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ज़्यादा खाने के बाद भी वज़न नहीं बढ़ता? ये सेहत के लिए अच्छा नहीं, बहुत बुरा है

आज डॉक्टर से जानेंगे कि ज़्यादा खाने के बाद भी कुछ लोगों का वज़न क्यों नहीं बढ़ता. क्या दुबले होने का मतलब, हेल्दी होना है. क्या दुबला दिखने वाला हर व्यक्ति अंदर से स्वस्थ होता है. दुबले बने रहने के लिए जीन्स ज़्यादा ज़रूरी हैं या आदतें. कुछ लोग थोड़ा सा खाते हैं, लेकिन उनका पेट जल्दी भर जाता है, ऐसा क्यों. और मेटाबॉलिज्म तेज़ रखने के लिए क्या करें?

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पिज़्ज़ा, बर्गर खाकर भी वज़न नहीं बढ़ता?

ब्रेकफ़ास्ट. लंच. स्नैक्स. डिनर. दिन में चार बार खाते हैं. थाली भर-भरकर खाते हैं. फिर भी वज़न नहीं बढ़ता! आपके दोस्त और परिवारवाले आपसे जलते हैं. हर कोई कहता है कि वाह, कितने लकी हो. इतना खाते हो. जो मन करता है, वो खाते हो. फिर भी दुबले रहते हो. काश, हम भी ऐसे होते. बात तो सही है. सबका थोड़ा जलना तो बनता है. पर असल में ये इतना बड़ा वरदान है नहीं, जितना दिखता है. 

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बाहर से दुबले दिखने वाले इंसान के अंदर भी फैट भर-भरकर जमा हो सकता है. अब क्योंकि वो दिखता नहीं, इसलिए इंसान खूब खाता रहता है. और शरीर चुपचाप अंदर ही अंदर बीमार पड़ता जाता है. इसलिए, आज डॉक्टर से जानेंगे कि ज़्यादा खाने के बाद भी कुछ लोगों का वज़न क्यों नहीं बढ़ता. क्या दुबले होने का मतलब, हेल्दी होना है. क्या दुबला दिखने वाला हर व्यक्ति अंदर से स्वस्थ होता है. दुबले बने रहने के लिए जीन्स ज़्यादा ज़रूरी हैं या आदतें. कुछ लोग थोड़ा सा खाते हैं, लेकिन उनका पेट जल्दी भर जाता है, ऐसा क्यों. और मेटाबॉलिज्म तेज़ रखने के लिए क्या करें? 

ज़्यादा खाने के बाद भी वज़न क्यों नहीं बढ़ता?

ये हमें बताया डॉक्टर अनुग्रह दुबे ने. 

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डॉ अनुग्रह दुबे, इंटरनल मेडिसिन, आरजेएन अपोलो

कई लोग जितना खाते हैं. उससे ज़्यादा कैलोरीज़ बर्न करते हैं. इसलिए खूब खाने के बाद भी उनका वज़न नहीं बढ़ता. ऐसे लोगों का बेसल मेटाबॉलिक रेट ज़्यादा होता है. यानी वो एनर्जी जो शरीर आराम करते हुए खर्च करता है. ऐसा जेनेटिक कारणों से भी हो सकता है. 

कुछ लोग ऐसी बीमारियों से पीड़ित होते हैं, जिनके कारण वज़न नहीं बढ़ता. जैसे इंसुलिन कम बनना, टाइप 1 डायबिटीज होना, टीबी होना, कैंसर जिसका पता अभी तक नहीं चला है और हाइपरथायरॉइडिज्म होना. इन सभी कारणों से वज़न आसानी से नहीं बढ़ता. इंसान दुबला-पतला रहता है.

क्या दुबला दिखने वाला हर व्यक्ति अंदर से पूरी तरह स्वस्थ होता है?

ज़रूरी नहीं दुबला दिखने वाला हर इंसान अंदर से स्वस्थ हो. TOFI (थिन ऑन द आउटसाइड, फैट ऑन द इनसाइड) कंडीशन की वजह से भी ऐसा हो सकता है. शरीर में फैट दो तरह का होता है. विसरल फैट और पेरीफेरल फैट. जो बाहर से दिखाई देता है, वो है पेरीफेरल फैट.

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अगर कोई इंसान ओवरवेट दिखता है, तो हो सकता है वो इंसान अस्वस्थ हो. उसे अपना बेसल मेटाबॉलिक रेट सुधारना चाहिए और नॉर्मल BMI (बॉडी मास इंडेक्स) पर लाना चाहिए. लेकिन बाहर से दुबले दिखने वाले इंसान के अंदर भी फैट जमा हो सकता है. यानी उसके अंदर विसरल फैट ज़्यादा हो सकता है. ऐसे इंसान को एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों में फैट का जमाव) हो सकता है. ऐसे लोगों को दिल की बीमारियां और लकवा होने का रिस्क ज़्यादा है. कोरोनरी आर्टरी डिजीज भी हो सकती है. यानी पतला होना हेल्दी होने का पैमाना नहीं है.

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चाहे आप दुबले हों या ओवरवेट, हेल्दी खाना बहुत ज़रूरी है (फोटो: Freepik)

जीन्स ज़्यादा ज़रूरी या आदतें?

दुबला होना या मोटा होना, काफ़ी हद तक जीन्स पर भी निर्भर करता है. अब जीन्स तो बदले नहीं जा सकते. इसलिए आदतों को सुधारना ज़्यादा ज़रूरी है. इसके लिए हेल्दी खाना और बैलेंस्ड डाइट लेना ज़रूरी है. एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है. BMI हेल्दी रखना ज़रूरी है. डॉक्टर की सलाह से ब्लड प्रेशर, शुगर, थायरॉइड जैसे टेस्ट करवाते रहने चाहिए. हेल्दी आदतें जीन्स से ज़्यादा ज़रूरी होती हैं.

क्या कुछ लोगों को पेट भरने का एहसास जल्दी होता है?

कुछ लोगों का पेट जल्दी भरता है. जैसे डायबिटीज़ में आंतों के काम करने की स्पीड कम हो जाती है. इसे डायबिटिक गैस्ट्रोपेरेसिस कहते हैं. इस कंडीशन के चलते थोड़ा-सा खाने पर पेट भरा हुआ महसूस होता है. इससे मरीज़ की डाइट कम हो जाती है. ओबेसिटी की दवाएं भी इसी मॉडल पर काम करती हैं. ब्रेन को ऐसा महसूस होता है कि पेट एकदम भरा हुआ है.

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मेटाबॉलिज़्म बढ़ाना है, तो रेगुलर एक्सरसाइज़ करें (फोटो: Freepik)

मेटाबॉलिज्म तेज़ रखने के लिए क्या करें?

तेज़ मेटाबॉलिज्म के लिए रेगुलर एक्सरसाइज़ करना ज़रूरी है. जैसे रनिंग, वॉकिंग, स्विमिंग, साइकिलिंग करें. थायरॉइड डिसऑर्डर की जांच करवाएं. महिलाओं में PCOD की जांच करवाएं. हॉर्मोन्स से जुड़ी बीमारियों की जांच करवाएं. ऐसी बीमारियों के कारण बेसल मेटाबॉलिक रेट बिगड़ जाता है. BMI बढ़ता जाता है. अगर ये सभी दिक्कतें नहीं हैं, तो एक बैलेंस्ड डाइट लेने और एक्सरसाइज़ करने से मेटाबॉलिज्म ठीक रखा जा सकता है

दुबलेपन का मतलब ये नहीं कि आप हेल्दी भी हैं. इसलिए वज़न से ज़्यादा अपने BMI पर ध्यान दीजिए. हेल्दी खाइए और एक्सरसाइज़ ज़रूर करिए.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: पेट को दूसरा 'दिमाग' क्यों कहते हैं?

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