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Cannes में दिखेगी कमाल की फ़िल्म, डायरेक्टर को पड़ेंगे कोड़े और आठ साल जेल

ईरानी सिनेमा के जाने माने डायरेक्टर Mohammad Rasoulof की नई फ़िल्म The Seed of the Sacred Fig फ्रांस के Cannes Film Festival में स्क्रीनिंग के लिए चुनी गई है. ईरानी स्टेट ने फ़िल्म को रोकने के लिए डायरेक्टर को कोड़े मारने और 8 साल जेल की सजा सुनाई है.

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मोहम्मद रसूल फरवरी 2023 से सरकार के आदेश पर नज़रबंद थे.

"Taste of Cherry", "The Color of Paradise", "The Apple" और "Baran" जैसी न जाने कितनी ही जादुई फ़िल्में World cinema को देने वाला ईरान. दर्शक रश्क करते हैं कि वाह Iranian cinema कितना महान है, जिसकी व्याख्या यूं भी होती है कि ईरान अपने फिल्ममेकर्स के लिए भी कितना उर्वर और सपोर्टिव है. लेकिन ये ख़बर दर्शकों की उस राय को तोड़ देगी.  ईरान में एक जाने-माने फिल्ममेकर हैं मोहम्मद रसूलोफ (Mohammad Rasoulof). उनकी फ़िल्में Cannes, Berlin जैसे film festivals में सलेक्ट होती रहती हैं. उनके विषय और क्राफ्ट तारीफ के काबिल होते हैं. जैसे कि उनकी नई फ़िल्म "द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग" (The Seed of the Sacred Fig) जिसे Cannes Film Festival में प्रीमियर के लिए चुना गया है. वहां ये 24 मई, 2024 को दिखाई जाएगी.

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लेकिन ईरानी स्टेट नहीं चाहता कि ये फ़िल्म दिखाई जाए. तो रसूलोफ पर दबाव डालने के लिए उन्हें सजा सुनाई गई है. ईरान की एक अदालत ने रसूलोफ को आठ साल जेल (व्यावहारिक रूप से पांच साल) की सजा दी है. साथ में जुर्माना भी लगाया है. उन्हें कोड़े मारने और उनकी संपत्ति ज़ब्त करने के भी आदेश दिए हैं. इसकी जानकारी रसूलोफ के वकील ने एसोसिएटेड प्रेस को दी है.

फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री की वजह से हुई सज़ा

रसूलोफ के वकील बाबक पाकनिया हैं, जो एक मानवाधिकार वकील हैं. उन्होंने "एक्स" (X) पर लिखा कि अपील कोर्ट में उनकी सजा बरकरार रखी गई है. रसूलोफ की सजा का मुख्य कारण उनके विचारों, बयानों, फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रीज़ को बताया जा रहा है. अदालत ने कहा है कि उनकी फिल्में ईरान की सुरक्षा के खिलाफ एक आपराधिक साजिश जैसी हैं.

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ईरानी सरकार ने कान फिल्म फेस्टिवल से "द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग" को वापस लेने के लिए रसूलोफ और उनकी टीम पर ख़ूब दबाव डाला है. द गार्जियन समेत कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा कहा गया है. ईरानी स्टेट की पुलिस ने भी मेकर्स को ख़ूब परेशान किया है. कुछ वक्त पहले इस फ़िल्म के एक्टर्स और क्रिएटिव लोगों से घंटों पूछताछ की गई. वे कान फ़िल्म फेस्ट में हिस्सा न ले सकें इसलिए उनके पासपोर्ट वगैरह ज़ब्त कर लिए गए, और देश छोड़ने से प्रतिबंधित कर दिया. अभी संभवतः रसूलोफ शायद कहीं छुपे हुए हैं. और तमाम जोर ज़बरदस्ती के बावजूद उनकी फिल्म का प्रीमियर होना तय लग रहा है.

"द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग" का प्लॉट

आख़िर ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड और स्टेट के अन्य अंग "द सीड ऑफ द सेक्रेड फिग" से क्यों डरे हुए हैं? वजह है फ़िल्म का प्लॉट. ये फ़िल्म रेवोल्यूशनरी गार्ड के एक जज के बारे में बताई जा रही है जो तेहरान में रहता है. देश में हाल के वर्षों में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए हैं. उससे जो परेशानी पैदा हुई है, वो उससे डील कर रहा है. फिर ऐसा होता है कि उसकी गन गुम जाती है और वो पागल सा होने लगता है.

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पिछले साल भी उन्हें कान नहीं जाने दिया गया था

इससे पहले भी रसूलोफ ने स्टेट की आलोचना करने वाली फ़िल्में बनाई हैं और उन्हें बार-बार सजा दी गई है. उनके विदेशी फिल्म फेस्टिवल्स में जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है. 2017 में "अ मैन ऑफ इंटेग्रिटी" (A Man of Integrity) कान फेस्ट में अं सर्तेन रगाद (Un Certain Regard) जीती. लेकिन उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया. जाने नहीं दिया गया. 2020 में उनकी फ़िल्म "देयर इज़ नो ईविल" (There Is No Evil) बर्लिन में बहुत प्रतिष्ठित गोल्डन बियर (Golden Bear) अवॉर्ड जीती. तब भी उन्हें ईरानी अधिकारियों ने बर्लिन जाने नहीं दिया था. उनकी तरफ से उनकी बेटी बरान रसूलोफ ने ये पुरस्कार लिया था. बीते साल रसूलोफ को कान फेस्ट की अं सर्तेन रगाद श्रेणी का ज्यूरी मेंबर चुना गया. लेकिन उन्हें नहीं जाने दिया गया.

वीडियो: मैटिनी शो: कान फिल्म फेस्टिवल की सबसे मारक स्पीच कौन सी हैं?

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