बेंजामिन फ्रैंकलिन, देवानंद, जोहरा सहगल... पता है इनमें और इन जैसे कई महान लोगों में क्या कॉमन है. ये सारे अपने पसंदीदा काम करते-करते मर जाना चाहते थे. फ्रैंकलिन के कोट्स इसकी गवाही देते हैं. देवानंद और जोहरा कई इंटरव्यूज में ये बयां कर चुके थे.
वो मौत, जिसकी हसरत हर महान और क्रिएटिव आदमी को होती है
हजारों ख्वाहिशें ऐसी...


अब 'If work is worship then I'm an atheist' वाली बकैती छानने वाली जनता को समझाना जरा मुश्किल है. लेकिन, इससे भी मुश्किल है अपने काम से अपनी जान जितनी मोहब्बत करना. शायद जान से भी ज्यादा. और ये किया नहीं जाता है, होता है. ठीक कवि होने की तरह. जो या तो आप होते हैं या नहीं होते हैं.
तो आइए, आज आपको मिलवाते हैं दुनियाभर के कुछ ऐसे महान लोगों में, जिन्होंने अपनी जिंदगी अपने काम के नाम कर दी. ये लोग इतने 'बाबा' हो चुके थे कि मरे भी, तो अपना काम करते हुए. बड़े लोग थे.
#1. कल्पना चावला

नाम तो सुना ही होगा. और ये भी जानते होंगे कि कल्पना चावला हिंदुस्तान की पहली महिला एस्ट्रोनॉट थी. पर क्या आप ये जानते हैं कि स्कूल के दिनों में वो अपने क्लास की इकलौती लड़की थीं. पचास साल पहले का ही वक्त याद कर लीजिए. किसी ने कल्पना भी की थी कि हमारी एक बेटी अंतरिक्ष तक जाएगी.
ये कल्पना का जुनून ही था, जिसने उन्हें हरियाणा से अमेरिका तक पहुंचा दिया. और जुनून ऐसा कि आखिरी सांस भी कोलंबिया अंतरिक्ष यान में ही ली. 1 फरवरी, 2003 को जब कोलंबिया अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हो गया था, तभी उसमें कुछ खराबी आ गई. हॉट गैसों की वजह से यान कई टुकड़ों में बंट गया और कल्पना अपने सात साथियों के साथ अपने कहे गए शब्दों को सच कर गईं.
उन्होंने कहा था, 'मैं अंतरिक्ष के लिए ही बनी हूं. हर पल अंतरिक्ष में ही बिताया है और अंतरिक्ष के लिए ही मरूंगी.'
#2. मार्था मैनफ़ील्ड

मोहतरमा एक्ट्रेस थीं. हॉलीवुड के मूक दौर में. साइलेंट फिल्म 'दी वॉरेंस ऑफ़ वर्जीनिया' में अगाथा वॉरेन का किरदार निभाने वाली मार्था मैनफ़ील्ड की कहानी भी काम को समर्पित, लेकिन दर्दनाक है. 'दी वॉरेंस...' के सीक्वल की शूटिंग के दौरान ही उनकी मौत हो गई थी. ये एक पीरियड ड्रामा फिल्म थी.
फिल्म की शूटिंग के दौरान वो जल्दी आग पकड़ने वाले कपड़े की ड्रेस पहने बैठी थीं. एक सीन शूट होने के बाद जब वो आराम करने के लिए कार में बैठीं, तो राह चलते एक आदमी ने सिगरेट जलाने के बाद माचिस की तीली मार्था की तरफ फेंक दी. कपड़ा इतना ज्वलनशील था कि पलभर में ही उसने आग पकड़ ली और मार्था बुरी तरह झुलस गईं. मार्था इतनी बुरी तरह जल गई थीं कि अगले ही दिन हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई थी.
#3. इंदिरा गांधी

देश की पहली और अब तक की इकलौती महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी. इनकी हत्या के बारे में सभी जानते हैं. ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद खुद इंदिरा को भी ये आभास हो गया था कि उनकी जान खतरे में है. उन पर कभी भी हमला हो सकता था. सहयोगियों के बार-बार सचेत करने के बावजूद उन्होंने बोल्ड स्टेप लेते हुए अपने सिख गार्ड्स को नहीं हटाया. उनका मानना था कि ऐसा करना सिख समुदाय का अपमान करना होगा.
पर आखिर में वही हुआ, जिसका सबको डर था. 31 अक्टूबर, 1984 को जब वो बीबीसी को इंटरव्यू देने के लिए घर से निकली थीं, तभी उनके पर्सनल बॉडीगार्ड्स बेअंत सिंह और सतवंत सिंह ने गोलियों से उन्हें छलनी कर दिया. इंटरव्यू की वजह से उस दिन इंदिरा बड़े मन से तैयार हुई थीं. वो उनका आखिरी दिन था.
#4. मिक्लॉस फेहर

मौत से पहले मुस्कुराते हुए चेहरे सिर्फ फिल्मों में देखने को मिलते हैं, लेकिन हंगेरियन फुटबॉलर मिक्लॉस फेहर के साथी असल जिंदगी में ऐसे पल के गवाह बने. 25 जनवरी, 2004 को गिमरीस में फेहर की टीम बेन्फिका और विटोरिया डि गिमरीज के बीच मैच हो रहा था. फेहर स्ट्राइकर थे. रेफरी के येलो कार्ड दिखाने पर वो मुस्कुराए और फिर अचानक उठे दर्द की वजह से उनका चेहरा पीला पड़ गया. वो मैदान पर ही निढाल हो गए.
https://www.youtube.com/watch?v=KplarFrNjf0दोनों टीमों के खिलाड़ी उनकी तरफ भागे. वो इस बात से अंजान थे कि फेहर के चेहरे की वो मुस्कान उनकी आखिरी मुस्कान है. फेहर के दर्द की वजह हार्ट स्ट्रोक था. उन्हें आज भी 'दि प्लेयर हू स्माइल्ड बिफोर डाइंग' से याद किया जाता है.
#5. रीटॉन सेन्ना

तेज रफ्तार से गाड़ी चलाना या देखना किसे पसंद नहीं होता. रफ्तार से सब प्यार करते हैं. F1 रेसिंग की गाड़ियां देखकर हर किसी में सिहरन दौड़ जाती है कि मक्खन जैसी खाली सड़क पर ऐसे पॉवरफुल इंजन वाली गाड़ी दौड़े तो कैसी लगेगी. और इच्छा दौड़ाने की है तो उसका कोई मुकाबला नहीं. लेकिन ये हुनर जानलेवा भी है.
F1 रेसिंग में तीन बार वर्ल्ड चैंपियन रह चुके रीटॉन की मौत रेस के दौरान कंक्रीट की दीवार से टकराने की वजह से हुई थी. 1 मई, 1994 को आखिरी बार लोगों ने उन्हें ट्रैक पर देखा था. वो खुश थे और उसी दिन रेस में उनकी मौत हो गई थी. रीटॉन और उनके दो दिन पहले एक दूसरे हादसे का शिकार हुए रोनाल्ड रत्जेन्बर के एक्सीडेंट F1 रेसिंग के 12 साल के इतिहास में सबसे खतरनाक एक्सिडेंट थे.
#6. रमन लांबा

रमन लांबा इंडियन क्रिकेटर थे. उन्हें उनके कॉन्फिडेंस और खेल को लेकर उनके गर्व के लिए याद किया जाता है. रमन न तो कभी अपनी प्रफेशनल जिंदगी में खुशनसीब रहे और न पर्सनल जिंदगी में. उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर खेलने के बहुत मौके मिले, लेकिन खेल के अपने बेलौस अंदाज की वजह से वो उन मौकों का बहुत फायदा नहीं उठा सके. वो अग्रेसिव स्ट्रोक प्लेयर थे. बल्लेबाज के पास खड़े होकर बिना हेल्मेट के फील्डिंग उनकी आदत में था और इसी आदत ने उनकी जान ले ली.
वो 20 फरवरी, 1998 था. ढाका प्रीमियर लीग चल रही थी. बंगबंधु स्टेडियम में अबहानी क्रीड़ा चक्र का मैच था मोहम्मदन स्पोर्टिंग क्लब के खिलाफ़. रमन मजाक में खुद को 'ढाका का डॉन' कहते थे. कप्तान ने उन्हें बल्लेबाज से एक कदम दूर फॉरवर्ड शॉर्ट लेग पर बुलाया. जिस ओवर में उन्हें बुलाया गया, उसकी तीन गेंदें फेंकी जा चुकी थीं. चौथी गेंद पर बैट्समैन ने पुल शॉट खेला, जो सीधे रमन के सिर पर लगा. शॉट इतनी जोर था कि सिर पर लगने के बाद गेंद सीधे कीपर के हाथ में चली गई. तीन दिन चले इलाज के बाद 23 फरवरी को रमन की ढाका में मौत हो गई थी.
#7. राजीव गांधी

21 मई, 1991 की तारीख सिर्फ गांधी परिवार के लिए ही नहीं, पूरे देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण तारीख है. इस दिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या हुई थी, जिसकी साजिश से कोई अनजान नहीं है. जीत की उम्मीद और चेहरे पर मुस्कान लिए राजीव उस दिन श्रीपेरंबदुर पहुंचे थे. लोगों ने ढेर सारे प्यार और सम्मान के साथ स्वागत किया. कड़ी सिक्यॉरिटी थी, लेकिन उस रात मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल नहीं हुआ.
जिस रेड कारपेट पर केवल 23 लोगों को रहना था, उस पर न जाने कितनों की भीड़ लगी थी. उसी भीड़ में थी मानव बम धनु. धनु माला पहनाने के बहाने राजीव के करीब जाने की कोशिश कर रही थी. उसे ऐसा करते देख सब-इंस्पेक्टर अनुसूया ने उसे रोकने की भी कोशिश की, लेकिन राजीव गांधी ने अनुसूया को मना कर दिया. वो जनता को अपने करीब आने देना चाहते थे.
राजीव ने कभी लोगों से खुलकर मिलने में हिचक नहीं दिखाई. उनके इसी बेबाकपन ने उनके खिलाफ हुई साजिश को कामयाब कर दिया. धनु जिस मौके की तलाश में थी, वो उसे मिल चुका था. उसने राजीव को माला पहनाई, पैर छूने के लिए नीचे झुकी और कमर पर लगे बम का बटन दबा दिया. अगले पल वहां सिर्फ चीथड़े थे.
इन लोगों के बारे में तो आपने पढ़ लिया. अब अगर आप भी ऐसे मशहूर लोगों को जानते हों, जो अपना पसंदीदा काम करते-करते ही यहां से रुख्सत हो गए, तो कमेंट करके बताइए.
(आस्था ने यह स्टोरी की है जो दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही हैं.)
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