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फ़िल्म रिव्यू - The Elephant Whisperers

इंडिया के लिए ऑस्कर अवॉर्ड ले आई है ये फिल्म.

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The Elephant Whisperers एक प्योर फिल्म है. बिना लाग-लपेट के बताई कहानी.

एक आदमी टिन से बने शेड की ओर अपने कदम बढ़ा रहा है. उसका दरवाज़ा खोलता है. अंधेरे को चीरती हुई रोशनी की एक पतली किरण शेड में दाखिल होती है. बोम्मिन नाम का ये आदमी आवाज़ देता है,

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मेरे बच्चे, क्या तुम्हें नींद आ गई थी? यहां आओ, मेरे पास आओ. मेरे प्यारे रघु, मेरे पास आओ. 

रघु बाहर आता है. बोम्मिन अपने इस बच्चे को पहले तो लाड़ करता है. दोनों बाहर आते हैं. बच्चे बिना परवाह किए कुछ भी खा लेते हैं. रघु ने भी मौज में कुछ खा लिया होगा. इसलिए बोम्मिन उसकी जीभ साफ करने लगता है. उसे नहलाता-धुलाता है. शरीद पर जमे गाढ़े मैल को रगड़-रगड़कर छुड़ाने की कोशिश कर रहा है. फिर दोनों बाप-बेटे साथ समय बिताने के लिए फुटबॉल खेलते हैं. रघु अपने पिता बोम्मिन को दौड़ा रहा है. पास बैठी मां बेली बचपने पर हंस रही है. मां-बाप उसे खाना खिलाते हैं. हाथ से चावल-नारियल के गोले बनाकर. लेकिन रघु मूड में नहीं. उसे हल्की चपत मारने की धमकी भी मिलती है. पर हाल जस-का-तस. ज्यों ही मुंह में निवाले की एंट्री हो, त्यों ही उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए. बारी-बारी बोम्मिन और बेली कोशिश करते हैं. थककर फिर वही खिलाते हैं जो उनके बच्चे का खाने का मन है.  

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The Elephant Whisperers का इतना हिस्सा सुनकर लगे कि ये सिर्फ किसी बोम्मिन-बेली के परिवार की कहानी नहीं है. थोड़ा ज़्यादा, थोड़ा कम, लेकिन ये हम सभी का बचपन है. ये हमारी कहानी है. हमारी दुनिया की कहानी. 40 मिनट की डॉक्यूमेंट्री देखते वक्त अधिकांश समय मेरे चेहरे पर से मुस्कान नहीं हट रही थी. इस बात का हिसाब तक नहीं रख पाया कि ये मुस्कान आई कब. रघु की मासूमियत, बोम्मिन और बेली का प्यार, उनका भरोसा, ये सब धीरे-धीरे आपके दिल में उतरते जाते हैं. 

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फिल्म के एक सीन में बोम्मिन और उनका बच्चा रघु. 

अब अगर मैं यहां ज़िक्र करूं कि रघु इंसानी बच्चा नहीं, बल्कि एक हाथी का बच्चा है. तो क्या आपके नज़रिए में कुछ बदलाव आएगा? बोम्मिन और बेली के लिए तो ये बात मायने ही नहीं रखती. रघु की पूंछ आवारा कुत्ते खा गए. उसकी मां बिजली का झटका लगने से गुज़र गई. उसे आसरा चाहिए था. माता-पिता चाहिए थे. बोम्मिन और बेली उसकी ये सबसे मूलभूत ज़रूरत पूरी करते हैं. दोनों एक एलीफेंट कैम्प में काम करते हैं. जहां अनाथ या ज़रूरतमंद हाथियों को लाया जाता. बोम्मिन-बेली और इनके जैसे अनेकों लोग वहां हाथियों की देखभाल करते हैं. बेली तमिलनाडु की पहली महिला हैं, जिन्हें एलिफेंट केयरटेकर बनाया गया. 

The Elephant Whisperers एक प्योर फिल्म है. बिना लाग-लपेट के बताई कहानी. ऐसा कहने की मेरे पास दो वजहें हैं. पहला तो इस फिल्म की नींव वो बातें हैं, जिनके आधार पर ये दुनिया अब तक टिकी हुई है. प्रेम और भरोसा. बोम्मिन और बेली को खुद पर और एक-दूसरे पर भरोसा है. कि वो रघु को पाल सकते हैं. जिस प्यार और ममता का हकदार एक बच्चा होता है, वो उनके दिलों में मौजूद है. एक बड़े हाथी ने एक बार अपना दांत बोम्मिन के शरीर में घोंप दिया था. बस इस बात का इतना ही ज़िक्र मिलता है. कभी ये नहीं दिखता कि एक हाथी ने मेरे साथ ऐसा किया. फिर मैं हाथियों को कैसे प्यार कर सकता हूं. खुद को सभ्य कहने वाले हम इंसानों के लिए ये एक सीख है. 

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बेली एलिफेंट केयरटेकर नहीं थीं. वो बताती हैं कि एक बार रघु आकर उनसे लिपट गया. दिल का एक टुकड़ा पिघला. उस दिन के बाद से आज तक वो रघु को अपने बच्चे की तरह ही मानती हैं. ये दोनों वो लोग हैं जिन्होंने जंगल, ज़मीन और ज़माने के हाथों अपना बहुत कुछ खोया है. मगर फिर भी सबसे बेसिक बात नहीं भूले. अपने आसपास की दुनिया से प्यार करना नहीं भूले. भरोसा दिखाना और जताना नहीं भूले. इस शॉर्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म को बनाया है कार्तिकी गोंज़ाल्वेस ने. उन्होंने गरिमा पुरा पटियालवी के साथ मिलकर स्क्रिप्ट भी डेवलप की. 2017 में उन्हें ये कहानी पता चली थी. बोम्मिन-बेली और रघु की दुनिया को करीब से जानने के लिए उनके साथ समय बिताया. ऐसा लगता है कि इस कहानी का जो हिस्सा कार्तिकी के दिल तक पहुंचा, उसे उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ दिखाने की कोशिश की. 

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फिल्म को नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं. 

कार्तिकी ने करण थपलियाल, आनंद बंसल और क्रिश मखीजा के साथ मिलकर फिल्म की सिनेमैटोग्राफी का भी ज़िम्मा संभाला है. रघु की दुनिया को उसकी पूरी रॉनेस के साथ शूट किया गया है. इस डाक्यूमेंट्री के साथ मुझे बस एक छोटी शिकायत रही. कुछ जगह पर नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए स्क्रीन पर आते टेक्स्ट का सहारा लिया गया. शायद समय की बंदिश की वजह से ऐसा हुआ हो. लेकिन पानी की तरह बहती कहानी में ये टेक्स्ट खलल डालने का काम करता है. 

मैं अपने ऑफिस के ग्राउंड फ्लोर वाले हिस्से में बैठकर ये रिव्यू लिख रहा था. उंगलियों ने कीबोर्ड पर कुछ हरकत की थी. कि तभी ऊपर से एक पक्षी धम से आकर ज़मीन पर आ पड़ा. उसके शरीर से प्राणों के निशान गायब हो चुके थे. आसमान के जिस रास्ते से नीचे आया था, वहां से उतरते हुए उसके पंखों की एक लड़ी ज़मीन पर अपना ठिकाना खोज रही थी. जिस दुनिया में निश्चित कुछ भी नहीं. वहां सिर्फ प्रेम बचेगा. बिना शर्तों के किया गया प्रेम. उस किस्म का प्रेम जो बोम्मिन, बेली और रघु के बीच देखने को मिला. The Elephant Whisperers नेटफ्लिक्स पर देखी जा सकती है. 

वीडियो: आरवम: ऑस्कर में पहुंची 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' की असल कहानी क्या है?

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