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AI में जाना है तो ये स्किल सीखें, कंपनियां आप पर करोड़ों लुटा देंगी

पिछले कुछ सालों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI पर होने वाली बहस मुबाहिसे एक सवाल पर सबसे ज्यादा केंद्रित रहे हैं. क्या AI नौकरियां छीन लेगा? लेकिन पिछले कुछ सालों में टेक इंडस्ट्री में लोगों की छंटनी बढ़ी है, वहीं AI रिवोल्यूशन को ताकत देने वाले डेटा सेंटर्स में नौकरियों के नए अवसर बने हैं.

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नौकरियों के नए अवसर पैदा कर रहा है. (इंडिया टुडे)

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिक्र आते ही ये सवाल उठता है कि क्या ये भविष्य में नौकरियां खाने वाला है? अब भविष्य का तो नहीं पता लेकिन मौजूदा दौर में जब टेक कंपनियां लोगों को निकाल रही हैं, AI की मदद से काम करने वाले डेटा सेंटर्स में नौकरियों की आमद बढ़ी है. यही नहीं, कुछ कंपनियां तो करोड़ों में पैकेज दे रही हैं.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियां AI मॉडल और क्लाउड सर्विसेज ऑपरेशन का जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं. दूसरी ओर इसकी सिक्योरिटी के लिए वे लोगों को भी हायर कर रही हैं. ऑनलाइन जॉब सर्च प्लेटफॉर्म और एग्रीगेटर Indeed पर साल 2020 की शुरुआत से डेटा सेंटर और फिजिकल सिक्योरिटी का जिक्र करने वाली नौकरी से जुड़े पोस्ट की संख्या चार गुना बढ़ गई है.

किस तरह की नौकरियां आ रही हैं?

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डेटा सेंटर में नौकरियों के बढ़ते मौकों के साथ सिक्योरिटी एक्सपर्ट की डिमांड बढ़ी है. बिजनेस इनसाइडर ने लिंक्डइन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया है कि साल 2025 में डेटा सेंटर की नौकरी के लिए अप्लाई करने वालों की संख्या 23 प्रतिशत बढ़ गई है. सिक्योरिटी रोल में साइट की देखरेख, सिक्योरिटी स्टैंडर्ड सेट करना, खतरों की मॉनिटरिंग करना और सेंटर की बढ़ती फैसिलिटीज को सुरक्षित रखना है.

इनमें से कुछ नौकरियों में मेडिकल इंश्योरेंस, पेड़ पैरेंटल लीव और रोज खाने की व्यवस्था तक दी जाती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ पोस्ट के लिए शुरुआती सैलरी रेंज ही 1,43,000 डॉलर (लगभग 1.39 करोड़ रुपये) से लेकर 1,91,000 डॉलर (लगभग 1.85 करोड़ रुपये) तक है.

डेटा सेंटर्स को सिक्योरिटी क्यों चाहिए?

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कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश कर रही हैं. हाल ही में गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने बताया है कि वह AI कंप्यूटिंग के लिए इक्विटी ऑफर्स की मदद से 80 अरब डॉलर (7,623 अरब रुपये) जुटाएगी. वहीं OpenAI और Oracle ने मिशिगन के सेलीन टाउनशिप में 16 अरब डॉलर (1,525 अरब) के स्टारगेट कैंपस का शिलान्यास किया.

इन प्रोजेक्टस में इतना ज्यादा पैसा आने के चलते इनकी सिक्योरिटी एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है. लेकिन जोखिम केवल चोरी या बिना इजाजत के एंट्री भर का नहीं है. डेटा सेंटर ऊर्जा, पानी और जमीन बचाने के साथ-साथ शोर (NOISE) कम करने का अभियान चलाने वाले ग्रुप्स के निशाने पर आ गए हैं. AI को लेकर बढ़ता तनाव आभासी दुनिया से लेकर वास्तविक संसार तक पहुंच चुका है. इस साल अप्रैल में OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन पर कथित तौर पर दो बार हमला हो चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावर AI की मुखालफत करने वाले थे.

डेटा सेंटर्स से जुड़े सिक्योरिटी थ्रेट विरोध प्रदर्शनों से कहीं बढ़कर हैं. इन खतरों में इंडस्ट्रियल जासूसी, ड्रोन अटैक, नागरिक विद्रोह और एक्टिविज्म शामिल है. ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे टकराव के दौरान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चिंता बढ़ गई. मार्च में ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने अमेरिकी क्लाउड प्रोवाइडर्स को अपना वैध टारगेट बताया था.

रिपोर्ट्स ये भी बताती हैं कि अप्रैल में ईरान ड्रोनों ने संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन में स्थित दो AWS डेटा सेंटर्स पर हमला किया था. इन खतरों को देखते हुए कंपनियों ऐसे एक्सपर्ट्स की तलाश कर रही हैं जो कमजोरियों की पहचान कर सकें और आने वाले खतरों का माकूल जवाब दे सकें.

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