Pankaj Tripathi. हिंदी सिनेमा के सबसे मज़बूत एक्टर्स में से एक. नई पीढ़ी के कई उभरते एक्टर कहते हैं कि वो पंकज के काम से, उनकी एक्टिंग स्टाइल से सीखते हैं. लेकिन पंकज त्रिपाठी के ज़ेहन पर किस एक्टर ने सबसे अमिट छाप छोड़ी थी? उन्होंने लल्लनटॉप के प्रोग्राम ‘गेस्ट इन द न्यूजरूम’ में इसका खुलासा किया. पंकज ने बताया,
कौन है वो एक्ट्रेस, जिन्हें पहली बार देखकर पंकज त्रिपाठी बहुत प्रभावित हुए और रो पड़े?
पंकज त्रिपाठी ने कक्षा बारहवीं में 'अंधा कुआं' नाम का नाटक देखा. उसके बाद वो पहले जैसे नहीं रहे. वहीं से एक्टिंग की नींव मज़बूत हुई.


कई लोग नहीं जानते होंगे कि परिणीता जैसवाल वो पहली एक्ट्रेस हैं, जिन्हें देखकर मैं प्रभावित हुआ था. ‘अरे यार अभिनय ऐसा होता है’. मुझे रोना आ गया था. मैं वैसे रोने में बहुत माहिर हूं. कभी भी, कहीं भी रो सकता हूं. हर किसी को रोना भी चाहिए. ये अच्छी बात है. आपकी करुणा और दया बची रहती है. नासिर उस्ताद हमारी बेकरी के शेफ थे. मिर्ज़ापुर के थे. वो हमें केक बनाना सिखाते थे. आगे जाकर मैंने ‘मिर्ज़ापुर’ नाम की सीरीज़ भी की.
पंकज ने आगे कहा कि वो गांव से किताबें पढ़कर आए थे. उन्हें ये मालूम नहीं था कि अभिनय सीखने की चीज़ है. आगे जोड़ा,
मैं बेसिकली लोक कलाकार हूं जिसने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में आकर थोड़ी ट्रेनिंग कर ली. पटना में सौभाग्यवश पढ़ाई का बड़ा माहौल था. एक गांव का लड़का जो लगभग लोक कलाकार जैसा था, जो नाच देखता था. शादियों में बैंड बाजा बारात देखने जाते थे. हमारे बचपन में टीवी नहीं था. मैंने 1997 में पहली बार टीवी देखा. हमारे वहां नाच, राम विवाह, शिव विवाह जैसे लोक कार्यक्रम ही चलते थे.
पंकज त्रिपाठी अपने लिए कहते हैं कि उस लड़के को आगे चलकर पता चला कि अभिनय पर किताबें होती हैं. आपको स्टेनिसलेविस्की (कॉन्टेंटिन) का मेथड पढ़ना है. रियलिज़्म पढ़ना है. क्लासिकल इंडियन ड्रामा पढ़ना है. मॉडर्न इंडियन ड्रामा पढ़ना है. मोकेश राकेश जो लिखकर गए हैं, वो भी पढिए. उन्होंने बताया कि NSD के शुरुआती दिनों में लगता था कि वो पढ़ाई से भागकर यहां आए थे. ऊपर से ये लोग पढ़ने को ही बोल रहे हैं. पंकज ने पढ़ाई की ज़रूरत के साथ-साथ ट्रेनिंग से होने वाला नुकसान भी गिनाया. उनके मुताबिक ट्रेनिंग करने से एक्टर अपनी इम्पल्स खोने लगता है.


















