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महाराष्ट्र के बुलढाना में टॉक्सिक गेहूं से झड़ रहे थे बाल! जानिए, ऐसे गेहूं से और क्या-क्या दिक्कतें हो सकती हैं?

बालों के झड़ने का टॉक्सिक गेहूं से संबंध डॉक्टर हिम्मतराव बावस्कर ने खोजा है. डॉक्टर बावस्कर मशहूर फिज़ीशियन और पद्मश्री पुरस्कार विजेता हैं.

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गेहूं को अच्छे से साफ करने के बाद ही इस्तेमाल करना चाहिए

महाराष्ट्र का बुलढाना ज़िला. कुछ समय पहले, यहां अचानक लोगों के बाल झड़ना शुरू हो गए. लोग गंजे हो रहे थे. 

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पिछले साल दिसंबर और अभी जनवरी में, बुलढाना के 18 गांवों में करीब 300 लोगों के बाल झड़ गए. इसके बाद सरकारी एजेंसियों ने कई तरह के सैंपल लिए और जांच शुरू की. एक जांच मशहूर फिज़ीशियन और पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉक्टर हिम्मतराव बावस्कर ने भी की. अब उन्होंने लोगों के बाल झड़ने का कारण बताया है. न्यूज़ एजेंसी PTI से बातचीत में डॉक्टर बावस्कर ने कहा कि गंजेपन की वजह राशन की दुकानों में मिलने वाला टॉक्सिक गेहूं है. ये गेहूं पंजाब और हरियाणा से आया है. जिसमें सेलेनियम मिनरल की मात्रा काफी ज़्यादा है. स्थानीय रूप से पैदा होने वाले गेहूं की तुलना में 600 गुना ज़्यादा. जब गांववालों ने ये गेहूं खाया तो बड़ी मात्रा में सेलेनियम उनके शरीर में गया. इसकी वजह से उनके बाल झड़ने लगे.

जांच में लोगों के खून, यूरिन और बालों में काफी सेलेनियम मिला है. प्रभावित लोगों के खून में सेलेनियम का लेवल 35 गुना ज़्यादा था. वहीं, यूरिन में 60 गुना और बालों में 150 गुना ज़्यादा सेलेनियम था. हालांकि सरकारी एजेंसियों ने अभी तक बाल झड़ने के सटीक कारण की घोषणा नहीं की है.

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लेकिन, एक बात तो तय है. गेहूं में किसी भी तरह की मिलावट, चाहें वो कुदरती तौर पर हो या फिर इंसानों ने की हो, हमारे लिए बिल्कुल सही नहीं है. टॉक्सिक गेहूं शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाता है.

इस तरह का गेहूं खाने से क्या-क्या दिक्कतें होती हैं? ये हमें बताया न्यूट्रिशनिस्ट दीप्ति खटूजा ने.

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 दीप्ति खटूजा, चीफ़ क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट, फोर्टिस, गुरुग्राम

न्यूट्रिशनिस्ट दीप्ति कहती हैं कि अगर गेहूं में सेलेनियम मिला है, तो इससे कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं.

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अगर गेहूं में सेलेनियम मिला है, और ऐसा गेंहू लंबे वक्त तक खाया जाए, तो सेलेनियम टॉक्सिसिटी हो सकती है. इससे कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं. जैसे उल्टी आना. डायरिया होना. बाल झड़ना. नाखून कमज़ोर होकर टूटने लगना. चक्कर आना. थकान और चिड़चिड़ापन रहना. बहुत गंभीर मामलों में लिवर और किडनी भी ख़राब हो सकती है.

अगर गेहूं को चमकदार बनाने के लिए उसमें कोई केमिकल डाला गया है, तो ऐसे गेहूं से पेट में गैस बन सकती है. एसिडिटी और अपच की दिक्कत हो सकती है. स्किन एलर्जी हो सकती है. लंबे वक्त तक ऐसा गेहूं खाने से लिवर और किडनी से जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती हैं.

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गेहूं का वज़न बढ़ाने के लिए कभी-कभी उसमें छोटे-छोटे पत्थर, मिट्टी या बारीक रेत की मिलावट की जाती है (फोटो: Getty Images)

कभी-कभी गेहूं का वज़न बढ़ाने के लिए उसमें छोटे-छोटे पत्थर, मिट्टी या बारीक रेत की मिलावट की जाती है. इससे पाचन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचता है. पेट दर्द और कब्ज़ की दिक्कत बढ़ जाती है. किडनी से जुड़ी बीमारियां भी होने लगती हैं.

अक्सर फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव किया जाता है. अगर गेहूं को अच्छे-से साफ न किया जाए और कीटनाशक पड़ा हुआ गेहूं खा लिया जाए, तो इससे इम्यूनिटी कमज़ोर हो जाती है. जिससे दूसरी बीमारियों और इंफेक्शंस का खतरा बढ़ जाता है. लिवर और किडनी को भी नुकसान पहुंचता है.

लिहाज़ा, गेहूं खरीदते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखें. हमेशा भरोसेमंद ब्रांड और दुकान से ही गेहूं खरीदें. ऑर्गेनिक गेहूं खरीदना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हालांकि, ये आम गेंहू से थोड़ा महंगा मिलता है.

जब भी गेहूं खरीदें, तो पहले उसे अच्छे-से साफ करें. गेहूं को छानने और सही से धोने के बाद ही उसे पिसने के लिए दें.

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