VB-G RAM G आने के बाद खाली बैठे हैं हजारों मनरेगा मजदूर, सरकार ने कहा था काम मिलता रहेगा
दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार गाजे बाजे के साथ 'VB-G RAM G' योजना लाई थी. ये योजना पुरानी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा की जगह लेने वाली है. योजना लाते वक्त केंद्र सरकार ने कहा था कि जब तक वीबी-जी रामजी योजना ग्राउंड पर लागू नहीं हो जाती, तब तक मनरेगा के तहत लोगों को काम मिलता रहेगा. लेकिन सरकार के दावों के उलट जमीनी हकीकत कुछ और ही हैं.

‘तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है.’ केंद्र सरकार दिसंबर 2026 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (MNGREGS) की जगह रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम (VB-G RAM G) लाई. संसद के दोनों सदनों से इसे पारित किया गया. उस दौरान सरकार का वादा था, जब तक ये योजना धरातल पर लागू नहीं होती तब तक मनरेगा के तहत रोजगार मिलता रहेगा. लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों को मुह चिढ़ा रहे हैं. कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने 30 मार्च को संसद में इस मुद्दे को उठाया है.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ना तो VB-G RAM G योजना जमीन पर लागू हो पाई है, ना ही मनरेगा के तहत लोगों को रोजगार मिल रहा है. रोजगार की मांग को लेकर लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. बिहार के मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय पर 87 दिनों से मनरेगा कर्मचारी धरने पर बैठे हैं. 2 जनवरी से उन्होंने प्रदर्शन शुरू किया था.
जिले के लगभग 12 हजार मजदूरों को पिछले तीन-चार महीने से काम नहीं मिला है. यानी VB-G RAM G के लागू होने के पहले से इनको काम नहीं मिल रहा. VB-G RAM G योजना के तहत कब से रोजगार मिलना शुरू होगा, इसको लेकर अभी कोई स्पष्टता नहीं है. क्योंकि केंद्र सरकार अभी भी इसको लागू करने के लिए फ्रेमवर्क बनाने के लिए राज्यों से बातचीत कर रही है.
नया काम शुरू नहीं करने के निर्देश मिले हैं!
ग्रामीण मजदूरों के साथ काम करने वाले संगठन ‘मनरेगा वॉच बिहार’ से जुड़े संजय सहनी ने बताया,
आम तौर पर बारिश के मौसम में काम नहीं मिलता. हमने मानसून खत्म होने का इंतजार किया. फिर जलभराव वाले इलाके के सूखने तक भी आस लगाए रखी. दिसंबर तक मनरेगा का काम शुरू हो जाता है. लेकिन बार-बार मांग करने के बावजूद कोई काम नहीं दिया गया है. यह कानून का खुलेआम उल्लंघन है.
रिपोर्ट के मुताबिक बार-बार मांगने के बावजूद काम नहीं मिलने के बाद 16 हजार मजदूर अलग-अलग जिला मुख्यालयों पर इकट्ठा हुए. इनमें से अधिकतर महिलाएं थीं. इसके बाद भी उनकी मांग पर कोई सुनवाई नहीं हुई तो उनका एक प्रतिनिधिमंडल 25 मार्च को दिल्ली गया. यहां केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के सीनियर अधिकारियों से उनकी मुलाकात हुई. संजय सहनी ने बताया,
जिला अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्हें कोई भी नया काम शुरू नहीं करने के निर्देश मिले हैं. लेकिन मंत्रालय के अधिकारी इस बात से इनकार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है. अब या तो जिला अधिकारियों के पास सूचना की कमी है. या फिर ये केंद्र सरकार की ओर से अनौपचारिक तौर पर मनरेगा के तहत चल रहे कामों को रोकने का संकेत हो सकता है.
मनरेगा के काम को लेकर अनिश्चितता केवल बिहार तक सीमित नहीं है. राजस्थान के डूंगरपुर जिले से भी इसी तरह की शिकायतें आई हैं. 23 मार्च की सुबह 40 महिला श्रमिक अप्रैल की वर्क सायकल के लिए पेपरवर्क पूरा करने बलवारहा पंचायत ऑफिस पहुंची. पंचायत अधिकारियों ने उनको बाद में आने को कहा. फिर 28 मार्च को उनको बताया गया कि मनरेगा योजना बंद कर दी गई है. अब आगे इस योजना के तहत कोई काम नहीं मिलेगा.
बालवारहा पंचायत से कुछ किलोमीटर दूर है पदरमढ़ी मेवरहा पंचायत. यहां 27 मार्च को लगभग 30 महिलाएं चार घंटे तक धरने पर बैठी रहीं. वो अप्रैल के पहले हफ्ते के लिए काम मांग रही थीं. स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया कि मनरेगा के तहत काम शुरू नहीं करने के निर्देश मिले हैं. महिलाओं के धरना खत्म करने से इनकार के बाद ब्लॉक लेवल के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने श्रमिकों का आवेदन स्वीकार कर लिया. लेकिन उनको काम मिलेगा या नहीं अभी इसकी कोई गारंटी नहीं मिली है.
मनरेगा के तहत काम करके एक परिवार को लगभग 25 हजार से 28 हजार रुपये तक की आमदनी होती है. राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन (RAMU) से जुड़ी मधुलिका ने बताया कि इस इलाके के अधिकतर गांव आदिवासी बहुल हैं. यहां कई पंचायतों से काम नहीं मिलने की शिकायतें आ रही हैं. मधुलिका 13 गांवों की 900 रजिस्टर्ड श्रमिकों के बीच काम कर रही हैं. उन्होंने बताया,
काम बंद करने का कोई औपचारिक आदेश नहीं है. दरअसल VB-G RAM G अधिनियम में साफ तौर पर कहा गया है कि जब तक इसे लागू नहीं किया जाता मनरेगा जारी रहेगा. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है.
कांग्रेस नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 30 मार्च को मौजूदा बजट सत्र में ये मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि सरकार ने मनरेगा के तहत मिलने वाले काम के अधिकार को खत्म कर दिया और नई घोषित योजना (VB-G RAM G) कही जमीन पर दिख नहीं रही है.
नेता प्रतिपक्ष खरगे ने कहा कि सरकार ने जिस VB-G RAM G योजना का प्रचार किया वह जमीन पर कहीं नहीं दिखाई दे रही है. वहीं मनरेगा के तहत कई राज्यों में काम बंद होने की शिकायत आ रही है. उन्होंने बिहार के मुजफ्फरपुर के मजदूरों का मुद्दा उठाया. इसके अलावा दावा किया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र से भी मनरेगा के काम रुकने की खबर आ रही है.
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