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दुनिया के नक्शे पर कोई बीमारी कैसे फैलती है?

इसका भी एक ट्रेंड है. नदर्न और सदर्न हेमिस्फीयर सुना है?

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वायरॉलजिस्ट डॉक्टर इयन लिपकिन का कहना है कि दुनिया में किसी भी बीमारी के फैलने का नदर्न और सदर्न हेमिस्फीयर से बड़ा नाता है. (फोटो- ANI)
क्या किसी बीमारी के फैलने का भी कोई ट्रेंड हो सकता है? क्या कभी ये अनुमान लगाया जा सकता है कि कोई बीमारी दुनिया के फलां हिस्से में फैलेगी, तो ढिमकां हिस्से में कम होगी? ऐसा एक ट्रेंड है. इसके बारे में बताया अमेरिका के मशहूर वायरॉलजिस्ट (वायरस पर रिसर्च करने वाले डॉक्टर) इयन लिपकिन ने. इयन अब तक वायरस फैलाने वाले 500 से ज़्यादा इंफेक्शन एजेंट्स पर रिसर्च कर चुके हैं. उन्हें ‘वायरस हंटर’ कहा जाता है. इयन ने इंडिया टुडे टीवी के न्यूज़ डायरेक्टर राहुल कंवल से बात की. इयन बोले,
“किसी भी बीमारी के फैलने का एक ट्रेंड होता है. जब ये नदर्न हेमिस्फीयर में बढ़ती है, तो सदर्न हेमिस्फीयर में कम रहती है. जब सदर्न में बढ़ती है, तो नदर्न में कम रहती है. कोरोना वायरस के केस में भी ये ट्रेंड दिख रहा है. फिलहाल नदर्न हेमिस्फीयर इससे परेशान है. मुमकिन है कि सदर्न में भी धीरे-धीरे इसका असर और भयानक हो.”
इससे बचने के लिए क्या किया जाए? इस पर इयन ने बताया – “बाकी देशों के पास अब ये मौका है कि वो प्रभावित देशों से सीखें. जैसे कि जर्मनी ने किस तरह अच्छा काम किया और अमेरिका ने कम अच्छा. या स्वीडन की तुलना बाकी स्कैंडेनेवियन देशों से कर सकते हैं. लॉकडाउन और टेस्ट के मामले में पिछड़कर स्वीडन को भारी नुकसान हुआ है.” नदर्न और सदर्न हेमिस्फीयर क्या है? हमारी धरती के दो ध्रुव (सिरे) हैं- उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव. इन दोनों के बीचों-बीच से यानी धरती के बीचों-बीच से एक काल्पनिक लाइन गुज़रती है. जो माना जाता है कि धरती को दो बराबर हिस्सों में बांटती है. इसे कहते हैं- भूमध्य रेखा. इसके उत्तर में जो हिस्सा है, वो हुआ- नदर्न हेमिस्फीयर यानी धरती का उत्तरी गोलार्ध. भूमध्य रेखा के दक्षिण में जो हिस्सा है, वो हुआ- सदर्न हेमिस्फीयर यानी दक्षिणी गोलार्द्ध. इन्हीं हेमिस्फीयर का ज़िक्र डॉ लिपकिन ने किया. नदर्न हेमिस्फीयर में आते हैं- यूएस, यूके, भारत, चीन, फ्रांस, रूस जैसे देश. इन देशों में अभी कोरोना वायरस का काफी असर है. सदर्न हेमिस्फीयर में आते हैं- अर्जेंटिना, ब्राज़ील, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड जैसे देश. यहां तुलनात्मक रूप से असर कम है.
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