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"AR रहमान को घमंड है कि वो गाने में साउंड बहुत अच्छा क्रिएट करते हैं, मैंने ग़लती बता दी और..."

ट्यून में फिट करने के लिए एआर रहमान ने सुरेश वाडकर को उर्दू लफ़्ज़ में बदलाव करने को कहा. सुरेश बोले- "लोग मुझे जूते मारेंगे".

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'रंगीला' में एआर रहमान और सुरेश वाडकर ने पहली बार साथ काम किया.

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  • सुरेश वाडकर और एआर रहमान के बीच गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान उर्दू शब्दों के उच्चारण को लेकर मतभेद हुआ था, जिससे उनका सहयोगी संबंध प्रभावित हुआ था।
  • इस घटना के पीछे दो कलाकारों के बीच भाषा और उच्चारण को लेकर असहमति थी, जिसने उनके बीच पेशेवर बातचीत को चुनौती दी और मनमुटाव पैदा किया।
  • इस मतभेद के बाद दोनों कलाकारों ने फिर से साथ में काम नहीं किया, जिससे उनके संभावित संगीत सहयोग को सुनने वालों तक पहुँचने का अवसर खत्म हो गया।

Suresh Wadkar ने Naushad, Khayyam और Ravindra Jain जैसे लेजेंड्स से लेकर AR Rahman जैसे एक्सपेरिमेंटल Music Directors के लिए भी गाने गाए. मगर रहमान के साथ सुरेश का सिर्फ एक गाना है. Aamir Khan और Urmila Matondkar की Rangeela का Pyar Ye Jaane Kaisa Hai. इसके बाद उन्होंने रहमान का एक गाना रिकॉर्ड तो किया, मगर वो फिल्म ही रिलीज़ नहीं हुई. इसी गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान सुरेश वाडकर और एआर रहमान के बीच कुछ तर्क-वितर्क हो गए. मामला उर्दू अल्फ़ाज़ के तलफ़्फ़ुज़ से जुड़ा था. एक तरफ़ रहमान जो अपनी धुन के मगनून. और दूसरी तरफ़ सुरेश वाडकर, जो उच्चारण से समझौते को गुनाह मानते हैं. बस, दोनों में ठन गई. झगड़ा नहीं हुआ. मगर मतभेद के बाद शायद मनभेद भी हो गया. और इसके चलते ये दोनों कलाकार मिलकर जो जादुई रसायन बना सकते थे, उसे लोग सुननेवाले महरूम रह गए. 

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पिछले दिनों जब सुरेश वाडकर दी लल्लनटॉप के ख़ास कार्यक्रम गेस्ट इन द न्यूज़रूम में आए, तो रहमान से मनमुटाव का पूरा किस्सा सुनाया. उन्होंने कहा,

“प्यार ये जाने कैसा है... ये था AR रहमान के साथ मेरा पहला गाना. इससे पहले मैं AR को दिलीप नाम से ही जानता था. क्योंकि सदमा में 12-13 साल का बच्चा था ये. पानी की तरह की-बोर्ड बजाता था. पानी की तरह. और फिल्म सेंटर में मेरे सिंगर्स बूथ के बाहर इसने अपना संसार लगाया हुआ था. मतलब चार-पांच की-बोर्ड्स लगाकर बीच में बैठा हुआ था. तो मैंने बोला- इतना छोटा बच्चा, कैसे पानी तरह की-बोर्ड बजाता है. मूंछें भी तब उसको बारीक-बारीक आई थीं. और तब उसका नाम दिलीप था. जब ‘प्यार ये जाने कैसा' के लिए बुलाया, तब उसका नाम रहमान-रहमान, चल पड़ा था. तो ये महाशय रात को काम करते हैं ज़्यादा. पूरी रात काम करते हैं. दिन में 3 बजे तक सोते हैं ये. तो दूसरी फिल्म का जब गाना गाने गया मैं, बहुत अच्छा गाना. ‘ऐ ज़ोहरा जबीं, जोहरा जबीं, ज़रा सुनिए बात मेरी...’ फिल्म थी मणिरत्नम की, जो तमिल और हिंदी में बन रही थी. तमिल में चली नहीं फिल्म. तो हिंदी वाली शेल्व कर दी उन्होंने. उसमें मेरा ये गाना था. मैंने और साधना सरगम ने गाया है.”

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चेन्नई में रहमान के स्टूडियो में हुई इस गाने की रिकॉर्डिंग के दौरान हुए मनमुटाव के बारे में सुरेश ने कहा,

“…तो उनके असिस्टेंट ने ये डबिंग करवाई थी. उनके आने तक, क्योंकि वो दोपहर को उठते थे. तो वो आए, उन्होंने गाना सुना. शाम 6 बजे हमारी फ्लाइट थी मद्रास से वापसी की. अब जाने से पहले गाने का राइटर महबूब आया हमारे होटल पर. बोला, ‘वाडकर साहब, AR साहब बुला रहे हैं आपको’. मैं चौंक गया. वो बोला- ‘गाना अच्छा हो गया. मगर उनको उसमें थोड़े करेक्शन करने हैं’. मैं गया. वो क्या साउंड मैन हैं ना. साउंड के साथ उनका लगाव है. अभिमान है उनको, कि साउंड बहुत अच्छा क्रिएट करते हैं वो गाने में. तो वो मुझे कहने लगे- ‘सुरेश जी इफ़ यू कैन सिंग ज़ोहरा ज़बीं ज़ोहरा ज़बीं’. मतजब जबीं में नुक़्ता लगाकर उसको ज़बीं बोलने को कहा. मैंने बोला ऐसा नहीं है. ये वर्ड ग़लत हो जाएगा. ज़ोहरा जबीं है वो. महबूब पीछे खड़ा था. मैंने बोला महबूब तुम तो समझाओ इनको. और मैंने ये भी कहा कि देखो रहमान, आप तमिल हैं. और मैं महाराष्टियन हूं. और ये वर्ड है उर्दू. ये मैं अगर ग़लत गाता हूं, तो उर्दूदां लोग जो हैं, जो वो सच में मुझे जूता हाथ में उठाकर मेरे सिर पर मारेंगे.”

कुछ देर तर्क-वितर्क हुआ. फिर सुरेश ने गाने का एक फ्रेश टेक दिया. इसके बारे में सुरेश ने कहा,

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“उर्दू में खिलवाड़ चलता नहीं लोगों को. मैंने कहा, सिर्फ साउंड की वजह से मैं इसे ऐसे नहीं गाऊंगा. भले ही तुम ऐसा गाने को कह रहे हो. फिर भी मैंने थोड़ा सा उसकी इंटेंसिटी कम करके गाया. वो बोले- ‘ओके ओके, दिस इज़ ओके’. तो वो थोड़ा सा आर्ग्युमेंट हो गया था हमारे बीच. मैंने बोला कि रहमान मैं ऐसे तो नहीं गा पाऊंगा ये शब्द. क्योंकि मेरे कानों पर मेरे गुरुजी की वजह से उर्दू पड़ती रही है. तो वो थोड़ा सा मनमुटाव हो गया. शायद उसको लगा होगा कि ये लड़का बात सुनता नहीं है. फिर उसके बाद उन्होंने मुझे कभी नहीं बुलाया. प्यार उतना ही है. जहां भी मिलते हैं, हम लोग बहुत प्यार से मिलते हैं. हमारे घर पर भी आए थे वो. और मैंने उनको बोला भी कि क्या रहमान, उसके बाद तो बुलाया ही नहीं तुमने? तो बोले अरे ऐसा कुछ नहीं है. मैं याद करूंगा आपको किसी दिन. मगर फिर ऐसा कोई योग बना नहीं. मुझे लगता है कि मुझे वो गाना मांगना चाहिए उनसे. मेरे रिकॉर्ड में रखने के लिए, कि मैंने रहमान का ये गाना भी गाया था. मेरी तसल्ली के लिए.”

रहमान से उच्चारण पर हुए इस मनमुटाव वाला वाकया बताते हुए, उसी सांस में सुरेश ने कहा,

“क्या है कि हमारी इंडस्ट्री में हेल्दीनेस थोड़ी कम है. ज़्यादा लोग हेल्दी तरीके से सोच नहीं पाते. बहुत कम लोग हैं. ऐसा नहीं कि नहीं हैं. मगर समझो कि 100 में सात-आठ टका लोग होंगे जो स्वस्थ तरीके से सोच पाते हैं. वरना ज़्यादातर को ग़ुस्सा निकालना है. किसी को किसी कैम्प का समझकर नहीं बुलाना. ऐसा बहुत चलता है. मेरे साथ भी हुआ है.”

सुरेश वाडकर के बारे में एक बात उनके क़रीबी जानते हैं कि उन्हें OCD ऑब्सेसिव कम्पल्सिव डिसऑर्डर है. बार-बार हाथ धोना. चीजें साफ़ हैं या नहीं, ये शक़ बना रहना. चीज़ों में सिमेट्री न दिखे, तो डिस्टर्ब हो जाना. ये सब उनकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है. उनके दोस्त अक्सर उनके लिए मज़ाक में कहते हैं- ये वो हैं जो पानी भी धोकर पीते हैं. 

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