संगीत की सबसे बड़ी खासियत शायद यही होती है कि वो समय की गिरफ्त में नहीं होता. दशकों से धूल फांक रहा कोई गाना कब हर किसी की जुबान पर चढ़ जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता. पिछले दिनों ‘दुनिया हसीनों का मेला’ और ‘न तो कारवां की तलाश है’ ऐसे कुछ हालिया उदाहरण हैं. इस लिस्ट में नया एडिशन है Aari Aari गाना. जो Dhurandhar 2 के ट्रेलर में Ranveer Singh के वीभत्स एक्शन के बीच इस्तेमाल किया गया है. मगर क्या आपको पता है कि इस गाने का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है. आज हम आपको इस गाने का पूरा तियां-पांचा समझाते हैं.
'धुरंधर 2' के 'आरी आरी' गाने की पूरी कहानी, जिसका इतिहास सैकड़ों साल पुराना है!
'आरी आरी' गाना 'धुरंधर 2' और जसकीरत सिंह रंगी के लिए कितना अहम है, ये आप इस गाने की कहानी जानकर ही समझ पाएंगे.


'धुरंधर' फ्रैंचाइज़ को पॉपुलर करने में इसके गानों का बड़ा हाथ रहा है. इसके लिए म्यूजिक कम्पोज़र शाश्वत सचदेव को भी उतना ही श्रेय दिया जाना चाहिए, जितना आदित्य धर या रणवीर सिंह को मिल रहा है. पहले पार्ट में उन्होंने टोटल 11 नए-पुराने गानों को अपनी धुन से संवारा था. तब लोगों ने उन्हें इतना पसंद किया कि फिल्म का हर एक गाना स्पॉटिफाई पर ग्लोबल चार्टबस्टर बन गया. इनमें 'फ़ासला', शरारत' और 'लुट ले गया' जैसे धमाकेदार गाने भी शामिल हैं. ये गाने इंटरनेट पर महीनों तक वायरल रहे थे. इसलिए 'धुरंधर 2' में भी लोग शाश्वत से काफ़ी बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं.
पिछले दिनों 'धुरंधर 2' का ट्रेलर आया है. इस बार उसे आरी-आरी' गाने की बीट पर काटा गया है. अब फिल्म का एक्शन इस गाने को कॉम्प्लिमेंट कर रहा है या ये गाना उस एक्शन को, ये कहना मुश्किल है. मगर दोनों एक-दूसरे पर खूब जंच रहे हैं. मगर कम ही लोगों को पता है कि ये 23 साल पहले आए एक पुराने गाने का रीमिक्स्ड वर्जन है. ओरिजिनल गाने को डैनिश-इंडियन बैंड 'बॉम्बे रॉकर्स' ने गाया था. शाश्वत ने 'धुरंधर 2' के लिए इसका नया और पॉलिश्ड वर्जन तैयार किया है.
‘बॉम्बे रॉकर्स’ बैंड की शुरुआत 2003 में डेनमार्क में हुई थी. तब डैनिश-इंडियन सिंगर नवतेज सिंह रेहल उर्फ़ Naf पहली बार Thomas Sardorf और Janus Barnewitz से मिले थे. सैरडॉर्फ और बार्नेविट्ज़ तब WCA नाम का बैंड चलाते थे. शुरुआत में नवतेज उनके साथ ही जैमिंग करते रहे. वो पंजाबी और हिंदी वोकल्स गाते थे. वहीं सैरडॉर्फ के हिस्से अंग्रेजी लिरिक्स आते थे. कुछ समय साथ काम करने के बाद उन्होंने ‘बॉम्बे रॉकर्स’ बैंड की शुरुआत की थी. शुरुआती दिनों में बार्नेविट्ज़ उनका बैंड मैनेज करते थे. उनके अलग होने के बावजूद नवतेज और सैरडॉर्फ ने अपना काम जारी रखा. 'आरी आरी' वो पहला गाना था, जो उन्होंने साथ में बनाया था. उनके कुछ अन्य चर्चित गानों में ‘रॉक द पार्टी’ (जिसे जॉन अब्राहम की फिल्म ‘रॉकी हैंडसम’ में इस्तेमाल किया गया था), ‘नवा नवा’ और ‘इश्क’ शामिल हैं. उनका लास्ट गाना ‘लेट्स डांस’ था, जो साल 2011 में रिलीज़ हुआ था.
'आरी आरी' सबसे पहले साल 2003 में रिलीज़ हुआ था. बाद में नवतेज और सैरडॉर्फ ने इसे अपने एल्बम Introducing में शामिल किया था. गाना काफ़ी पसंद किया गया. इससे मोटिवेट होकर इस जोड़ी ने 2007 में इसका एक रॉक वर्ज़न भी बनाया था. ये वर्जन 'क्रैश एंड बर्न' एल्बम का हिस्सा था. यूट्यूब पर इसका करीब दो दशक पुराना धुंधला-सा म्यूजिक वीडियो अब भी मौजूद है. इसमें ‘बॉम्बे रॉकर्स’ के अलावा ओवरसीज़ बैंड के मेंबर्स भी नज़र आए हैं. इस रॉक वर्जन ने भी हर तरफ़ धूम मचाई थी. उन दिनों ये डेनमार्क से लेकर भारत में जबरदस्त पॉपुलर हुआ था. पंजाबी शादियों से लेकर क्लब और पार्टियों में ये गाना सोशल मीडिया के जमाने से पहले ही वायरल हो चुका था.
2007 का रॉक वर्जन ही शाश्वत ने 'धुरंधर 2' में इस्तेमाल किया है. हालांकि 'धुरंधर 2' कोई पहली बॉलीवुड फिल्म नहीं है, जिसमें ये गाना यूज किया गया हो. इससे पहले 2019 में सूरज पंचोली की मूवी 'सैटेलाइट शंकर' में भी इसे शामिल किया गया था. मगर वो एक हंसता-खेलता वर्जन था. 2018 में दिल्ली के ‘ब्लडीवुड बैंड’ ने इसका इंडियन स्ट्रीट मेटल वर्जन रिलीज़ किया था. रणवीर सिंह की मूवी में इसका डार्क और सीरियस वर्जन लाया गया है. ओरिजिनल गाने की तरह इस बार भी इसके पंजाबी लिरिक्स और हिप-हॉप बीट्स ने सबका ध्यान खींच लिया. नए वर्जन में नवतेज सिंह रेहल यानी NaF ने दोबारा अपनी आवाज़ दी है. बॉम्बे रॉकर्स ने 07 मार्च को अपने सोशल मीडिया पेज पर फिल्म का ट्रेलर शेयर कर खुद भी इस बात की जानकारी दी है. नवतेज के अलावा इसमें पंजाबी सिंगर इमरान खान उर्फ़ खान साब, जैस्मिन सैंडलस और सुधीर यदुवंशी की भी आवाज़ है. गाने में Reble और Token का रैप है. वहीं इसके लिरिक्स इरशाद कामिल और बॉम्बे रॉकर्स बैंड ने मिलकर लिखे हैं.

मगर इस गाने का इतिहास इतना ही नहीं है. इसकी जड़ें असल में सैकड़ों साल पुरानी हैं. ये गाना पंजाब के 'बारी बरसी' लोकगीत से जुड़ा है. 'आरी आरी' में कई बार 'बारी बरसी खटन गया सी' सुनाई आता है. ये गीत बोलियां स्टाइल में गाया जाता है. इसमें छोटे-छोटे वाक्य होते हैं, जो तुकबंदी फॉरमेट में होते हैं. सामान्य तौर पर इसमें एक आदमी गाता है और बाकी उसका जवाब देते हैं. इसे पंजाबी शादियों के एक एग्जाम्पल से समझते हैं. शादी में एक आदमी बोलता है- 'बारी बरसी खटन गया सी, ख़ट के लेयांदी चाबी'. बाकी उस पर राइम करते हुए कहते हैं- ‘देख शकीरा जैसे ठुमके ले दुल्हे की भाभी’. पंजाबी त्योहारों में ये एंटरटेनमेंट का बड़ा ज़रिया होता है. टप्पे की आवाज़ और गीत-संगीत के साथ लोग इससे उसी तरह महफ़िल जमाते हैं, जैसे अंताक्षरी में जमाया जाता है.
त्योहारों में भले ये खुशनुमा ढंग से इस्तेमाल किया जाता हो, मगर इसकी बैकस्टोरी बिल्कुल उलट है. इसे समझने के आपको 'बारसी बरसी बरसी खटन गया सी' का मतलब समझना होगा. सामान्य शब्दों में इसका अर्थ है- ‘12 सालों के लिए कमाने गया था’. ये घर से हजारों किलोमीटर दूर नौकरी और मजदूरी करने गए लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता था. ऐसे लोग, जो गरीबी और बेरोज़गारी से तंग आकर दशकों तक घर लौट नहीं पाए. सैकड़ों साल पहले पंजाब और देश के बाकी इलाकों में लोग युद्ध और कमाई के लिए घर से सालों तक दूर रहते थे. इसी वजह से 'बारी बरसी खटन गया सी' आम जन जीवन का हिस्सा बन गया. चूंकि 15वीं-16वीं शताब्दी में लिखित रिकॉर्ड्स का चलन नहीं था, इसलिए ये बातें बोलियां के रूप में पॉपुलर हो गईं. 19वीं सदी के बाद ‘बारी बरसी’ पंजाबी त्योहारों का अभिन्न हिस्सा बन गया.
आपने हीर-रांझा की कहानियां सुनी होंगी. कहते हैं कि हीर के पास रहने के लिए रांझा अपना घर-परिवार छोड़कर निकल गया था. अगले 12 सालों तक वो हीर के घर की भेड़-बकरियां चराने का काम करता रहा. कहते हैं कि 'बारी बरसी' का उस प्रेम कहानी से भी कनेक्शन है. मगर सवाल उठता है कि इस सैकड़ों साल पुरानी कहानी का 'धुरंधर 2' से क्या संबंध? दरअसल, ये गाना कहीं-न-कहीं फिल्म में रणवीर सिंह के किरदार की कहानी बताता है. कहानी उस दुबले-पतले जसकीरत सिंह रंगी की, जो भारतीय जासूस बनने से पहले पंजाब के किसी गांव में एक अंधेरी जिंदगी जी रहा था.
कंधार हाईजैक और 2001 के संसद हमले के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो ने उसे पाकिस्तान में जासूसी के लिए तैयार किया था. तमाम ट्रेनिंग के बाद उसे हम्ज़ा अली मज़ारी की पहचान दी गई. फिर उसे अनंतकाल के लिए पाकिस्तान के ल्यारी शहर भेज दिया गया. जाते वक्त उसे पता नहीं था कि उसकी वतन वापसी कब होगी. होगी भी या नहीं. तब उसे केवल दो शब्द कहे गए थे- ‘नज़र और सबर’. इन्हें अपना ध्येय वाक्य बनाकर हम्ज़ा ने पाकिस्तान में अपने पांव पसारे. और जब मामला जम गया, तो उसे अगला संदेश मिला- ‘हौंसला. ईंधन. बदला’. इसमें बदला सबसे ज़रूरी है. क्योंकि नज़र, सब्र, हौंसला और ईंधन का मक़सद अंत में अपने देश का बदला लेना ही है. इसके लिए वो दशक भर का समय पाकिस्तानी गलियों में बिता देता है. हम्ज़ा बिना बदला लिए पंजाब की मिट्टी पर वापस कदम नहीं रख सकता. इसलिए फिल्म में बड़ी बारीकी से उसकी यात्रा और भावनाओं को समेटने के लिए इस गाने का इस्तेमाल किया गया है. इस गाने की कहानी जानने के बाद वाकई ये कहा जा सकता है- Peak deatailing by Aditya Dhar
वीडियो: मिडिल ईस्ट में 'धुरंधर 2' पर लगे बैन से नुकसान नहीं, फायदा होगा!












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