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"रामायण प्रोपगेंडा है, इसमें BJP का पैसा लगा है"

चीनी मीडिया के मुताबिक, 'रामायण' भाजपा का पॉलिटिकल प्रोजेक्ट है. वरना इस पर कोई इतने पैसे क्यों खर्च करेगा?

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'रामायण' का 4000 करोड़ का बजट इसके दोनों पार्ट्स के लिए है.

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  • रामायण फिल्म को चीन में बड़ी रिलीज़ मिलने जा रही है और Huxiu मीडिया ने इसे भाजपा के राजनीतिक प्रोजेक्ट के रूप में प्रस्तुत करते हुए इस पर सवाल उठाए हैं।
  • चीन के Huxiu मीडिया ने रामायण फिल्म के फंडिंग और रिलीज़ समय पर सवाल उठाए हैं क्योंकि यह अयोध्या राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के तीन साल पूरे होने के साथ मेल खाता है।
  • Huxiu मीडिया ने इस फिल्म को केवल एक बॉलीवुड फिल्म नहीं बल्कि भारत के राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल से जुड़ा प्रोजेक्ट माना है जिसका impacto सांस्कृतिक अधिकार और पहचान पर हो सकता है।

एक तरफ Namit Malhotra चाइना में Ramayana को बड़ी रिलीज़ दिलवाने की तैयारी में हैं. दूसरी तरफ़, वहां की मीडिया ने इस फिल्म को एक प्रोपगेंडा और भाजपा का पॉलिटिकल प्रोजेक्ट बता दिया है. चाइना के मेजर टेक्नोलॉजी, बिज़नेस और इनोवेशन मीडिया प्लेटफॉर्म Huxiu ने 'रामायण' की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ये फिल्म ऐसे समय पर आ रही है, जब अयोध्या राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के तीन साल पूरे हो रहे हैं.

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हूशिउ का ये ओपिनियन पीस शुरुआत में चाइना के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म WeChat पर आया था. वहां इसे 'साउथ एशियन स्टडीज़ न्यूजलेटर' ने पब्लिश किया था. इसके ओरिजिनल राइटर अंकुश पार हैं, जबकि चीनी अनुवाद यांग जुनझे ने किया है. बाद में इसे अलग-अलग चाइनीज़ मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया जाने लगा. इस आर्टिकल में 4000 करोड़ वाली 'रामायण' को एक फिल्म नहीं, बल्कि भारत की मौजूदा राजनीतिक और सांस्कृतिक माहौल से जुड़ा प्रोजेक्ट कहा गया है.

फिल्म का बेसिक खाका देते हुए हूशिउ ने इसके बजट पर सवाल उठाया है. उन्होंने लिखा,

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"आखिर किसी मायथोलॉजिकल फिल्म पर कोई इतना पैसा क्यों खर्च करेगा? और इसके लिए यही समय क्यों चुना गया? ये वही दौर है जब अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद तीसरी दिवाली आने वाली है. साथ ही सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, राम को भारत के एक प्रमुख धार्मिक प्रतीक के रूप में पेश कर रही है. ये ऐसे सवाल नहीं, जो फिल्म के प्रमोशन के लिए पूछे जाएं. बल्कि ये ऐसे सवाल हैं, जिन्हें भारतीय सिनेमा, भारतीय राजनीति और देश के सामाजिक माहौल को समझने वाला हर व्यक्ति सोच सकता है."

रिपोर्ट के मुताबिक, 'रामायण' पर इतने पैसे सिर्फ बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के भरोसे नहीं लगाया जा सकता. इसके लिए इन्वेस्टर्स, कल्चरल इफेक्ट और पॉलिटिकल माहौल- तीनों का साथ होना जरूरी है. इसलिए हूशिउ ने इसे सिर्फ एक बॉलीवुड फिल्म नहीं, बल्कि एंटरटेनमेंट के रूप में पेश किया गया एक पॉलिटिकल प्रोजेक्ट बताया है. उनके अनुसार, इस मूवी के जरिए ये दिखाने की कोशिश की जा रही है कि 'रामायण' की सांस्कृतिक विरासत पर किसका हक है. साथ ही इससे भारत की पहचान को परिभाषित करने की कोशिश भी की जा रही है. 

वीडियो: यश और रणबीर कपूर आमने-सामने, 'रामायण' का सबसे बड़ा बैटल सीक्वेंस शूट हो रहा है

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