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1 जुलाई से लागू हो रहे VB-G RAM G से 3 राज्य टेंशन में, 2 में तो बीजेपी की ही सरकार है

BJP शासित दो राज्यों VB G RAM G Scheme के 40% हिस्सेदारी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार योजना की हिस्सेदारी वाले पैटर्न पर फिर से ध्यान दे.

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बीजेपी शासित 2 राज्यों ने VB-G RAM G के हिस्सेदारी पर फिर से ध्यान देने की अपील की. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • नरेंद्र मोदी सरकार 1 जुलाई से 'विकसित भारत ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी' (VB-G RAM G) योजना को लागू करने जा रही है, जो MGNREGA का विकल्प है और इसमें राज्यों की 40% और केंद्र की 60% वित्तीय हिस्सेदारी है।
  • बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड सहित पांच राज्यों ने VB-G RAM G योजना में राज्यों पर 40% वित्तीय बोझ को लेकर चिंता जताई है और फंडिंग पैटर्न में बदलाव की मांग की है, क्योंकि अनुमानित खर्च राज्यों के लिए भारी है।
  • राज्यों द्वारा वित्तीय भार न उठा पाने के कारण योजना के सफल क्रियान्वयन में बाधा आ सकती है, और किसानों की मजदूरी बढ़ाने तथा भुगतान में देरी न हो, इस संबंध में सरकार से सुधार की अपेक्षा की गई है।

नरेंद्र मोदी सरकार आने वाले 1 जुलाई से देश में 'विकसित भारत ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन गारंटी यानी VB-G RAM G को लागू करने वाली है. इससे पहले ही 3 राज्य सरकारों ने इस योजना के तहत उन पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को लेकर चिंता जाहिर की है. इन 3 राज्यों में से 2 भारतीय जनता पार्टी (BJP) शासित राज्य हैं. 

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बता दें कि केंद्र सरकार ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियिम’ (MGNREGA) के बदले VB-G RAM G योजना लेकर आई है. इसमें प्रावधान है कि योजना के लिए आने वाले खर्च में राज्य सरकारों को 40% भार उठाना पड़ेगा और केंद्र सरकार 60% खर्च वहन करेगी. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड ने स्कीम को लेकर कुछ झिझक जाहिर की है. उन्होंने केंद्र सरकार से स्कीम के लिए फंडिंग पैटर्न में बदलाव करने की मांग की है. तीनों राज्यों में से एक झारखंड को छोड़ दें तो बाकी बिहार और मध्यप्रदेश में बीजेपी की ही सरकार है.

NREGA संघर्ष मोर्चा ने आंकड़ा बताया

बिहार को VB-G RAM G के जरिए करीब 4 हजार 477 करोड़ का भुगतान करना पड़ेगा. NREGA संघर्ष मोर्चा के मुताबिक, यह अमाउंट सरकार के 125 दिनों का काम देने के वादे को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. उनके हिसाब से इस टारगेट को पूरा करने के लिए बिहार सरकार को करीब 15 हजार 939 करोड़ रुपये खर्च करना पड़ेगा. BJP शासित मध्य प्रदेश के ऊपर भी 4 हजार 168 करोड़ का बोझ है. इस बजट के तहत राज्य केवल 43 दिनों का ही काम दे सकती हैं. 

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योजना कहती है कि अगर राज्य सरकार 125 दिनों का काम दे तो उसे करीब 20 हजार 37 करोड़ रुपये का भार वहन करना पड़ेगा. झारखंड की बात करें तो उसे इस योजना के तहत करीब 1 हजार 804 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे. इतने बजट में केवल 41 दिनों का ही काम हो सकता है. अगर राज्य 125 दिन काम देने का प्लान करे तो उसे करीब 9 हजार 293 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब रखना पड़ेगा.

40% हिस्सेदारी बोझ उठाना मुश्किल

दोनों बीजेपी शासित राज्य बिहार और मध्य प्रदेश के अलावा झारखंड सरकार ने भी इस कानून के बनने के बाद हुई बातचीत में हिस्सा लिया. राज्यों ने साफतौर पर कहा कि उनके लिए इस 40% हिस्सेदारी का बोझ उठाना काफी मुश्किल होगा. सिक्किम और उत्तराखंड जैसे राज्यों ने भी इस योजना पर पड़ने वाली हिस्सेदारी पर सरकार के सामने अपनी बात रखी. इन राज्यों में 90:10 वाली हिस्सेदारी का मामला सेट किया गया है. 

उत्तराखंड सरकार ने अपने पहाड़ी इलाकों का हवाला दिया और कहा कि केंद्र सरकार को इस योजना के तहत आने वाले 100% भार का वहन खुद करना चाहिए. देश के 5 राज्यों ने ग्रामीण मजदूरों की मजदूरी भी बढ़ाने की मांग की है. रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग सभी राज्यों ने इस योजना के तहत मजदूरी और सामानों के बिल भुगतान में देरी का मुद्दा उठाया है. साथ ही सरकार से मांग की है कि VB-G RAM G के तहत ऐसा न हो.

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