The Lallantop

बिहार में बनेगा 'मखाना बोर्ड', इसके फायदे जानते हैं?

मखाने में प्रोटीन और फाइबर होता है. प्रोटीन खाने से मांसपेशियां मज़बूत होती हैं. हड्डियों को पोषण मिलता है. इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है. वहीं फाइबर खाने से हाज़मा दुरुस्त रहता है. कब्ज़ की शिकायत नहीं होती.

Advertisement
post-main-image
मखाना टेस्टी ही नहीं, हेल्दी भी है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फ़रवरी को बजट पेश किया था. इस दौरान उन्होंने बिहार में ‘मखाना बोर्ड’ के गठन का ऐलान किया था. मखाना बोर्ड बनने से उसका प्रोडक्शन बढ़ेगा. उसे ज़्यादा मात्रा में एक्सपोर्ट किया जाएगा. और मखाने से जुड़े तरह-तरह के प्रोडक्ट बनाने में भी मदद मिलेगी.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

अब जब मखानों की इतनी चर्चा हो ही रही है तो हमने भी सोचा आपको ज़रा इनके बारे में कुछ काम की बातें बताई जाएं. मखानों को इंग्लिश में लोटस सीड्स या फॉक्स नट्स कहते हैं. इन्हें खाने से क्या फ़ायदा होता है, ये हमें बताया चीफ न्यूट्रिशनिस्ट चारु दुआ ने.

charu dua
चारु दुआ, चीफ न्यूट्रिशनिस्ट, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद

मखाने में फाइबर और प्रोटीन

Advertisement

चारु कहती हैं कि मखाने में प्रोटीन और फाइबर होता है. प्रोटीन खाने से मांसपेशियां मज़बूत होती हैं. हड्डियों को पोषण मिलता है. इम्यून सिस्टम मज़बूत होता है. वहीं फाइबर खाने से हाज़मा दुरुस्त रहता है. कब्ज़ की शिकायत नहीं होती.

प्रोटीन और फाइबर की वजह से मखाना खाने के बाद पेट देर तक भरा रहता है. जिससे आप ओवरईटिंग नहीं करते. और, वेट लॉस में मदद मिलती है. मखाने में कैलोरीज़ भी कम होती हैं. 100 ग्राम मखाने में सिर्फ 350 कैलोरी होती हैं.

डायबिटीज़ वाले भी खा सकते हैं

Advertisement

जिन्हें डायबिटीज़ है, वो भी मखाने खा सकते हैं. मखाने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है. ये 22 से 35 के बीच होता है. ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होने का मतलब है कि, मखाने खाने के बाद कार्बोहाइड्रेट जल्दी ग्लूकोज़ में नहीं बदलता. नतीजा? ब्लड शुगर लेवल भी तेज़ी से नहीं बढ़ता. जिससे शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

मखाने में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं

मखाने में एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं. ये एंटीऑक्सीडेंट्स, फ्री रेडिकल्स को न्यूट्रिलाइज़ करते हैं. उन्हें स्थिर बनाते हैं. दरअसल, फ्री रेडिकल्स शरीर के सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं. वहीं, एंटीऑक्सीडेंट्स इन फ्री रेडिकल्स को स्टेबल बनाते हैं ताकि सेल्स को नुकसान न पहुंचे. और, कैंसर समेत दूसरी बीमारियों का रिस्क घट जाए.

ग्लूटन-फ्री होता है

मखाने में ग्लूटन नाम का प्रोटीन नहीं होता. इसलिए जो लोग ग्लूटन-सेंसेटिव हैं. वो बिना किसी टेंशन के मखाने खा सकते हैं. 

दिल की सेहत सुधारे

ये आपके दिल के लिए भी अच्छा है. मखाने में पोटैशियम होता है. जो हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है. वहीं इसमें मौजूद मैग्नीशियम बैड कोलेस्ट्रॉल का लेवल कम करता है. साथ ही, गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ाता है. जिससे दिल की सेहत सुधरती है.

शरीर की सूजन घटाता है

न्यूट्रिशनिस्ट चारु आगे कहती हैं कि मखाने में एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण भी होते हैं. यानी इससे शरीर की अंदरूनी सूजन घटती है. तो जिन लोगों को अर्थराइटिस है. उन्हें रोज़ थोड़े मखाने खाने चाहिए. इससे जोड़ों का दर्द और सूजन दूर करने में मदद मिलेगी.

मखाने में एंटी-एजिंग गुण भी

मखाने आपकी स्किन के लिए भी अच्छे हैं. इसमें एंटी-एजिंग गुण होते हैं. इसे खाने से स्किन लचीली और चमकदार बनती है. और, स्किन एजिंग धीमी हो जाती है.

कितना खाएं?

आप एक दिन में 2-3 मुट्ठी मखाने खा सकते हैं. यानी करीब 30 से 40 ग्राम. हालांकि इससे ज़्यादा मखाने न खाएं. वरना ब्लोटिंग हो सकती है. वहीं जिन्हें नट्स या सीड्स से एलर्जी है, उन्हें मखाने से परहेज़ करना चाहिए.

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें. ‘दी लल्लनटॉप ’आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

वीडियो: सेहत: कैसे पहचानें कि स्किन पर मस्सा है या कैंसर?

Advertisement