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सीरम इंस्टिट्यूट ने मांगा ऑक्सफर्ड वाली वैक्सीन के लिए भारत में इमरजेंसी अप्रूवल

इंस्टीट्यूट का कहना है कि वैक्सीन की चार करोड़ से ज्यादा डोज़ तैयार हैं.

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तस्वीर पुणे स्थित सीरम इंस्टिट्यूट की है, जहां कोविशील्ड वैक्सीन को लेकर डेवलपमेंट वर्क चल रहा. (फाइल फोटो- PTI)
कोविड-19 की वैक्सीन को लेकर एक और उम्मीद बंधाने वाली ख़बर आई है. पुणे में स्थित है सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII). ये वैक्सीन तैयार करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से है. सीरम इंस्टिट्यूट के पास ‘कोविशील्ड’ नाम की कोविड वैक्सीन के प्रोडक्शन का काम है. वही वैक्सीन, जो ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका मिलकर बना रहे हैं. सीरम ने कोविड-19 की इस वैक्सीन को मार्केट में लाने के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा है. ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) के सामने इसके लिए आवेदन किया गया है. कोविशील्ड वैक्सीन का अभी फेज़-3 ट्रायल चल रहा है. यानी अंतिम फेज़ का ट्रायल. सीरम इंस्टीट्यूट कोविशील्ड वैक्सीन का प्रोडक्शन शुरू भी कर चुका है. SII का कहना है कि चार करोड़ से ज़्यादा वैक्सीन डोज़ तैयार भी की जा चुकी हैं, ताकि अप्रूवल मिलते ही इसे मार्केट में लाया जा सके. SII का कहना है कि कोविशील्ड के यूके में दो क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं. भारत और ब्राज़ील में एक-एक ट्रायल चल रहा है. अब तक इसे 90 फीसदी से ज़्यादा असरकारी माना जा रहा है. ब्रिटिश वैक्सीन को मिला था इमरजेंसी अप्रूवल दिसंबर के पहले हफ्ते में ही ब्रिटेन में फाइजर और बायोएनटेक कंपनी की वैक्सीन को इमरजेंसी अप्रूवल दिया गया है. ये वैक्सीन क्लीनिकल ट्रायल में सफल रही है. अब वहां मास लेवल पर वैक्सीनेशन शुरू करने की भी तैयारी भी चल रही है. फाइजर की वैक्सीन को मंजूरी देने वाला ब्रिटेन दुनिया का पहला देश बना था. अमेरिका और यूरोपीय यूनियन अभी इस वैक्सीन को रिव्यू कर रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन 95 फीसदी तक सुरक्षित है. इससे पहले, रूस ने स्पूतनिक-5 नाम की वैक्सीन को बेचने के लिए मंजूरी दी थी. लेकिन बाकी किसी देश ने इसका इस्तेमाल शुरू नहीं किया, क्योंकि संदेह था कि रूस ने पूरा प्रोसेस फॉलो किया है या नहीं. अब हमारे-आपके जेहन में ये सवाल आ सकता है कि जब ब्रिटेन में वैक्सीन पास हो चुकी है तो ब्रिटेन वाली वैक्सीन को अप्रूवल देकर भारत उसका इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहा? दरअसल भारत की इस मामले में शुरू से ही नीति स्पष्ट रही है कि विदेश में तैयार हुई किसी भी वैक्सीन का देश में क्लीनिकल ट्रायल किए बिना उसे मंजूरी नहीं दी जाएगी. यानी फाइजर वाली वैक्सीन को भले ही ब्रिटेन की सरकार ने ओके कर दिया हो, लेकिन भारत में इस्तेमाल के लिए उसका यहां ट्रायल में पास होना ज़रूरी है.

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