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'ये देश पुजारियों का नहीं है', BJP नेताओं ने राहुल गांधी का अधूरा वीडियो शेयर किया

बीजेपी नेताओं ने राहुल का वीडियो शेयर किया है.

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अमित मालवीय के ट्वीट का स्क्रीनशॉट.
दावा

8 जनवरी की दोपहर बीजेपी आईटी सेल इंचार्ज अमित मालवीय (Amit Malviya BJP) ने राहुल गांधी का एक वीडियो ट्वीट किया. 7 सेकेंड के इस वीडियो में राहुल कहते हैं- 

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'और ये देश तपस्वियों का है, ये देश पुजारियों का नहीं है. रियलिटी इस देश की ये है.'

अमित मालवीय ने ट्वीट का कैप्शन लिखा, (आर्काइव)

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'अब इनको पुजारियों से भी तकलीफ़ है…'

बीजेपी दिल्ली के वेरिफाइड ट्विटर अकाउंट से इस वीडियो को ट्वीट किया और लिखा, (आर्काइव)

 वाह राहुल जी अब आपको पुजारियों से भी तकलीफ़ है…

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इनके अलावा हरियाणा बीजेपी, पंजाब बीजेपी, ऑफिस ऑफ मनोज तिवारी, झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष दीपक प्रकाश और बीजेपी नेता राकेश गोयल ने भी वायरल वीडियो को इसी दावे के साथ शेयर किया है.

फेसबुक पर भी राहुल का ये वीडियो जमकर वायरल है.

पड़ताल

'दी लल्लनटॉप' ने जब वायरल वीडियो की पड़ताल की तो बीजेपी नेताओं का दावा भ्रामक निकला. राहुल का जो वीडियो शेयर हो रहा है, वो अधूरा है. 
वायरल वीडियो का फुल वर्जन हमें कांग्रेस के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर मिला. 8 जनवरी, 2023 को भारत जोड़ो यात्रा हरियाणा में थी और इस दौरान राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. वीडियो में 37 मिनट के बाद वायरल वीडियो वाला हिस्सा देखा और सुना जा सकता है. लेकिन इस हिस्से की बात का संदर्भ समझने के लिए पूरी वीडियो को देखना जरूरी है.

राहुल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'तपस्या' और 'पूजा' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है. इन्हीं शब्दों के चलते राहुल ने पुजारी वाली बात बोली है. 27 मिनट 5 सेकेंड के बाद राहुल कहते हैं,

'कांग्रेस पार्टी की अगर आप हिस्ट्री देखें. जो आपने कहा कार्यकर्ता में जोश आ गया है. ये तपस्या का संगठन है. इसको अगर आप तपस्या में लगाते हैं, तो इसकी एनर्जी बढ़ती है. बीजेपी पूजा का संगठन है. उसको अगर आप पूजा में लगाते हैं, उसमें स्ट्रेंथ आती है. अब पूजा दो तरीके की होती है. धर्म की बात कर रहा हूं. पूजा नॉर्मली होती है कि भाई, मैं भगवान के पास जाता हूं और मैं उनसे कुछ मांगता हूं. मगर इनिशिएटिव जो जो पूजा करता है, उसका होता है. RSS की पूजा अलग है. RSS चाहता है कि फोर्सिबली (जबरदस्ती) उनकी पूजा हो. मोदी जी चाहते हैं.. इसलिए वो आपसे नहीं मिलते हैं कि फोर्सिबली उनकी पूजा हो और देश में सब लोग उनकी पूजा करें. उसका रेस्पोंस एक ही हो सकता है. उसका रेस्पोंस तपस्या ही हो सकता है और कोई रेस्पोंस नहीं हो सकता है. और इसीलिए ये जो यात्रा है ये बहुत सक्सेसफुल है क्योंकि इसमें सिर्फ कांग्रेस पार्टी तपस्या नहीं कर रही है, सिर्फ एक व्यक्ति तपस्या नहीं कर रहा है, इसमें लाखों लोग तपस्या कर रहे हैं. और इस यात्रा का मैसेज यही है.' 

29 मिनट पर राहुल कह रहे हैं कि,

'इस देश में तपस्या की रेस्पेक्ट होनी चाहिए, स्किल की रेस्पेक्ट होनी चाहिए, काम की रेस्पेक्ट होनी चाहिए. कांग्रेस पार्टी ये कहती है, हिस्टॉरीकली ये कहा है. और बीजेपी कहती है, RSS कहती है कि नहीं भैय्या, तपस्या की कोई रेस्पेक्ट नहीं होनी चाहिए. जो हमारी पूजा करेगा उसकी रेस्पेक्ट होगी.'

37 मिनट के आसपास राहुल गांधी एक पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहते हैं,

'हम ये क्यों नहीं कहते देखो देखो मजदूर कितने किलोमीटर चला है? क्योंकि हम तपस्या की रेस्पेक्ट नहीं करते हैं. मैं करता हूं. तो ये चेंज लाना है और ये देश तपस्वियों का है, ये देश पुजारियों का नहीं है. रियलिटी इस देश की ये है और जैसा कि मैंने कहा इस देश को सुपरपावर बनना है जो आप कहते रहते हो तो तपस्वी की रेस्पेक्ट करनी पड़ेगी, उत्पादन की रेस्पेक्ट करनी पड़ेगी उससे गले मिलना पड़ेगा, बैंक के दरवाजे उसके लिए खोलने पड़ेंगे उसकी प्रोटेक्शन करनी पड़ेगी.'

राहुल के इस बयान के बाद वीडियो खत्म हो जाता है.

नतीजा

पूरा वीडियो देखने के बाद आसानी से समझा जा सकता है कि ये तुलना कांग्रेस और बीजेपी के बीच थी. राहुल ने कांग्रेस की तुलना तपस्वी से की थी और BJP-RSS की तुलना प्रार्थना करने वाले लोगों से की थी. अमित मालवीय समेत दूसरे बीजेपी नेताओं ने राहुल की जो शॉर्ट क्लिप शेयर की है, वो असल संदर्भ से अलग है.

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