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कोफी अन्नान, बान की मून याद हैं? उस लिस्ट में ये अगले हैं

ये हैं यूएन के नए सेक्रेटरी जनरल बने एंटोनियो गुतेरस. जो शशि थरूर नहीं कर पाए थे वो कर गए.

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फोटो - thelallantop
दुनिया में सबसे सही कोई पद है तो यूनाइटेड नेशंस यानी UN के सेक्रेटरी जनरल का. बस भाषण देना होता है. कुछ भी बोल दो सारी दुनिया छापने को तैयार रहती है. और छात्रों के लिए ये पद कंपटेटिव इग्जाम का एक क्वेश्चन भर होता है. बहरहाल अभी तक इसका आंसर होता था बान की मून. 2006 में ये बने थे. इनके मुकाबले अपने यहां के शशि थरूर थे. जब हम स्कूल में थे तब संयुक्त राष्ट्र महासचिव का मतलब होता था कोफी अन्नान. घाना के थे. पर अब से ये आंसर होगा एंटोनियो गुतेरस. जाहिर है उनको यूनाइटेड नेशंस का नया महासचिव बनाया गया है. एंटोनियो अब दुनिया भर के लिए काम करने वाली संस्था के हेड हो गए हैं पर उनका घर है पुर्तगाल. पुर्तगाल, अरे वास्कोडिगामा वाला देश. जानने वाली बात ये भी है कि एंटोनियो गुतेरस पुर्तगाल के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं. एंटोनियो 1 जनवरी 2017 से महासचिव के पोस्ट पर काम करना स्टार्ट करेंगे. यानी कि उसी दिन से जिस दिन अभी के महासचिव बान की-मून का कार्यकाल खत्म होगा. Secretary General-designate Antonio Guterres of Portugal (L) is greeted by U.N. Secretary General Ban Ki-moon at the U.N. headquarters in New York City, U.S. October 13, 2016. REUTERS/Brendan McDermid UN में 193 देश शामिल हैं. सारे देशों ने मिलकर बैठक की और सेक्रेटरी चुना एंटोनियो को. वैसे इस पद के लिए कुल मिलकर मैदान में 13 उम्मीदवार थे. ये भी जान लो 67 साल के एंटोनियो पिछले साल तक UN के रिफ्यूजी एजेंसी के चीफ रहे. अब पढ़ो कि एंटोनियो ने ऐसा क्या-क्या किया कि यहां तक पहुंच गए -

कारनेशन रेवोल्युशन ने बनाया नेता, फिर ऐसे हिट हुए कि रुके ही नहीं

इन्होंने 1974 में पुर्तगाल की सोशलिस्ट पार्टी ज्वाइन की. वह भी उस समय जब पुर्तगाल में सत्ता के खिलफ आंदोलन चल रहा था. काएटानो उस समय पुर्तगाल के प्रधानमंत्री थे. जिनका रवैया एकदम तानाशाही था. जो वो चाहते थे वही होता था, कानून उनके आगे पस्त था. पूरे पुर्तगाल में भभ्भड़ मचा हुआ था. जिससे तंग आकर लोगों ने काएटानो को कुर्सी से गिराने के लिए उसके खिलाफ आन्दोलन स्टार्ट कर दिया. यह आंदोलन आगे जा कर कारनेशन रेवोल्युशन के नाम से मशहूर हो गया. असल में कारनेशन एक लाल रंग का फूल है जो कि रेड रोज जैसा होता है. लाल कारनेशन को सोशलिज्म का सिंबल भी माना जाता है. और कारनेशन रेवोल्युशन की बारात भी लाल सलाम वाले सोशलिस्ट ने ही निकला था. इसी राजनीतिक उठा-पटक के बीच एंटोनियो सोशलिस्ट पार्टी के युवा चेहरा बन गए. एक साल उन्होंने एक मंत्रालय में दफ्तर का काम संभाला. और फिर सांसद बन गए. 16 साल की रगड़ाई के बाद पार्टी हेड और अपोजीशन के नेता बने. Nominated U.N. Secretary-General Antonio Guterres attends a news conference at Necessidades Palace in Lisbon, Portugal October 6, 2016. REUTERS/Rafael Marchante

कम्युनिस्ट आदमी पर देश को जरूरत हुई तो मार्केट को ओपन कर दिया

1995 के चुनाव में पार्टी ने बंपर जीत हासिल की. एंटोनियो बन गए पीएम. उन्होंने लीक से हटकर काम किया. भारत के कम्युनिस्टों की तरह पुरानी थ्योरी छाती से चिपका कंकाल न बन गए. देश की जरूरत लगी तो मार्केट को भी ओपन कर दिया. ओपन मार्केट बोले तो विदेशी कंपनियों को देश में आकर बिज़नेस करने देना है. एंटोनियो जनता की राय को भरपूर तवज्जो देते थे. कोई भी बड़ा सुधार करते तो उससे पहले पॉलिसी पर पब्लिक रेफरेंडम करवाते. इससे जनता को लगता कि नए नियम में उनकी पूछ भी है और जरूरत भी. इन सब चीजों की वजह से जनता में उनकी लोकप्रियता का करंट दौड़ने लगा. Nominated U.N. Secretary-General Antonio Guterres attends a news conference at Necessidades Palace in Lisbon, Portugal October 6, 2016. REUTERS/Rafael Marchante

लोकल म्युनिसिपल में खराब रही परफॉर्मेंस तो PM एंटोनियो ने इस्तीफा दे दिया

एंटोनियो 1999 में दोबारा पीएम चुने गए. चौंकिएगा नहीं पुर्तगाल में भी अमेरिका की तरह चार साल पर चुनाव होते हैं. हालांकि उनका दूसरा कार्यकाल उतना सफल नहीं रहा. सोशलिस्ट पार्टी के अंदर कलह होने लगा. और इकोनॉमी की खस्ता हालत के चलते एंटोनियो की पॉपुलैरिटी कम होती गई. दिसंबर 2001 में लोकल म्युनिसिपेलिटी के चुनावों में सोशलिस्ट पार्टी का परफॉरमेंस बहुत ही ख़राब रहा. जिसके बाद एंटोनियो ने पीएम के पोस्ट से इस्तीफा दे दिया. और कहा कि ‘मैं इस्तीफा दे रहा हूं, ताकि हमारा देश राजनीतिक दल-दल में धंसने से बच सके’. Nominated U.N. Secretary-General Antonio Guterres attends a news conference at Necessidades Palace in Lisbon, Portugal October 6, 2016. REUTERS/Rafael Marchante

पहले भी दुनिया में शांति बनाने को रहे हैं डेडिकेटेड

मई 2005 में एंटोनियो यूएन रिफ्यूजी काउंसिल (UNRC) के हाई कमिश्नर बनाए गए. इस एजेंसी में 10 हजार के लगभग लोग काम करते हैं. कुल 126 देशों में दफ्तर खुला है इसका. ये वही दौर है, जब पोस्ट तालिबान दौर में मिडल ईस्ट और अफ्रीका के कई देशों में गृह युद्ध और आतंकवाद रहा. जिसके चलते लाखों लोगों को घर छोड़ना पड़ा. फिर चाहे वह सूडान की लड़ाई हो या फिर हाल फिलहाल सीरिया की. एंटोनियो ने इन सबके लिए खूब एक्टिव होकर काम किया. 31 दिसंबर 2015 तक वह इस पोस्ट पर रहे. ड्यूरेशन के हिसाब से नंबर दो पर रहने वाले हाई कमिश्नर. U.N. Secretary-General-designate, Mr. Antonio Guterres of Portugal, addresses the U.N. General Assembly at U.N. headquarters in New York, U.S. October 13, 2016. REUTERS/Lucas Jackson

भारी मतों से मार ले गए सेक्रेटरी बनने की बाजी

एंटोनियो का नाम दुनिया भर में ढंग से सुनाई देना शुरू तब हुआ जब 5 अक्टूबर को 15 मेंबर्स वाले यूनाइटेड नेशंस सिक्यूरिटी कौंसिल ने एंटोनियो के नाम का ऐलान किया. इसके लिए सभी मेंबर्स के बीच गुप्त रूप से वोटिंग किया गया. जो कि के जिसमें 13 वोट एंटोनियो को मिले और 2 नो ऑपिनियन वोट किए गए. उनका कार्यकाल 1 जनवरी 2017 से स्टार्ट हो जाएगा. एंटोनियो की एक ख़ास बात यह भी है कि वो इंग्लिश,पुर्तगाली, फ्रेंच, स्पैनिश भाषाओं को फर्राटेदार बोल लेते हैं. एंटोनियो को यूएन के महासचिव बनाने की सबसे बड़ी वजह रही उनका यूएन में 10 साल से भी ज्यादा समय का अनुभव. जिसमें रिफ्यूजी संकट, मानवाधिकारों जैसे गंभीर मसले पर उनका बेहतरीन परफॉरमेंस रहा. आज जब यूएन को अमेरिका का रबड़ स्टाम्प माना जाने लगा है. एंटोनियो की सोशलिस्ट-लिबरल की छवि यूएन को एक अलग पहचान दिला सकती है.
 

ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है


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