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यूपी में फोन में रील देखते-देखते चौथी क्लास के बच्चे की मौत

यूपी के अमरोहा में एक बच्चा रील देखते-देखते अचानक से गिर पड़ा. परिवार के लोग अस्पताल लेकर भागे लेकिन वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया.

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10 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से मौत (india today)

बच्चे फोन पर ज्यादा समय बिताएं तो क्या उन्हें हार्ट अटैक आ सकता है? उत्तर प्रदेश के अमरोहा में कुछ ऐसा हुआ है कि लोग इसी बात का जवाब तलाशने लगे हैं. लोगों में इस बात की कानाफूसी है कि स्मार्टफोन से निकलने वाली किरणें बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रही है. लेकिन ये सवाल उठा क्यों? दरअसल, अमरोहा के एक गांव जुझैला चक में चौथी क्लास में पढ़ने वाला एक बच्चा बिस्तर पर बैठे-बैठे काफी देर से फोन में रील देख रहा था. घर वाले अपने काम में व्यस्त थे. तभी अचानक से बच्चा बिस्तर पर लुढ़ककर गिर पड़ा. परिवार के लोग घबरा गए. उसे अस्पताल लेकर भागे. वहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी तो मौत हो गई है.

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इस घटना ने पूरे गांव में दहशत फैला दी है. हाल के दिनों में साइलेंट हार्ट अटैक की कई घटनाएं सामने आई हैं. सड़क पर चलते, जिम में वर्कआउट करते, पार्टी में डांस करते और बस चलाते भी हार्ट अटैक आने से लोगों की मौतें हुई हैं. इन सब में सबसे चिंताजनक पॉइंट हार्ट अटैक के शिकार लोगों की उम्र की रेंज है. मतलब, 10-12 साल के बच्चों से लेकर 50-60 साल तक के अधेड़ व्यक्तियों को ऐसे हार्ट अटैक आए हैं.

अमरोहा की घटना ने तो सबको हिलाकर रख दिया है. इंडिया टुडे से जुड़े बीएस आर्य की रिपोर्ट के अनुसार, यहां मंडी धनोरा थाना इलाके में जुझैला चक गांव के एक किसान दीपक कुमार अपनी पत्नी पुष्पा देवी और दो बेटों मयंक और शिवम के साथ रहते हैं. उनका बड़ा बेटा मयंक चौथी क्लास में पढ़ता था. उम्र तकरीबन 10 साल होगी. बीती 4 जनवरी की शाम तकरीबन 5 बजे वह घर में पलंग पर बैठा स्मार्टफोन में रील देख रहा था. परिवार वाले अपने काम में लगे थे तभी अचानक मयंक पलंग पर लुढ़क गया. घबराए परिजन बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे.

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धनोरा में एक प्राइवेट क्लिनिक गिल हॉस्पिटल है. वहां के डॉक्टर अवनीश गिल ने बच्चे की नाड़ी और ब्लड प्रेशर देखा. कुछ और जांच किए और फिर बच्चे को मृत घोषित कर दिया. परिवार वाले ये सुनकर स्तब्ध रह गए. अवनीश गिल की ने बताया कि बच्चे की मौत हार्ट अटैक से हुई है, लेकिन इस हार्ट अटैक का कोई कनेक्शन फोन से है या नहीं, ये साफ नहीं हो पाया. लोगों में इस घटना के बाद डर का माहौल है. इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक की वजह मोबाइल फोन से निकलने वाली किरणों को बताया जा रहा है. 

परिवार वाले बच्चे का शव अस्पताल से लेकर घर पहुंचे और फिर उसका अंतिम संस्कार कर दिया. शव का पोस्टमॉर्टम भी नहीं कराया गया, जिससे ये पता चल पाता कि मौत की असली वजह क्या थी?

क्या फोन से हो सकता है हार्ट अटैक?

आप जो फोन इस्तेमाल करते हैं, उससे गैर-आयनकारी विकिरण (Non Ionisation Radiation) निकलता है. यानी आपका फोन अपने एंटीना से आस-पास के मोबाइल टावरों को रेडियो फ्रीक्वेंसी तरंगें भेजता है. जब आप कॉल करते हैं या मैसेज भेजते हैं या इंटरनेट डेटा का उपयोग करते हैं, तो आपका फोन मोबाइल टावरों से रेडियो फ्रीक्वेंसी रेज़ अपने एंटीना पर रिसीव करता है. इस फ्रीक्वेंसी की मात्रा टावरों से आपकी दूरी पर निर्भर करता है. यानी आप टावर के जितने दूर होंगे, रेडिएशन की तीव्रता उतनी ज्यादा होगी. कई रिसर्च में इस रेडिएशन के इंसानी सेहत पर दीर्घकालिक प्रभाव बताए गए हैं. ये शरीर पर धीरे-धीरे असर करते हैं और कई बार कैंसरकारी भी होते हैं.

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हालांकि, दिल पर इसके असर के बारे में कम ही बात हुई है. अमेरिका के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की वेबसाइट पर एक रिसर्च के हवाले से बताया गया है कि लंबे समय तक मोबाइल फोन के रेडिएशन के संपर्क में रहने वाले लोगों में दिल की धड़कन तेज या अनियमित होने (Palpitations) और सीने में दर्द जैसे लक्षण पाए जा सकते हैं. साथ ही कार्डियोवेस्कुलर डिसीज (दिल की बीमारी) का खतरा बढ़ सकता है. इसकी प्रमुख वजह शरीर में जरूरत से ज्यादा फ्री रेडिकल्स बनना (Oxidative Stress) और ब्लड प्रेशर कंट्रोल में बदलाव माना गया है.

रिसर्च में कहा गया है कि ऐसे सबूत भी बढ़ते जा रहे हैं जो बताते हैं कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) दिल के ऑटोनॉमिक सिस्टम यानी धड़कन को अपने आप कंट्रोल करने वाले सिस्टम में गड़बड़ी पैदा कर सकता है. इससे दिल की धड़कन अनियमित होने या अचानक हृदयगति रुकने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.

लेकिन अमरोहा की घटना के पीछे ये वजह है या नहीं, ये अब पता चलना मुमकिन नहीं है. क्योंकि परिवार ने बच्चे का अंतिम संस्कार कर दिया है.

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