भारत है डायबिटीज़ कैपिटल ऑफ़ द वर्ल्ड. ICMR-INDIAB 2023 की एक स्टडी के मुताबिक, भारत में 10 करोड़ से ज़्यादा लोगों को डायबिटीज़ है और 14 करोड़ से ज़्यादा लोग प्री-डायबिटिक हैं. यानी डायबिटीज़ के रिस्क पर हैं. इसके बावजूद देश की एक बहुत बड़ी आबादी शुगर टेस्ट नहीं करवाती. इससे उन्हें पता ही नहीं चलता कि डायबिटीज़ की शुरुआत हो चुकी है. अपनी शुगर जांचने के लिए आप कई टेस्ट करवा सकते हैं. पर सबसे सटीक टेस्ट कौन सा है, ये जानेंगे आज.
HbA1c vs Plasma Glucose: डायबिटीज़ का सबसे सटीक टेस्ट कौन?
अगर HbA1c 6.5 से ऊपर है, तो इसका मतलब है आपको डायबिटीज़ है. वहीं अगर फ़ास्टिंग ग्लूकोज़ 126 से ज़्यादा है, तो डायबिटीज़ हो सकती है.
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लोग अक्सर HbA1c और प्लाज़्मा ग्लूकोज़ टेस्ट के बीच कंफ्यूज़ रहते हैं कि इनमें बेहतर टेस्ट कौन सा है. चलिए, डॉक्टर से समझते हैं कि HbA1c टेस्ट क्या है. प्लाज़्मा ग्लूकोज़ टेस्ट क्या होता है. डायबिटीज़ का पता लगाने के लिए कौन-सा टेस्ट ज़्यादा सटीक है. ये टेस्ट करवाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें. और, ये टेस्ट किन लोगों को करवाने चाहिए.
HbA1c टेस्ट क्या होता है?
ये हमें बताया डॉक्टर स्वाति तायल गोरे ने.

डॉक्टर गोरे बताती हैं कि HbA1c एक सिंपल ब्लड टेस्ट है. ये पिछले तीन महीने की औसत शुगर बताता है. ये टेस्ट सिर्फ़ आज या उस वक़्त का शुगर लेवल नहीं बताता, बल्कि पिछले तीन महीने की एवरेज शुगर बताता है. इससे पता चलता है कि डायबिटीज़़ है या नहीं. अगर पहले से डायबिटीज़़ है, तो कौन-सी दवाइयां आपके लिए सही हैं. शुगर पर कंट्रोल कैसा है.
अगर शुगर 5.7 से नीचे है तो मतलब शुगर नॉर्मल है. अगर HbA1c 5.7-6.4 के बीच है, तो मतलब आपको प्री-डायबिटीज़ है. यानी आगे डायबिटीज़ होने का रिस्क है. अगर HbA1c 6.5 से ऊपर है, तो इसका मतलब है आपको डायबिटीज़ है. ऐसे में डाइट, लाइफस्टाइल में बदलाव और दवाइयों की ज़रूरत है. इसके लिए जल्द से जल्द डॉक्टर से मिलें.
प्लाज़्मा ग्लूकोज़ टेस्ट क्या होता है?
डॉक्टर स्वाति तायल गोरे के मुताबिक, प्लाज़्मा ग्लूकोज़ टेस्ट से पता चलता है कि उस समय शुगर कितनी है. प्लाज़्मा ग्लूकोज़ टेस्ट कैमरे से अभी ली गई फ़ोटो की तरह है. HbA1c पिछले तीन महीने की वीडियो की तरह है. प्लाज़्मा ग्लूकोज़ एक सिंपल सा ब्लड टेस्ट है. इसे कभी भी किया जा सकता है. अगर फ़ास्टिंग करने के बाद ये टेस्ट करें तो इसे फ़ास्टिंग प्लाज़्मा ग्लूकोज़ टेस्ट कहते हैं. फ़ास्टिंग यानी रातभर 10-12 घंटे ख़ाली पेट रहना. सुबह केवल पानी पीकर ये टेस्ट करवा सकते हैं. हाथ की किसी भी नस से खून लेकर ये टेस्ट किया जा सकता है. इस टेस्ट का रिजल्ट काफ़ी जल्दी आ जाता है.
अगर फ़ास्टिंग ग्लूकोज़ 126 से ज़्यादा है तो डायबिटीज़ हो सकती है. अगर फ़ास्टिंग ग्लूकोज़ 100 से कम है तो ये नॉर्मल है. अगर रेंज इसके बीच है तो मतलब आपको प्री-डायबिटीज़ है.
पोस्ट मील प्लाज़्मा ग्लूकोज़ खाना खाने के दो घंटे बाद का शुगर लेवल बताता है. अगर खाना खाने के बाद ये टेस्ट 200 से ज़्यादा आता है तो मतलब डायबिटीज़ है. अगर 140 से कम है तो ये नॉर्मल है. अगर रेंज इसके बीच आती है तो मतलब डायबिटीज़ का रिस्क है.
रैंडम ब्लड ग्लूकोज़ दिनभर में कभी भी टेस्ट कर सकते हैं. अगर ये 200 से ज़्यादा है. साथ में डायबिटीज़ के लक्षण भी हैं, तो मतलब आपको डायबिटीज़ है.

डायबिटीज़ का पता लगाने के लिए कौन-सा टेस्ट ज़्यादा सटीक है?
HbA1c और प्लाज़्मा ग्लूकोज़ दोनों ही ज़रूरी हैं. HbA1c एक बेहतर आइडिया देता है कि पिछले तीन महीने की शुगर कैसी है. प्लाज़्मा ग्लूकोज़ से और भी जानकारी मिलती है. पर प्लाज़्मा ग्लूकोज़ से सिर्फ उस समय की शुगर पता चलती है. प्लाज़्मा ग्लूकोज़ से पता चल सकता है कि कहीं शुगर लो तो नहीं जा रही या शुगर बढ़ तो नहीं रही. HbA1c सिर्फ एक औसत दे सकता है. प्लाज़्मा ग्लूकोज़ आपको एक सटीक नंबर बता सकता है कि किस टाइम पर कितनी शुगर है. दोनों की अपनी अहमियत है लेकिन अगर दोनों में से किसी एक को चुनना ही है तो HbA1c ज़्यादा बेहतर है.
ये टेस्ट करवाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
टेस्ट से पहले कुछ बातों का ध्यान रखें. HbA1c के लिए फ़ास्टिंग करने की जरूरत नहीं है. ये टेस्ट कभी भी हो सकता है. अगर फ़ास्टिंग प्लाज़्मा ग्लूकोज़ करवा रहे हैं तो रात में 10-12 घंटे फ़ास्टिंग करें. उस दिन अपनी दवाइयां टाइम पर लें. खाने के दो घंटे बाद की शुगर टेस्ट करने के लिए अपना साधारण रूटीन वाला खाना खाएं. उसके दो घंटे के बाद अपना ब्लड टेस्ट सैंपल दें. इन टेस्ट से पहले बहुत ज़्यादा एक्सरसाइज़ या बहुत ज़्यादा डाइटिंग ना करें. इससे टेस्ट में गड़बड़ी आ सकती है और टेस्ट सटीक नहीं आता है. इसलिए अपना नॉर्मल रूटीन फॉलो करते हुए, दवाइयां लेते हुए ये सारे टेस्ट करवाएं.
ये टेस्ट किन लोगों को करवाने चाहिए?
जिन पेशेंट्स को पहले से डायबिटीज़ है, उन्हें हर तीन महीने में HbA1c करवाना चाहिए. फ़ास्टिंग और खाना खाने के दो घंटे बाद वाले शुगर टेस्ट महीने में एक बार करवाने चाहिए. जिन पेशेंट्स को अभी तक डायबिटीज़ नहीं हुई है लेकिन उनको कुछ लक्षण महसूस हो रहे हैं. जैसे प्यास ज़्यादा लगना. पेशाब ज़्यादा आना. थकावट होना. इंफेक्शन होना. यूरिन में इंफेक्शन होना. ऐसे लोग अपना शुगर टेस्ट जरूर करवाएं. HbA1c और फास्टिंग पीपी ग्लूकोज़ ज़रूर करवाएं.
आजकल युवाओं को भी बिना लक्षण डायबिटीज़ हो रही है. इसलिए सबको 30-35 के बाद साल में एक बार या दो साल में एक बार रूटीन टेस्ट करवाएं. इसमें HbA1c, फास्टिंग, और खाने के दो घंटे बाद वाला ग्लूकोज़ टेस्ट जरूर करवाना चाहिए. ख़ासतौर पर जिनके परिवार में डायबिटीज़ की हिस्ट्री है. ओवरवेट हैं या ओबेसिटी से जूझ रहे हैं. ऐसे लोग टेस्ट ज़रूर करवाएं. फिर डॉक्टर से अपनी रिपोर्ट ज़रूर डिस्कस करें.
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)
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