‘ये किरण यादव कौन हैं?’थोड़े ही समय में फैन-फॉलोइंग की ज़बरदस्त ऊंचाइयां छू चुका ये फेसबुक अकाउंट सबकी दिलचस्पी का विषय बना हुआ है. इसकी बेतहाशा मकबूलियत का इससे ज़्यादा बड़ा सबूत क्या होगा कि हम इस प्रोफाइल की पड़ताल करने बैठे हैं.

किरण यादव की प्रोफाइल पर लेटेस्ट पोस्ट की गई फोटो.
किरण यादव. एक सरसरी निगाह से देखा जाए तो इस अकाउंट में कुछ गलत नहीं लगता. कुछ नहीं खटकता. पर ज़रा गहरे उतरा जाए, तो मामला चकराने वाला लगता है. इस फेसबुक प्रोफाइल की फ्रेंडलिस्ट लगभग फुल है. खैर, ये कोई बड़ी बात नहीं. बड़ी बात है इस प्रोफाइल के फॉलोअर्स की संख्या. आज की तारीख में इस प्रोफाइल को करीब 10 लाख लोग फॉलो करते हैं. ऐसी भयंकर फॉलोइंग तो फिल्म स्टार्स, क्रिकेटर्स या नेताओं की हुआ करती है सिर्फ. एक आम प्रोफाइल के लिए लोगों में इतनी दीवानगी यकीनन हैरान कर देती है. ऐसी मकबूलियत तो बड़े-बड़े लिक्खाड़ लोगों तक को मयस्सर नहीं होती.
किरण यादव के फेसबुक प्रोफाइल पर अगर एक चक्कर लगा के आया जाए, तो 3 बातें ख़ास तौर से नोटिस में आती हैं.
1. अक्सर राजनीति पर बातें पोस्ट होती हैं. ज़्यादातर में मौजूदा सरकार की आलोचना ही होती है. कभी-कभार कांग्रेस और अन्य पार्टियों को भी निशाने पर लिया जाता है.
2. लगभग हर पोस्ट में एक नई फोटो.
3. देवनागरी में लिखी गई पोस्ट में भाषा की बेशुमार गलतियां.

नमूने के लिए एक फेसबुक पोस्ट.
यूं देखा जाए तो किरण यादव का फेसबुक अकाउंट उनके दर्जनों फ़ोटोज़ का स्टोर रूम सा लगता है.
फेसबुक पर किसी पेज को लाखों लोग फॉलो करने लग जाएं, ये आम बात है. लेकिन किसी पर्सनल अकाउंट की इतनी ज़्यादा लोगों तक पहुंच बने, ये बात चौंका देती है. ख़ास तौर से इसलिए क्योंकि इस अकाउंट से कोई बेहद ख़ास कॉन्टेंट परोसा जा रहा हो, ऐसा भी नहीं है. तस्वीरें भी एक घरेलू महिला की होती है. इसलिए इस बेतहाशा फैन-फॉलोइंग की मिस्ट्री थोड़ी समझ से बाहर है.
किरण यादव के प्रोफाइल इंट्रो से हमें सिर्फ 5 बातें पता चलती है (और उनमें भी झोल है).
# वो वैशाली, बिहार की रहने वाली हैं.
# वो आज-कल दिल्ली में रहती हैं.
# उन्होंने S & S Infotech Solutions Pvt Ltd में काम किया है.
# डीसी कॉलेज, हाजीपुर, वैशाली से पढ़ाई की है.
# वो शादीशुदा हैं और उन्होंने मार्च 2014 में फेसबुक जॉइन किया.

जिस S & S कंपनी में काम किए होने की बात वो कहती हैं, उसके पेज पर जाने पर पता चलता है कि वो मुंबई की कंपनी है.

किरण यादव के करंट शहर में दिल्ली लिखा हुआ है, लेकिन ज़्यादातर तस्वीरों में उत्तर-भारत के किसी गांव का बैकग्राउंड होता है. जैसा कि फेसबुक पर होता है, किसी भी प्रोफाइल के सगे-संबंधियों की उनकी पोस्ट पर मौजूदगी हमेशा रहती है. किरण यादव के केस में ऐसा कुछ नहीं है. वहां आने वाले सैंकड़ों कमेंट्स में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मिलता, जो किरण यादव को फेसबुक से बाहर जानता हो. ऐसे में कई लोग इस अकाउंट को फेक अकाउंट मानते हैं.
लेकिन दूसरी तरफ एक ही महिला की ढेर सारी तस्वीरें और कुछ वीडियो ये कन्फर्म करते हैं कि तस्वीर में दिख रही महिला का अस्तित्व ज़रूर है. कई लोग ये भी कहते हैं कि ऐसी किसी महिला का कोई परिजन ही इस अकाउंट के पीछे है, जिसकी इस महिला तक पहुंच है. ऐसे लोग मानते हैं कि ऐसी किसी जान-पहचान की महिला की तस्वीरें और एक फर्जी नाम के सहारे चलाया जा रहा है अकाउंट.

ऐसी बहुत सी तस्वीरें इस प्रोफाइल से पोस्ट कि गईं हैं.
अकाउंट से जुड़ी कुछ चीज़ें थोड़ा अलग दिखती हैं. जैसे एक बार सऊदी अरब का चेक इन भी है.

सऊदी का चेक इन.
लगभग हर पोस्ट पर 10 हज़ार से ऊपर लाइक्स और हज़ारों में शेयर तगड़ी लोकप्रियता का सबूत है. हालांकि कोई ऐसा नहीं मिलता, जिसने मैडम से कभी बात भी की हो. हमने स्टोरी करने से पहले इन्हें एक मैसेज डाला था, जिसे देखा तक नहीं गया है. जब तक कोई सामने आकर इस अकाउंट को क्लेम नहीं कर लेता, इसका रहस्य सुलझना मुहाल है.
हो सकता है इस अकाउंट को लेकर इतनी बातें चल पड़ने के बाद फेसबुक इसे वेरीफाई करने की कोशिश करे. और उसमें फेल होने पर इसको बंद ही कर दे. ऐसा हुआ तो सोशल मीडिया के बाशिंदों के लिए ये हालिया दिनों की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेली बन कर रह जाएगी. क्योंकि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा था, ये पता चल चुका है. लेकिन अकाउंट बंद हुआ, तो लोगों को कभी पता नहीं चलेगा कि,
इस वीडियो में किरण के मुताबिक वो श्रीनगर के लाल चौक पर हैं और पूछ रही हैं - फहरा दूं तिरंगा?'किरण यादव थीं कौन?'
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