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'जवान' के अलावा शाहरुख ने इन 6 फिल्मों में निभाए हैं नेगेटिव किरदार

एक दौर था जब 6 महीनों के अंदर में ही शाहरुख की तीन नेगेटिव किरदारों वाली फ़िल्में आई थीं.

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शाहरुख की ये सभी ९0 के दशक की फ़िल्में हैं.

Jawan में Shah Rukh Khan नेगेटिव किरदार में दिखने वाले हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि इसमें उनका बाप-बेटे का डबल रोल है. बेटे वाला रोल पॉजिटिव है. बाप वाला रोल नेगेटिव और ग्रे शेड होने वाला है. शाहरुख की इमेज एक रोमैंटिक हीरो की है. इसके बावजूद उन्होंने ऐसी तमाम फ़िल्में की हैं, जिसमें उनके किरदार नकारात्मक हैं. आइए आपको शाहरुख की कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताते हैं.

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1. बाज़ीगर

शाहरुख खान के करियर की आठवीं फिल्म, 'बाज़ीगर'. यही वो फिल्म है, जिसने शाहरुख को बॉलीवुड में पुरज़ोर ढंग से स्थापित किया. इसके बाद ही शाहरुख सुपरस्टार बनने की ओर बढ़ चले. पहला फ़िल्म फेयर इसी मूवी ने उन्हें दिलाया. अपने करियर के शुरुआती दौर में शाहरुख ने कई नेगेटिव शेड्स कैरेक्टर किए. उन्हीं में से एक किरदार था, अजय शर्मा का. कहते हैं ये किरदार सलमान, अक्षय, आमिर, अजय देवगन से होते हुए शाहरुख तक पहुंचा था. सोचिए एक किरदार कैसे किस्मत बदल देता है? अब्बास-मस्तान की इस पिक्चर में शाहरुख को रोल मिला कैसे? आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

2. डर

12 नवंबर 1993 को 'बाज़ीगर' रिलीज हुई है. इसके अगले ही महीने यानी 24 दिसंबर को शाहरुख खान की एक और फिल्म रिलीज हो गई, नाम था 'डर'. हालांकि इसमें मुख्य भूमिका सनी देओल निभा रहे थे. लेकिन पिक्चर की सारी लाइमलाइट SRK का किरदार राहुल मेहरा लूट ले गया. इसमें वो एक साइकॉटिक सीरियल किलर के रोल में थे. एक ऐसा आदमी जो किरन के प्रेम में पगलाया रहता है. इस पर रोल बार कई बार स्टॉकिंग को जस्टिफाई करने के भी आरोप लगते हैं. इसी फिल्म से शाहरुख का फेमस हकलाने वाला अंदाज़ 'कककक...किरन' आया. शाहरुख ने इस अंदाज़ के पीछे का साइकॉलॉजिकल ऐंगल भी है. इस साइकॉलॉजी को खुद शाहरुख ने एक बार समझाया था. आप यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं.

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3. अंजाम

ये वो दौर था, जब शाहरुख सिर्फ ग्रे शेड कैरेक्टर ही चुन रहे थे. सबसे पहले 'बाज़ीगर', फिर 'डर' और इसके चार महीने बाद ही 'अंजाम' आ गई. इसमें उन्होंने विजय अग्निहोत्री का किरदार निभाया है. ये भी एक बदले की भावना से भरा हुआ रोल था. इस फिल्म में शाहरुख अंत में मर जाता है. उस समय कई लोगों की ये शिकायत थी कि शाहरुख अपनी हर फिल्म में मर क्यों जाता है? इससे पहले 'बाज़ीगर' और 'डर' में भी शाहरुख के किरदार की मौत हो जाती है.

4. डुप्लीकेट

लोग शाहरुख को जैसी फ़िल्मों में पसंद कर रहे थे, शाहरुख उन्हें वैसा कंटेंट दे भी रहे थे. 1998 में उनकी एक फिल्म आई, 'डुप्लीकेट'. इसमें उनका डबल रोल था. एक था बबलू चौधरी का और दूसरा मन्नू दादा का. मन्नू दादा इसमें एक क्रिमिनल होता है. उसमें बिलकुल भी नैतिकता नहीं होती है. हालांकि ये उनके ऊपर मेंशन किए गए अन्य तीन किरदारों जितना डरावना नहीं था. 

5. डॉन

'डुप्लीकेट' के बाद शाहरुख ने कई सालों तक कोई नकारात्मक रोल नहीं निभाया. क्योंकि इसके ठीक तीन साल पहले उन्हें DDLJ मिल गई थी. इसने उनके छवि रोमांटिक हीरो की बना दी. शाहरुख उसी ढर्रे पर लगभग एक दशक तक चलते रहे. फिर 2006 में उन्होंने फरहान अख्तर के निर्देशन में 'डॉन' फिल्म में काम किया. इसमें भी उनका डबल रोल था. एक तो डॉन वाला रोल ही था और दूसरा विजय का रोल. विजय वाला कैरेक्टर पॉजिटिव था और डॉन वाले कैरेक्टर के बारे में आप सब जानते ही हैं, वो कितना नेगेटिव था!

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6. फैन

शाहरुख ने 'डॉन' के ठीक 10 साल बाद 'फैन' फिल्म में काम किया. इसमें भी उनका डबल रोल था. एक आर्यन का और दूसरा गौरव का. आर्यन खन्ना वाला कैरेक्टर तो फिल्म स्टार का ही था, लेकिन उसके फैन गौरव का किरदार भयानक नेगेटिव था. हालांकि शाहरुख का ये एक्सपेरिमेंट बॉक्स ऑफिस पर उतता सफल नहीं रहा था.

खैर, ये तो हमारी लिस्ट थी. संभव है हमसे कुछ फ़िल्में छूट गई होंगी. तो आप कमेंट बॉक्स में जोड़ दीजिए. 

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