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'डार्लिंग्स' को अच्छी या बुरी फ़िल्म कहना बेईमानी क्यों?

'डार्लिंग्स' कहानी है बदरू की. उसका पति हमज़ा पीता है और उसे पीटता है.

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'डार्लिंग्स' कहानी है बदरू की. उसका पति हमज़ा पीता है और उसे पीटता है. भयंकर क्रूरता से पीटता है. रात को पीटता है. सुबह मनाता है और मार खाई पत्नी पिघल जाती है. अपने पति को गले लगाती है, प्रेम करती है. रात होती है. पति फिर पीटता है. पत्नी पिटती है और पति की सेवा करती है. बदरू की मां उसे समझाती है. पर वो एक के बाद एक तमाम मौके हमज़ा को देती है. और सोने से पहले खाना नहीं, मार खाती है. पर अचानक कुछ ऐसा होता है कि बाज़ी पलटती है. चॉल में साथ रहने वाले ज़ुल्फ़ी और अपनी मां के साथ बदरू कुछ प्लान बनाती है. उस प्लान को अंज़ाम देती है या नहीं, या प्लान बदल जाता है? उनका प्लान उन्हें पुलिस स्टेशन पहुंचा देता है. यहां मार कुटाई एक तरफा नहीं है, दो तरफा है. यही कहानी है. देखें वीडियो.

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