आपने नोटिस किया होगा. जब आप बहुत परेशान होते हैं. घबराए हुए होते हैं. जैसे किसी एग्जाम से पहले. या डेडलाइन से पहले. तब अक्सर पेट ख़राब हो जाता है. ये इत्तेफाक़ नहीं है. इसके पीछे एक साइंस है.
बहुत ज्यादा स्ट्रेस रहता है? डॉक्टर की बताई ये तीन चीज़ें आज से ही खाना शुरू कर दीजिए
आपकी मेंटल हेल्थ का सीधा कनेक्शन आपके पेट से है. कैसे? ये आज हम आपको बताएंगे. डॉक्टर से समझेंगे हाज़मे और मेंटल हेल्थ का आपस में क्या कनेक्शन है? क्या खाने से मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है और क्यों? और अच्छी मेंटल हेल्थ के लिए क्या खाएं?


आपकी मेंटल हेल्थ का सीधा कनेक्शन आपके पेट से है. कैसे? ये आज हम आपको बताएंगे. डॉक्टर से समझेंगे हाज़मे और मेंटल हेल्थ का आपस में क्या कनेक्शन है? क्या खाने से मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है और क्यों? और अच्छी मेंटल हेल्थ के लिए क्या खाएं?
हाज़मे और मेंटल हेल्थ का आपस में कनेक्शनये हमें बताया डॉ. सोनाली गौतम ने.

याद होगा, जब आप एग्ज़ाम देने जाते थे, तो मम्मी दही खिलाकर भेजती थीं. एग्ज़ाम से पहले कई बार दस्त लग जाते थे. इसका मतलब है कि हमारी मेंटल हेल्थ और पेट आपस में जुड़े हुए हैं. जब आप दही खाकर एग्ज़ाम देने जाते थे. तब पेट शांत रहता था और आप आराम से एग्ज़ाम दे पाते थे. इसी कनेक्शन को गट–ब्रेन एक्सिस कहते हैं. हमारी आंतें लगभग 30 फीट लंबी होती है. इनमें करीब 10 ट्रिलियन माइक्रोऑर्गेनिज़्म होते हैं. इनका कुल वज़न लगभग 12 किलो तक हो सकता है. ये ढाई साल की उम्र तक पूरी तरह विकसित हो जाते हैं. पेट में मौजूद बैक्टीरिया हमारे फिंगरप्रिंट की तरह होते हैं यानी हर इंसान के शरीर में अलग गट बैक्टीरिया होता है. ये गुड बैक्टीरिया हमारे शरीर में अच्छे हॉर्मोन बनाते हैं. इसलिए, जब पेट ठीक रहता है, तो इंसान खुश नज़र आता है. वो अपना काम शांति से कर पाता है. इसे ही गट-ब्रेन एक्सिस कहते हैं. गट-ब्रेन एक्सिस एक कनेक्शन है. जिस दिन हम चिड़चिड़े होते हैं या हमारे पास काम ज़्यादा होता है. उस दिन पेट फूला हुआ महसूस होता है. हमें दस्त लग जाते हैं या कब्ज़ हो जाता है. इसी को गट-ब्रेन एक्सिस कहते हैं. जिस दिन हम घूमने जाते हैं, खुश होते हैं या छुट्टी होती है. उस दिन पेट भी ठीक से साफ होता है.
क्या खाने से मेंटल हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है और क्यों?आजकल लोग बिना डॉक्टर से पूछे एंटीबायोटिक्स लेने लगते हैं. इसके अलावा, बाहर का खाना ज़्यादा खाते हैं. इससे बाहर के बैक्टीरिया हमारे पेट में चले जाते हैं. नतीजा? पेट के गुड बैक्टीरिया डिस्टर्ब हो जाते हैं. उनका बैलेंस बिगड़ जाता है. इससे गुड हॉर्मोन्स बनने कम हो जाते हैं. इस वजह से दस्त या कब्ज़ हो जाता है. पेट दिन भर फूला-फूला रहता है. इंसान चिड़चिड़ा हो जाता है क्योंकि गट–ब्रेन एक्सिस डिस्टर्ब हो जाता है.

- सलाद और प्रोबायोटिक्स, जैसे दही खाएं और खूब पानी पिएं
- इससे गुड बैक्टीरिया खुश रहते हैं यानी उनका बैलेंस ठीक रहता है
- जब वो खुश रहते हैं, तब अच्छे हॉर्मोन बनाते हैं
- इससे पेट फूला हुआ महसूस नहीं होता
- दस्त और कब्ज़ नहीं होता
- मन भी शांत रहता है
- इसलिए जितना हो सके, अच्छा खाना खाएं
- पानी खूब पिएं
- हरी सब्ज़ियां और सलाद भी खाएं
- ये गुड बैक्टीरिया को बैलेंस में रखते हैं
तो समझे आपके हाज़मे का मेंटल हेल्थ पर क्या असर पड़ता है. इसलिए अगर खुश रहना है. स्ट्रेस फ्री रहना है. तो आपको अपना खान-पान सुधारना होगा. पेट खुश तो आप खुश.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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