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बहुत काम आ सकती है स्मार्टफोन की बड़ी स्क्रीन

हर कंपनी फोन स्क्रीन को बड़ी, बड़ी और बड़ी करती जा रही है. उनको पता भी नहीं कि हम लोग कभी इन बड़े फोन्स से ऐसे काम निकालेंगे.

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फोटो - thelallantop
अभी देखा एक भाई ट्रैक्टर ट्रॉली जितना फोन कान में लगाए खुसर फुसर बतिया रहा था. एक जमाना था नोकिया 3315 फोन का. उसको लौंडे गेंद बनाकर क्रिकेट खेलते थे. गांव में वह आम तोड़ने के काम आता था. जब वह गैंगवॉर में इस्तेमाल होने वाला खतरनाक वेपन बन गया तब नोकिया वालों की आंख खुली. और उस फोन का प्रोडक्शन बंद कर दिया. ये एक्सक्लूसिव जानकारी है जो हम दे रहे हैं. किसी से पूछना मत वर्ना इंटेलिजेंस एजेंसीज की नजर में आ जाओगे. स्मार्टफोन्स के तेजी से बड़े होते स्क्रीन एक किसिम की राष्ट्रीय समस्या बनते जा रहे हैं. लेकिन हमारे देश के नेता चिंता व्यक्त करते हैं आतंकवाद पर. जो आता है बाहरी देशों से. जिस पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं. वो चिंता जताते हैं, बैन लगाते हैं शराब पर. बताओ खाने पीने की चीज कहीं समस्या होती है. ये इंटरनेशनल स्पेस सेंटर जितने स्मार्टफोन बैन कराने के लिए न बिहार की महिलाएं आगे आती हैं. न राहुल गांधी सरकार को आड़े हाथों लेते हैं. न कोई भूमाता ब्रिगेड इस प्रॉब्लम की तह में घुसने की जहमत उठाती है. न दिल्ली में सर्वदलीय बैठक होती है. ऐसा लगता है कि वो सब इंतजार कर रहे हैं हादसों का. इनकी नींद तभी टूटेगी जब अखबार में बड़े अक्षरों वाली हेडलाइन छपेगी "तीसरी मंजिल से गिरा फोन, चोट लगने से तीन लोग गंभीर रूप से घायल." फिर उस हादसे के बाद "बड़े और खतरनाक स्क्रीन के बारे में जाने दस बातें" वाले लिस्टिकल आएंगे. लेकिन हमारे तुम्हारे पास इत्ता टाइम नहीं है. और हम इन फोन के नुकसान के बारे में तो कतई बात करेंगे नहीं. हम बताएंगे कि एस्ट्राहीव स्टेडियम बनने की ओर अग्रसर इन स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल हम फौनैती के अलावा किन कामों में कर सकते हैं. 1: कवर से शुरू करते हैं. इनके कवर इत्ते चौड़े और मजबूत होते हैं कि उनमें हवा भरकर ट्रक में टायर की जगह फिट कर सकते हैं. 2: शादी पार्टी में रंगबिरंगी लाइट वाला डांसिंग स्टेज लाने में देर कर दिहिस है टेंट वाला तो फिकर नॉट. 30 से 50 'रिश्तेदार क्षमता' वाले फोन भी जस्ट आने वाले हैं. जिन पर इतने लोग एक साथ खड़े होकर नाच सकेंगे. 3: विक्रांत याद है? वही नौसेना का जहाज जिस पर से लड़ाकू विमान उड़ान भरते थे. जिसको बजाज वालों ने खरीद लिया है और उसके लोहे से बाइक बना रहे हैं. तो इन स्मार्टफोन्स को हम उसी जहाज की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. जिस पर रनवे बनेगा और फाइटर जेट उड़ान भरेंगे. 4: सबसे ज्यादा आसानी धरना देने वालों को रहेगी. जंतर मंतर या रामलीला मैदान जाने का झंझट खत्म. कहीं भी अपना स्मार्टफोन बिछाकर निजी धरना स्थल तैयार कर सकते हैं. 5: दहेजलोभी लोग लड़की वालों से डबल बेड मांगना बंद करें. स्मार्टफोन मांगें. उससे और 'उस पर' सब काम हो जाएंगे. 6: बेघरों को सरकार पांच स्मार्टफोन देने का ऐलान करे. प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत. पांच में से चार फोन को खड़ा करके दीवारें और एक को उस पर स्लैब की तरह डाल लेंगे. 7:  किसी नेता अभिनेता या VIP की आमद हो और सड़कें खस्ताहाल. बेइज्जती का पूरा अंदेशा हो तो ये फोन काम करेगा. तत्काल सड़क बनाने के लिए ये स्मार्टफोन बिछा दो. पांच किलोमीटर रोड बनाने के लिए 7-8 फोन लगेंगे बस. 8: गांव में हैं तो ये फोन और काम के होते हैं. वहां अभी भी छप्पर वगैरह रखने का काम होता है. एक स्मार्टफोन तानकर दो छप्पर के बराबर काम आ सकता है. 9: जिनके पास गाय भैंसें ज्यादा हों और उन्हें बांधने की जगह न हो तो वो एक ऐसा फोन खरीद लें. जितने जानवर, जैसी जरूरत, उतना बड़ा फोन. उस पर चाहे जितने जानवर बांध दो. हां लेकिन उससे पहले स्क्रीन गार्ड पर ब्लेड से खरोंच मार लेना. चिकना होता है, जानवरों के खुर फिसल जाएंगे. 10: छोटे बड़े प्रोग्राम में मंच बनाने के लिए किसी से चिरौरी नहीं करनी पड़ेगी. न गांव में तखत मांगने पड़ेंगे. बस दो ठो फोन जोड़ कर उन पर चादर बिछाओ और जमा दो महफिल

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