Suresh Wadkar को फिल्मों में पहला मौक़ा तो म्यूजिक डायरेक्टर Ravindra Jain ने दिया था. मगर उनके सुरों को परवाज़ Lata Mangeshkar ने दी. वो लता ही थीं, जिन्होंने Naushad, Khayyam और Laxmikant-Pyarelal जैसे दिग्गजों को फोन करके सुरेश वाडकर का नाम रेकमेंड किया था. मगर बाद में लता से ही मनमुटाव के चलते सुरेश वाडकर के हाथ से बड़ी फिल्में फिसल गईं. इनमें Shahrukh Khan को लेकर बनी Ketan Mehta की Maya Memsaab और Yash Chopra की Darr जैसी बड़ी फिल्में भी शामिल हैं. डायरेक्टर्स के पसंद के गायक होने के बावजूद, सिर्फ लता के साथ बिगड़े समीकरण के चलते सात साल सुरेश बड़ी फिल्मों से महरूम रहे. हाल ही में जब सुरेश वाडकर दी लल्लनटॉप के ख़ास कार्यक्रम गेस्ट इन द न्यूज़रूम में आए, तो ये पूरा वाकया सुनाया. बताया कि लता मंगेशकर उनसे क्यों नाराज़ हो गई थीं? और फिर सुरेश ने उन्हें कैसे मनाया? इसमें सबसे बड़ी भूमिका Asha Bhosle ने निभाई.
"लता दीदी से मनमुटाव के कारण मेरे हाथ से कई बड़ी फिल्में छिन गईं, कई साल का नुकसान हो गया"
सुरेश वाडकर ने कहा- "शाहरुख खान की 'माया मेमसाब', 'डर'... सबमें मैं गाता. लता दीदी ने बोला होगा कि मैं सुरेश के साथ नहीं गाऊंगी... तो बस, ख़त्म."


लता जी से अनबन के बारे में विस्तार से बात करते हुए सुरेश वाडकर ने कहा,
“अरे उनके साथ पहला गाना ही उनकी वजह से मिला था. जब लता जी से पहली बार मुलाक़ात हुई थी, तब मैं जयदेव जी के पास असिस्टेंट था. तो ऐसे ही उन्होंने लता जी से मिलवा दिया, कि ये सुरेश वाडकर है. बहुत अच्छा गाता है बच्चा. मगर जब रवींद्र जैन साहब 'मेरा रक्षक' फिल्म बना रहे थे, तो उसका गाना चल रहा था. और लता जी गाने वाली थीं. तो दादू (रवींद्र जैन) ने कहा- ‘अरे आज दीदी गा रही हैं. तू आजा घूमते-घूमते.’ मैं गया. तब दादू ने मुझे उनसे फॉर्मली मिलवाया. कहा कि ये बहुत अच्छा गाता है. और आपके कोल्हापुर से है. बस ये सुनते ही लता जी ने मुझे पास में बैठाया. काफ़ी देर मुझसे मेरे घर-परिवार की बातें भी कीं. फिर बोलीं, कि तुम्हारे जो रिकॉर्डेड सॉन्ग्स हैं, वो मुझे किसी दिन लाकर सुनाना.”
लता जी के बुलाने पर सुरेश वाडकर अपनी कैसेट्स लिए उनके घर जा पहुंचे. उन्होंने बताया,
“लता जी ने मेरे सारे गाने पूरे-पूरे सुने. उसी वक्त उन्होंने फोन उठाकर सब बड़े-बड़े म्यूजिक डायरेक्टर्स को फोन किया. नौशाद साहब, पंचम दा, कल्याण जी-आनंद जी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल जी, खय्याम साहब... सबसे कहा कि ये बच्चा बहुत अच्छा गाता है. आप इसको ज़रूर गवाइए. और दो या ढाई महीने में 'क्रोधी' बन रही थी. 'चल चमेली बाग में, मेवा खिलाऊंगा...' ये मेरा लता जी के साथ पहला गाना. और मैं इतना घबराया हुआ था, कि साक्षात सरस्वती के साथ गाना है मुझे. मुझे लग रहा था कि पांव है ही नहीं मेरे. मैं कांप रहा था. और थोड़ी ग़लतियां कर रहा था. मेरे माइक का बैलेंस बिगड़ रहा था. तो दीदी ने आहिस्ता से मुझे बुलाया. बोलीं- ‘देखो बहुत अच्छा गा रहे हो. मी आहे तुला बरोबर. घाबरू नका’. बस इतना करना कि गाना म्यूजिक डायरेक्टर कैसे गा सकता है, वैसे गाने की कोशिश करो. तो उनको अच्छा लगेगा. बस, फिर लता जी के साथ गाने का सिलसिला चल पड़ा.”
लंबे रिश्तों में अक्सर कुछ ग़लतफहमियां, कुछ अप्रिय बातें हो जाती हैं. लता और सुरेश वाडकर के रिश्ते में भी ये ढलान आई. इस बारे में सुरेश ने कहा,
"ऐसा होता है. हुआ भी. और इसका भुगतान मुझे करना पड़ा. कोई छह-सात साल उन्होंने मेरे साथ कोई गाना नहीं गाया. ये बात है 1994-95 की. कुछ ग़लतफ़हमी हो गई थी. असल में पहले लती जी के साथ मेल सिंगर रवींद्र साठे और उनके भाई हृदयनाथ गाते थे. बाद में उनके साथ सिर्फ मैं ही गाने लगा. तो जब मुझे पता चला कि वो नाराज़ हैं, तो मैं सोचूं, कि क्या हुआ ऐसा? उन्होंने दूसरे सिंगर्स को लेना शुरू कर दिया. तो समझ में आया कि कुछ गड़बड़ है. तो एक दिन आशा जी मेरे स्टूडियो में आई थीं, मैं उनसे मिला. मेरे कंधे पर हाथ रख कर वो बोलीं- 'क्या रे, क्या हुआ है दीदी और तुम्हारा? क्यों तुम्हारे लिए उसका मन ख़राब हो गया?' मैं बिल्कुल अनभिज्ञ था. ये लगता ज़रूर था अंदर से कि कुछ दिक्कत है. मगर मैं डायरेक्ट कैसे पूछता? अगर कोई बात नहीं होती, तो खामखा उन्हें कुछ और लगता. तो आशा जी ने पूछा कि तुमने कुछ ग़लत बोला है उनके लिए? मैंने बोला, मैं तो उनको मां बोलता हूं. मेरे लिए देवी हैं आप दोनों. मैं कैसे ग़लत बात बोल सकता हूं? और वो भी दीदी के लिए, जिनकी बदौलत मेरे करियर को इतना उछाल मिला. तो वो बोलीं- 'कुछ तो गड़बड़ है. कार का गेट खोलकर मुझे धक्का देते हुए उन्होंने मुझे उसी वक्त अपनी कार में बैठा दिया. बोलीं- ‘इसी गाड़ी में जा. और जब तक मैं गाना ख़त्म करती हूं, उनके मिलकर आ’."
लता के घर पर क्या हुआ, इसके बारे में सुरेश वाडकर ने बताया,
"मैं गया. मैंने उनके चरण छुए. हाथ जोड़कर मैंने पूछा- 'हे मां, क्या ग़लती हुई है मुझसे? मुझे आशा ताई ने बोला अभी. देखिए मैं लुंगी कुर्ते में ही आ गया'. वो बोलीं- ‘तुमने कुछ ग़लत बात की थी’. मैंने पूछा- ‘आपने सुनी थी? मैं अगर कोई ग़लत बात बोलता, तो आपका मेरा इतना स्नेह है. बच्चा हूं मैं आपका. मैं आपके सामने बोलता’. फिर वो बोलीं कि उनके भतीजे आदिनाथ के लिए मैंने कुछ ख़राब बोला. मैंने कहा सवाल ही नहीं उठता. ये कुछ ग़लतफ़हमी है आपको. मैंने कहा आप मुझे नाम बताइए. फिर वो मेरा कोल्हापुरी मिज़ाज आया. मैंने कहा मैं उसकी कॉलर पकड़कर आपके सामने लाऊंगा. उसको पहले दो जूते मारूंगा. और फिर बात करूंगा. फिर उन्हें लगा कि ये पक्का जाएगा. और कॉलर पकड़कर लाएगा. और मैं लाता. वो कितना भी बड़ा आदमी होता. मैं लाता उसको. तब उन्हें लगा कि कोई गड़बड़ है. फिर वो बोलीं- ‘तुम भूल जाओ सब’. बाद में उन्होंने उस व्यक्ति का नाम भी बताया. बहुत बड़ा IAS ऑफिसर था वो. और मेरा दोस्त था. उसी ने खंजर मारा."
इस ज़रा सी ग़लतफ़हमी ने सुरेश वाडकर से दर्जनों बेहतरीन गाने छीन लिए. सुरेश ने कहा,
“अब आप सोचिए कि वो जो पीरियड है, जिसमें ‘माया मेमसाब’ भी बनी. यश जी के पास लाइन से गा रहा था मैं. कई साल का नुकसान हो गया. और अच्छी फिल्में गईं. ‘डर’ मेरे हाथ से गई. ‘विजय’ गई. यश जी (यश चोपड़ा) की और भी फिल्में थीं.”
यश चोपड़ा के साथ अपने रिश्ते को याद करते हुए सुरेश ने कहा,
"मुझे याद है ‘चांदनी ’के टाइम मैं यूएस में था आशा जी के साथ शो के लिए. यश जी ने वहां कहीं से ढूंढकर मुझे कॉल करवाया. वो बोले- ‘कहां घूम रहे हो यार? मेरे गाने रुके हुए हैं'. मैं वापस आया और ‘लगी आज सावन की झड़ी…’ और ‘तू मुझे सुना मैं तुझे सुनाऊं गाया…’. अब सोचिए उनके इतने प्रेम के बावजूद लता दीदी के साथ मनमुटाव के चलते मेरे हाथ से बहुत सारी बड़ी फिल्में गईं. अगर उन्होंने बोला होगा, कि नहीं मैं सुरेश के साथ नहीं गाऊंगी... तो ख़त्म. बस. एक गाना था ‘त्रिवेणी’ में. ‘किस्मत में लिखी कोई...’ तो लता जी को बुलाया था उन्होंने. तो डायरेक्टर ने मुझे पूछा- क्या बात है? लता जी ने क्यों मना किया तुम्हारे साथ गाने को? मैं क्या बोलता? फिर वो गाना मैंने अनुराधा (अनुराधा पौडवाल) के साथ गाया."
काम का हर्जा तो हुआ, मगर सुरेश वाडकर ने लता से अपना रिश्ता बचा लिया. एक बार फिर लता मंगेशकर के साथ उनका मरासिम बना और सारी बातें पहले जैसी हो गईं. लता मंगेशकर के साथ सुरेश वाडकर का एक गाना अनरिलीज़्ड है. बोल हैं- ‘मैं अकेला तुम अकेली इस अभोगित चांदनी में... मैं न बहका तुम न बहकीं तो नियम बदनाम होंगे’. फिल्म का नाम था ‘तन-मन डॉटकॉम’. ये सुरेश के प्रोडक्शन में बनी पहली और एकमात्र फिल्म होती. मगर अस्सी टका बनने के बाद ये डिब्बाबंद हो गई. सुरेश वाडकर ने इस इंटरव्यू में इस गाने का मुखड़ा गुनगुनाया. और कहा कि वो जल्द ही इसे रिलीज़ करेंगे.
वीडियो: गेस्ट इन द न्यूजरूम: 'चप्पा चप्पा चरखा चले' के पीछे की कहानी, लता क्यों हुई थीं नाराज? सुरेश वाडकर ने सब बताया















