागर और गोलाघाट जिलों में तीन और लोगों की मौत की पुष्टि होने के बाद ये आंकड़ा और गंभीर हो गया है. राज्य के सात जिलों में तीन लाख से ज्यादा लोग इस जलप्रलय की चपेट में जीने को मजबूर हैं, और ये ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि किस तरह ये संकट आम जनजीवन को तबाह कर रहा है.

मानवीय संकट और राहत शिविरों की स्थिति

इस भयंकर बाढ़ से प्रभावित होने वाले सात प्रमुख जिलों में शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव, बिस्वनाथ और कामरूप मेट्रोपॉलिटन शामिल हैं. इन इलाकों में 21 राजस्व चक्र और 551 गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जबकि 21 हजार हेक्टेयर से ज्यादा कृषि भूमि पर खड़ी फसलें पानी में डूबकर बर्बाद हो गई हैं. सबसे बुरा हाल चराइदेव जिले का है, जहां अकेले 1 लाख 37 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. इसके अलावा शिवसागर में 84 हजार और जोरहाट में करीब 50 हजार लोग इस आपदा का सामना कर रहे हैं. सरकार और स्थानीय प्रशासन ने लोगों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया है.

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एनडीटीवी के मुताबिक, राज्यभर में 71 राहत शिविर बनाए गए हैं जहां 16 हजार से ज्यादा विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जबकि 30 राहत वितरण केंद्रों के जरिए हजारों लोगों तक जरूरी सामग्री पहुंचाई जा रही है. प्रभावित इलाकों में मेडिकल और पशु चिकित्सा टीमें लगातार तैनात हैं ताकि किसी भी महामारी या पशुओं की बीमारी को समय रहते रोका जा सके, क्योंकि बाढ़ के पानी में 11 हजार से ज्यादा जानवर बह चुके हैं और 17 हजार से अधिक मवेशी प्रभावित हुए हैं.

जलवायु परिवर्तन और हर साल आने वाली बाढ़ का स्थायी समाधान

असम में बाढ़ कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसके पीछे छिपी क्लाइमेट मिस्ट्री हर साल गहरी होती जा रही है. मौसम विभाग के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के कारण मानसूनी हवाओं का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है, जिससे अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और असम में बेहिसाब बारिश हो रही है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद मीडिया से बात करते हुए साफ किया है कि भले ही 21 जुलाई के बाद से भारी बारिश नहीं हुई है और कुछ जगह पानी उतरा है, लेकिन तबाही का दायरा बहुत बड़ा है.

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नगालैंड की पहाड़ियों से बहकर आए मलबे और कीचड़ की वजह से कई मुख्य सड़कें अब भी बंद हैं और लोगों के घरों में सिल्ट जमा हो चुकी है. इस मानवीय और भौगोलिक संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार पूरी ताकत से असम के साथ खड़ी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के निर्देशों के तहत मुख्यमंत्री ने असम में काम कर रहे सभी बैंकों के प्रतिनिधियों की एक विशेष बैठक बुलाई है, ताकि बाढ़ पीड़ितों के कर्ज और लोन से जुड़ी समस्याओं पर राहत उपाय निकाले जा सकें.

सेना और सुरक्षा बलों का मोर्चा, साथ ही गुवाहाटी में शहरी बाढ़ का संकट

सिर्फ ग्रामीण और नदी किनारे के इलाके ही नहीं, बल्कि असम के शहरी क्षेत्रों में भी जलभराव ने जीना मुहाल कर दिया है. कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के गुवाहाटी शहर के कई इलाकों और वार्डों में अर्बन फ्लड यानी शहरी बाढ़ का प्रकोप देखने को मिल रहा है. जिन इलाकों में पानी भरा है उनमें पदुमबारी, बोरागांव, एक्सलकेयर अस्पताल के पास का इलाका, लचित नगर, जू रोड, रुकमिणीगांव, अनिल नगर, नवीन नगर, सातगांव, बेहराबारी, हटगांव, वायरलेस, जोरबत और जुबीन क्षेत्र के पास कामकुची शामिल हैं.

इस मुश्किल समय में देश की सेना ने मोर्चा संभाल रखा है. थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने पूर्वी थियेटर के अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान बाढ़ राहत अभियानों की उच्चस्तरीय समीक्षा की है. उन्होंने डाओ डिवीजन और स्पीयरहेड डिवीजन की तैयारियों का जायजा लेते हुए नागरिक प्रशासन की मदद कर रहे जवानों के काम की सराहना की है.

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हालांकि राहत की सांस लेने का वक्त अभी नहीं आया है क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि 30 जुलाई से 1 अगस्त तक असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड के अलग-अलग हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ने तिनसुकिया जिले के साथ-साथ नगालैंड के मोन, मोकोकचुक और वोखा जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसका सीधा असर असम के चराइदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जैसे पड़ोसी जिलों पर पड़ सकता है. प्रशासन ने लोगों से पूरी तरह सतर्क रहने और आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है.

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