'एक हीरो उतना ही मज़बूत हो सकता है जितना एक विलेन'
सलमान हीरो तभी तक रह सकते हैं जब तक प्रकाश राज विलेन रहेंगे
हमारे फेवरेट विलेन का बड्डे है आज.
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दबंग 2 के एक दृश्य में प्रकाश राज.
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हमारे यहां लंबे वक्त तक सिनेमा का विलेन एक अलग ही जीव रहा है. उसके बुरा आदमी होने के पीछे कोई खास वजह नहीं होती थी. और बुरा होने के साथ-साथ वो कुछ हटकर भी होता था. कई बार उसका उठना-बैठना तक अलग होता था, वो हंसने की जगह जबड़ा फाड़ कर अट्टहास करता था. ये सब हीरो को एक बेहतर कॉन्ट्रास्ट देते थे. लेकिन वक्त बदलने के साथ-साथ हीरो भी बदले और विलेन भी. फिर सबकुछ ग्रे होने लगा. फिल्म में कैरेक्टर होने लगे, 'हीरो' और 'विलेन' की दूरी घट सी गई. ये एक तरह से हमारे सिनेमा का मेच्योर होना था, लेकिन हम में से कई लोगों ने उन फिल्मों को खूब मिस किया जिसमें हीरो हीरो होता था और विलेन विलेन. फिर हमारे मसीहा बनकर आए सलमान. उन्होंने दोबारा हीरो बनने का चलन शुरू किया.
लेकिन अब कोई ऐसा विलेन बचा नहीं था जिसको पीटकर हीरो वाहवाही लूट सके. तो ऐसे में सामने आए प्रकाश राज. साउथ का वो एक्टर जो आज शर्तिया तौर पर सबका फेवरेट विलेन है. पब्लिक को फिल्म का हीरो सलमान चाहिए तो फिर विलेन प्रकाश राज को होना पड़ता है. तभी मज़ा आता है. ऐसा विलेन, जो अपने हाव-भाव से डराता कम है, हंसाता ज़्यादा है. आज प्रकाश का बड्डे है. इस मौके पर हम प्रकाश के बारे में ऐसी कुछ बाते ढूंढ लाए हैं, जो आपके जानने लायक हैंः

प्रकाश राज.
# हम में से ज़्यादातर ने प्रकाश राज को तब से जानना शुरू किया जब हमने उन्हें सलमान की 'वांटेड' में देखा. लेकिन इस से पहले उन्होंने एक और बॉलीवुड फिल्म में काम किया था. वो फिल्म थी 2002 में आई शाहरुख की 'शक्ती द पावर.' इसमें प्रकाश राज ने एक शार्प शूटर का रोल किया था. ये एक छोटा सा रोल था, पर प्रकाश तब भी बेहद अनुभवी कलाकार थे. प्रकाश ने 1990 से फिल्मों में काम शुरू कर दिया था. उनकी पहली फिल्म थी कन्नड़ भाषा में बनी 'मिथिलेय सीथेयरू.'
# पॉलिटक्स एक इंसान की ज़िंदगी को किस हद तक बदल सकती है, इसकी एक मिसाल प्रकाश की ज़िंदगी में भी मिलती है. प्रकाश का असल नाम था प्रकाश राय. राय सरनेम से साउथ में लोग कर्नाटक के एक खास समाज और एरिया का अनुमान लगा लेते हैं. अब ऐसा है कि कर्नाटक और तमिलनाडु में कावेरी के पानी को लेकर भसड़ होती रहती है. लेकिन कलाकार को तो काम दोनों राज्यों में करना होता है. इसलिए प्रकाश को सलाह दी गई कि ऐसा नाम रख लो जिसकी अपील नेशनल लेवल की हो. सलाह देने वाले ने ही नया नाम भी रख दिया - प्रकाश राज. ये काम की सलाह देने वाले थे तमिल फिल्मों के यश चोपड़ा - रजनीकांत और कमल हासन को लॉन्च करने वाले के बालाचंदर.

के बालाचंदर
# प्रकाश का फिल्मों में जाना उनके परिवार में अकेली फिल्मी घटना नहीं थी. प्रकाश के माता-पिता जिस तरह मिले वो भी फिल्मी ही था. प्रकाश की मां बैंगलोर के एक अस्पताल में नर्स थी. वहां एडमिट एक पेशेंट से उन्हें प्यार हो गया और उन्होंने उनके साथ घर बसा लिया. हालांकि ये शादी काफी मुश्किलों से गुज़री और प्रकाश को उनकी मां ने अकेले ही बड़ा किया. प्रकाश के भाई प्रसाद राज भी एक एक्टर हैं.
# हमारे यहां अपने टीचर की बात एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देने का चलन है. लेकिन कभी-कभी उनकी कोई एक बात ज़िंदगी पलट देती है. प्रकाश के साथ भी ऐसा ही हुआ. कॉलेज में उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था. एक दिन मास्साब ने टोक दिया कि यहां तुम्हारा वक्त बरबाद हो रहा है. उसी दिन कॉलेज से निकलकर रवींद्र कलाक्षेत्र चले गए. रवींद्र कलाक्षेत्र का बैंगलोर में वही दर्जा है जो दिल्ली के श्रीराम थिएटर का है. यहीं पर थिएटर में स्ट्रगल करते हुए इन्हें कन्नड़ टीवी और फिल्मों में रोल मिलने लगे.
# पहला ब्रेक मिलने के लगभग चार साल तक प्रकाश कन्नड़ फिल्में करते रहे. लेकिन उनके करियर ने रफ्तार नहीं पकड़ी. वे असल लाइमलाइट में आए के बालचंदर की तमिल फिल्म 'ड्यूएट' से, जो 1994 में आई थी. के बालचंदर ने ही रजनीकांत और कमल हासन को भी लॉन्च किया था. इसके बाद मणि रत्नम की नज़र प्रकाश पर पड़ी. फिर इनकी गाड़ी चल निकली. प्रकाश ने हमेशा बालचंदर का आभार माना. अपनी प्रॉडक्शन कंपनी बनाई तो उसका नाम ड्यूएट फिल्म्स रखा.

ड्यूएट का पोस्टर (डीवीडी कवर)
# किसी अभिनेता का दो से तीन भाषाओं की फिल्मों में काम करना आम बात है. लेकिन प्रकाश कुल पांच भाषाओं में काम कर लेते हैं - कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी. करियर की शुरुआत में उन्होंने एक अंग्रेज़ी फिल्म भी की थी. तो जितनी भाषाओं में लोगों की फिल्में डब नहीं होती, उतने में तो प्रकाश काम कर लेते हैं. और इतनी अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ के प्रोजेक्ट में होने के बावजूद प्रकाश का कोई मैनेजर नहीं है.
# प्रकाश गले तक सिनेमा में डूबे हुए हैं. दूसरों की फिल्मों में एक्टिंग करते हैं, जिसके लिए उन्हें दो बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है. इसके अलावा खुद फिल्में डायरेक्ट भी करते हैं. प्रोड्यूसर के हैसियत से कन्नड़ फिल्म पुताक्कना हाइवे के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं. इसके अलावा फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन का काम भी करते हैं.
# फिल्मों में काम करने के अलावा प्रकाश सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने तेलंगाना में एक गांव गोद लिया हुआ है. हाल ही में तमिलनाडु में पड़े सूखे के चलते जब वहां के किसान प्रदर्शन करने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे, तो प्रकाश वहां भी गए थे.
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लेकिन अब कोई ऐसा विलेन बचा नहीं था जिसको पीटकर हीरो वाहवाही लूट सके. तो ऐसे में सामने आए प्रकाश राज. साउथ का वो एक्टर जो आज शर्तिया तौर पर सबका फेवरेट विलेन है. पब्लिक को फिल्म का हीरो सलमान चाहिए तो फिर विलेन प्रकाश राज को होना पड़ता है. तभी मज़ा आता है. ऐसा विलेन, जो अपने हाव-भाव से डराता कम है, हंसाता ज़्यादा है. आज प्रकाश का बड्डे है. इस मौके पर हम प्रकाश के बारे में ऐसी कुछ बाते ढूंढ लाए हैं, जो आपके जानने लायक हैंः

प्रकाश राज.
# हम में से ज़्यादातर ने प्रकाश राज को तब से जानना शुरू किया जब हमने उन्हें सलमान की 'वांटेड' में देखा. लेकिन इस से पहले उन्होंने एक और बॉलीवुड फिल्म में काम किया था. वो फिल्म थी 2002 में आई शाहरुख की 'शक्ती द पावर.' इसमें प्रकाश राज ने एक शार्प शूटर का रोल किया था. ये एक छोटा सा रोल था, पर प्रकाश तब भी बेहद अनुभवी कलाकार थे. प्रकाश ने 1990 से फिल्मों में काम शुरू कर दिया था. उनकी पहली फिल्म थी कन्नड़ भाषा में बनी 'मिथिलेय सीथेयरू.'
# पॉलिटक्स एक इंसान की ज़िंदगी को किस हद तक बदल सकती है, इसकी एक मिसाल प्रकाश की ज़िंदगी में भी मिलती है. प्रकाश का असल नाम था प्रकाश राय. राय सरनेम से साउथ में लोग कर्नाटक के एक खास समाज और एरिया का अनुमान लगा लेते हैं. अब ऐसा है कि कर्नाटक और तमिलनाडु में कावेरी के पानी को लेकर भसड़ होती रहती है. लेकिन कलाकार को तो काम दोनों राज्यों में करना होता है. इसलिए प्रकाश को सलाह दी गई कि ऐसा नाम रख लो जिसकी अपील नेशनल लेवल की हो. सलाह देने वाले ने ही नया नाम भी रख दिया - प्रकाश राज. ये काम की सलाह देने वाले थे तमिल फिल्मों के यश चोपड़ा - रजनीकांत और कमल हासन को लॉन्च करने वाले के बालाचंदर.

के बालाचंदर
# प्रकाश का फिल्मों में जाना उनके परिवार में अकेली फिल्मी घटना नहीं थी. प्रकाश के माता-पिता जिस तरह मिले वो भी फिल्मी ही था. प्रकाश की मां बैंगलोर के एक अस्पताल में नर्स थी. वहां एडमिट एक पेशेंट से उन्हें प्यार हो गया और उन्होंने उनके साथ घर बसा लिया. हालांकि ये शादी काफी मुश्किलों से गुज़री और प्रकाश को उनकी मां ने अकेले ही बड़ा किया. प्रकाश के भाई प्रसाद राज भी एक एक्टर हैं.
# हमारे यहां अपने टीचर की बात एक कान से सुनकर दूसरे से निकाल देने का चलन है. लेकिन कभी-कभी उनकी कोई एक बात ज़िंदगी पलट देती है. प्रकाश के साथ भी ऐसा ही हुआ. कॉलेज में उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था. एक दिन मास्साब ने टोक दिया कि यहां तुम्हारा वक्त बरबाद हो रहा है. उसी दिन कॉलेज से निकलकर रवींद्र कलाक्षेत्र चले गए. रवींद्र कलाक्षेत्र का बैंगलोर में वही दर्जा है जो दिल्ली के श्रीराम थिएटर का है. यहीं पर थिएटर में स्ट्रगल करते हुए इन्हें कन्नड़ टीवी और फिल्मों में रोल मिलने लगे.
# पहला ब्रेक मिलने के लगभग चार साल तक प्रकाश कन्नड़ फिल्में करते रहे. लेकिन उनके करियर ने रफ्तार नहीं पकड़ी. वे असल लाइमलाइट में आए के बालचंदर की तमिल फिल्म 'ड्यूएट' से, जो 1994 में आई थी. के बालचंदर ने ही रजनीकांत और कमल हासन को भी लॉन्च किया था. इसके बाद मणि रत्नम की नज़र प्रकाश पर पड़ी. फिर इनकी गाड़ी चल निकली. प्रकाश ने हमेशा बालचंदर का आभार माना. अपनी प्रॉडक्शन कंपनी बनाई तो उसका नाम ड्यूएट फिल्म्स रखा.

ड्यूएट का पोस्टर (डीवीडी कवर)
# किसी अभिनेता का दो से तीन भाषाओं की फिल्मों में काम करना आम बात है. लेकिन प्रकाश कुल पांच भाषाओं में काम कर लेते हैं - कन्नड़, तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी. करियर की शुरुआत में उन्होंने एक अंग्रेज़ी फिल्म भी की थी. तो जितनी भाषाओं में लोगों की फिल्में डब नहीं होती, उतने में तो प्रकाश काम कर लेते हैं. और इतनी अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ के प्रोजेक्ट में होने के बावजूद प्रकाश का कोई मैनेजर नहीं है.
# प्रकाश गले तक सिनेमा में डूबे हुए हैं. दूसरों की फिल्मों में एक्टिंग करते हैं, जिसके लिए उन्हें दो बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है. इसके अलावा खुद फिल्में डायरेक्ट भी करते हैं. प्रोड्यूसर के हैसियत से कन्नड़ फिल्म पुताक्कना हाइवे के लिए नेशनल अवॉर्ड जीत चुके हैं. इसके अलावा फिल्म डिस्ट्रीब्यूशन का काम भी करते हैं.
# फिल्मों में काम करने के अलावा प्रकाश सामाजिक सरोकारों से भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने तेलंगाना में एक गांव गोद लिया हुआ है. हाल ही में तमिलनाडु में पड़े सूखे के चलते जब वहां के किसान प्रदर्शन करने दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे, तो प्रकाश वहां भी गए थे.
प्रकाश ऐसे ही काम करते रहें. लल्लनटॉप की ओर से इनको हैप्पी वाला बड्डे.
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