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'रामायण' के लंका दहन में होगा भारतीय सिनेमा इतिहास का सबसे बड़ा फायर सीक्वेंस!

मेकर्स को लंका दहन वाला ये सीन शूट करने में लगभग दो महीने का समय लगा है.

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'रामायण' का पहला पार्ट 06 नवंबर को वर्ल्डवाइड रिलीज़ होगा.

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  • रामायण टीम ने अभी तक पार्ट 1 जारी नहीं किया है, लेकिन सेकेंड पार्ट का लगभग 80% हिस्सा शूट कर लिया गया है जिसमें राम-रावण युद्ध और लंका दहन प्रमुख सीन हैं।
  • रामायण के फायर सीक्वेंस को शूट करने में दो महीने लग गए हैं, जिसमें VFX और SFX दोनों का इस्तेमाल हुआ, और इसे भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा फायर सीक्वेंस बताया जाता है।
  • इस बड़े फायर सीक्वेंस के लिए LPG गैस आधारित मशीनों का उपयोग किया गया है, जिन्हें ऑपरेटर्स पूरी तरह नियंत्रित करते हैं ताकि शूटिंग के दौरान कोई दुर्घटना ना हो।

अभी Ramayana पार्ट 1 रिलीज़ भी नहीं हुआ और मेकर्स ने सेकेंड पार्ट का 80 फीसदी हिस्सा शूट कर लिया है. इसमें राम-रावण युद्ध के अलावा एक और बड़ा सीन है, जिसका सबको बेसब्री से इंतज़ार होगा. ये सीन लंका दहन का है, जहां Sunny Deol, हनुमान बनकर पूरे नगर को जला देंगे. बॉलीवुड के वीपन एक्सपर्ट Rishabh Tyagi की मानें ये भारतीय सिनेमा इतिहास का सबसे बड़ा फायर सीक्वेंस है. इसका अंदाज़ा इस बात से लगा लीजिए कि मेकर्स को केवल इस सीन को शूट करने में लगभग 2 महीने का समय लगा है.

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आमतौर पर फिल्मों में दो तरह के इफ़ेक्ट्स का इस्तेमाल किया जाता है. एक VFX और दूसरा SFX. VFX यानी विजुअल इफ़ेक्ट्स को कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से बनाया जाता है. वहीं SFX माने स्पेशल इफ़ेक्ट्स प्रैक्टिकल तरीकों से बनता है. 'रामायण' में इन दोनों का इस्तेमाल हुआ है. फिल्म के जंगल, पहाड़ और ज्यादातर बैकग्राउंड VFX से बनाए गए. वहीं आग और राक्षसों के मूवमेंट SFX की देन हैं.

'रामायण' के प्रैक्टिकल एक्शन सीक्वेंस में कई हथियारों का इस्तेमाल हुआ है. उन्हें सप्लाई करने का काम वीपन एक्सपर्ट ऋषभ त्यागी ने किया. इससे पहले वो 'मैं वापस आऊंगा', 'जिगरा' और 'ताज़ा खबर' जैसे कई प्रोजेक्ट्स में काम कर चुके हैं. 'रामायण' में इस्तेमाल हुए फायर इक्विपमेंट्स पर बात करते हुए वो कहते हैं,

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"अभी हम रामायण पर काम कर रहे हैं. उसमें अब तक का सबसे बड़ा फायर सीक्वेंस है. भारतीय सिनेमा में इतना बड़ा फायर सीक्वेंस कभी नहीं शूट हुआ. जब हनुमान जी लंका जलाते हैं, तो उस दो महीने के सीन को हमने ही किया था. वो काफी हाइ-टेक काम था. उसमें मैंने बहुत-सी चीजें सीखीं और एक्सपीरियन्स भी की."

ये पूछे जाने पर कि इतना बड़ा फायर सीक्वेंस शूट कैसे होता है, ऋषभ ने पूरा प्रोसेस समझा दिया. उन्होंने बताया कि आग वाले सीन्स के लिए अलग तरह की मशीनें होती हैं. जैसे कहीं कोई बंगला या सेट जलाने वाला सीन है, तो वहां LPG गैस वाला अलग मॉडिफिकेशन पाइप लाइन बिछाया जाता है. फिर उस फायर मशीन को सेट पर अलग-अलग जगहों पर फिक्स कर दिया जाता है. किसी तरह की दुर्घटना न हो, इसलिए ऑपरेटर्स का मशीन पर पूरा कंट्रोल होता है. जैसे ही आग वाला सीन आता है, तो शॉट से पहले मशीन को ऑन कर दिया जाता है. इससे हर तरफ आग दिखने लगती है. फिर जैसे ही शॉट ओके होता है, मशीन को बंद कर दिया जाता है. इससे आग एकाएक बुझ जाती है. 

वीडियो: 'बाहुबली' की तर्ज पर 'रामायण' के मेकर्स ने सनी देओल के किरदार पर क्या गेम कर दिया?

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