6000 से ज़्यादा गानों को संगीतबद्ध कर चुके बेहद मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने उतने ही मशहूर गायक एस पी बालसुब्रमनियम को लीगल नोटिस भेज दिया है कि वो उनके संगीत दिए हुए गाने नहीं गा सकते. एस पी बालसुब्रमनियम भी कोई छोटी मोटी तोप नहीं हैं. कई सारी भाषाओं में 40,000 से ज़्यादा गाने गा चुके हैं. 6 तो नेशनल अवॉर्ड ही जीते हैं उन्होंने. आजकल अपने ट्रूप के साथ वर्ल्ड टूर पर निकले हैं. SPB50 नाम से शो कर रहे हैं. ज़ाहिर है अपने शो में जो गाने गाते हैं उनमें कुछ गाने इलैयाराजा के भी होते हैं. अब आगे वो ये गाने नहीं गा पाएंगे.इस रस्सीखेंच में पूरा संगीत जगत दो-फाड़ हो गया है. कुछ लोग तर्क दे रहे हैं कि शो से होती बम्पर कमाई में संगीतकार का भी हिस्सा होना चाहिए. तो कुछ लोग, यहां तक कि इलैयाराजा के अपने भाई भी, मानते हैं कि कोई भी गाना किसी एक आदमी की बपौती नहीं हो सकती. इसलिए किसी एक का क्लेम उसपर गैरवाजिब है. इसी बहाने हमने सोचा कि अतीत की कुछ ऐसी ही घटनाओं पर नज़र मार ली जाएं जहां सुरों की, ग्लैमर की दुनिया में रहते लोग बड़ा दिल न दिखा सके. वजह कभी पैसा रहा, कभी क्रेडिट, तो कभी ईगो.
आइये पढ़ते हैं:
लता-रफ़ी:
हिंदी सिनेमा के संगीत को अगर सिर्फ दो शब्दों में ही कह डालने की शर्त रखी जाए तो रफ़ी और लता के अलावा कुछ और कहना लगभग नामुमकिन होगा. लेकिन इतने उंचे कद के ये कलाकार भी अपने आपसी रिश्ते को तल्खियों से दूर ना रख सके. रॉयल्टी के मसले पर उनमें ऐसी ठनी के लगभग तीन साल तक उन्होंने एक दूसरे के साथ काम नहीं किया. लता चाहती थी कि सिंगर को गाने की रॉयल्टी मिले. रफ़ी की राय थी कि एक बार गाना गाने का मेहनताना मिलने के बाद गायक का रोल ख़त्म हो जाता है. इसी मसले पर जारी एक बहस के वक़्त उन्होंने लता को ‘महारानी’ कह दिया था. उनके इस रिमार्क से लता ऐसी भड़की कि उन्होंने रफ़ी के साथ आगे कभी भी काम करने से मना कर दिया. यही रवैया रफ़ी साहब का भी रहा. बाद में शंकर-जयकिशन ने उनके बीच सुलह करवाई और भारतीय सिनेमा कई यादगार गीतों में इन दोनों की आवाज़ सुन सका.
ओ पी नय्यर – लता:
ओ पी नय्यर उस दौर के ऐसे इकलौते संगीतकार माने जाते हैं जिन्होंने अपने गानों में लता की आवाज़ इस्तेमाल करने से परहेज़ रखा, फिर भी सफल रहे. लता का उसूल था कि किसी फिल्म से एक संगीतकार को हटा कर जब दूसरे को काम दिया जाता तो वो तभी गातीं जब पहले को कोई ऐतराज़ न होता. 1954 में बनी महबूबा से रोशन को हटा कर ओ पी नय्यर को लेना उन्हें नहीं भाया था. उन्होंने ओ पी नय्यर के लिए नहीं गाया. नय्यर ने भी फिर उनको नहीं गंवाया. ओ पी के साथ अपने तल्ख़ रिश्तों का असर लता और उनकी बहन आशा के रिश्तों पर भी पड़ा था.
ओ पी नय्यर – साहिर लुधियानवी:
नय्यर और गीतकार साहिर के बीच भी ईगो की लड़ाई रही थी. ‘नया दौर’ के वक़्त से इन दोनों के बीच तल्खी चल रही थी जो ‘सोने की चिड़िया’ के वक़्त बहुत गंभीर ईगो क्लैश में बदल गई. उनके ख़राब रिश्तों का खामियाज़ा ओ पी नय्यर को तब भुगतना पड़ा जब बी आर चोपड़ा ने साहिर की वजह से फिल्म ‘साधना’ के लिए ओ पी नय्यर के साथ किये गए कॉन्ट्रैक्ट को ही ख़त्म कर दिया. ‘साधना’ में बाद में दत्ता नाईक ने म्यूजिक दिया.
साहिर लुधियानवी
किशोर कुमार – अमिताभ बच्चन:
महानायक अमिताभ बच्चन के लिए किशोर दा ने गाये शानदार गीतों की फेहरिस्त बड़ी लंबी है. लेकिन एक वक्फा ऐसा भी आया था जब किशोर ने अमिताभ की आवाज़ बनना बंद कर दिया था. 80 के दशक में किशोर कुमार ने एक फिल्म बनाई थी ‘ममता की छांव में’. उन्होंने अमिताभ से उसमे ‘गेस्ट अपीयरेंस’ देने की गुजारिश की जिसे अमिताभ ने ठुकरा दिया. इस बात से किशोर दा इतने आहत हुए कि उन्होंने अमिताभ के लिए गाना रोक दिया. काफी बाद में उन्होंने ‘तूफ़ान’ फिल्म के ‘आया आया तूफ़ान’ गाने में अमिताभ के लिए प्लेबैक दिया. ऐसे ही किशोर दा ने मिथुन चक्रवर्ती के लिये भी गाना बंद कर दिया था जब उनकी तीसरी पत्नी योगिता बाली ने उनसे तलाक लेकर मिथुन से शादी कर ली थी.
एस डी बर्मन – लता:
सचिन देव बर्मन और लता की जोड़ी के एक से नाम बढ़कर एक शानदार गीत दर्ज हैं. बर्मन दा लता के बहुत बड़े फैन थे. उनका ये कथन बहुत फेमस है कि ‘मुझे हारमोनियम और लता दे दो और मैं किसी भी गाने को मधुर संगीत में बदल दूंगा.’ इसके बावजूद भी एक ऐसा दौर आया था जब एस डी बर्मन ने लता से गाने गंवाना छोड़ रखा था. 1957 में बनी फिल्म मिस इंडिया के लिए लता ने एक गाना गाया था जिससे बर्मन दा संतुष्ट नहीं थे. वो गाने में और थोड़ी कोमलता चाहते थे. लता ने उन्हें एक हफ्ते के बाद की डेट दी. हफ्ते बाद जब बर्मन दा ने अपने एक आदमी को लता के पास भेजा तो अपनी व्यस्तता की वजह से लता ने एक हफ्ते का समय और मांगा.लता का कहना है कि उस आदमी ने जा के बर्मन दा के कान भर दिए. कहा कि लता ने उसे ये कहते हुए घर से निकाला, ‘मैं एस डी बर्मन की धुन पर नाचने वाली ग़ुलाम नहीं हूं.’ इस वाकये से वो इतने खफ़ा हुए कि उन्होंने लता के साथ कभी न काम करने की बाकायदा घोषणा कर दी. तीन-चार सालों बाद बर्मन दा के बेटे राहुल देव बर्मन ने ये झगड़ा सुलझाया और लता फिर से एस डी बर्मन के लिए गाने लगीं.

मदन मोहन – रफ़ी – तलत महमूद:
अपने संगीत के लिए मशहूर फिल्म ‘जहांआरा’ के समय एक डेडलॉक पैदा हो गया था. प्रोड्यूसर चाहता था कि इसके गाने ‘फिर वही शाम’, ‘तेरी आंख के आंसू पी जाऊं’, ‘मैं तेरी नज़र का सुरूर हूं’ मुहम्मद रफ़ी से गंवाए जाएं. मदन मोहन तलत महमूद की ज़िद पकड़े बैठे थे. जब मामला बनता नहीं नज़र आया तो मदन मोहन ने अपने पल्ले से पैसे खर्च किये लेकिन ये गाने तलत महमूद से ही गंवाए. रफ़ी साहब इस बात से बेहद नाखुश रहे.
मदन मोहन और तलत महमूद
तलत महमूद – नौशाद:
इनके बीच का झगड़ा तो बेहद दिलचस्प है. किसी को लग सकता है कि ये भी कोई बात हुई भला! लेकिन वो लोग उसूलों वाले थे. उनके लिए छोटे मसलों पर भी समझौता करना कठिन रहता होगा. नौशाद अपने सिंगर्स के रिकॉर्डिंग से पहले सिगरेट पीने के सख्त खिलाफ़ थे. तलत महमूद को सिगरेट की आदत थी. ‘बाबुल’ फिल्म के गाने ‘मेरा जीवनसाथी’ की रिकॉर्डिंग के ऐन पहले तलत महमूद ने नौशाद को चिढ़ाने के मकसद से जानबूझकर उनके सामने सिगरेट पी. नौशाद ने फिर कभी उनके साथ काम नहीं किया.
लता – आशा:
इन दो बहनों की आपसी प्रतिस्पर्धा के किस्सों से तमाम बॉलीवुडिया पत्रिकाएं भरी रहती हैं. इन दोनों ही पर एक दूसरे की तरक्की से जलते होने का, एक दूसरे के गाने छीनने का आरोप लगा. कहते हैं कि ओ पी नय्यर ने आशा से लगातार गंवा कर उन्हें जिस मुकाम तक पहुंचाया वो लता की नज़र में हमेशा खटकता रहा. यही वजह रही कि उनकी इन दोनों से ही कभी नहीं बनी. एक वक़्त तो ऐसा आया था इंडस्ट्री में जब दोनों बहनों की अलग-अलग ढंग से ब्रांडिंग हो चुकी थी और उसको बॉलीवुड स्ट्रिक्टली फॉलो करता था. लता को ‘शुगर’ तो आशा को ‘स्पाइस’ बोला जाता. मीठे, मेलोडियस गानों के लिए लता तो तीखे, नटखट, चुलबुले गीतों के लिए आशा को चुना जाता. एक किस्सा ये भी मशहूर है कि कालजयी गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ पहले लता और आशा दोनों ही गाने वाली थी. लता ने अपना वज़न इस्तेमाल करते हुए आशा को इससे हटवाया और अकेली ने गाया. आगे का इतिहास सबको पता है.
अलका याग्निक – अनुराधा पौडवाल:
नब्बे के दशक के शुरूआती दौर में अनुराधा पौडवाल का सिक्का बुलंद था. अलका याग्निक भी पैर जमा रही थी लेकिन कुछ संगीतकार अलका के ऊपर अनुराधा को वरीयता देते थे. ‘दिल’ फिल्म का गाना ‘मुझे नींद ना आए’ पहले अलका याग्निक की आवाज़ में रिकॉर्ड हुआ था. लेकिन संगीतकार ‘आनंद-मिलिंद’ इसे अनुराधा की आवाज़ में चाहते थे. सो उसे फिर से रिकॉर्ड किया गया. अलका इस बात को कभी माफ़ न कर सकी. अनुराधा ने यही कारनामा सात साल बाद भी दोहराया. ‘इतिहास’ फिल्म के तीन गाने जो अलका गा चुकी थी उन्हें अनुराधा की आवाज़ में फिर से गंवाया गया. इस बार तो अलका इतनी उखड़ी कि उन्होंने फिल्मफेयर मैगज़ीन को एक लंबा इंटरव्यू देकर अनुराधा की मजम्मत की.
फिल्मफेयर को दिया अलका का इंटरव्यू, इमेज सोर्स: तनकीद डॉट कॉम.अलका की कुंडली से अनुराधा तब गायब हुई जब उन्होंने अचानक से घोषणा कर दी कि वो सिर्फ टी-सीरीज के लिए गाएंगी. इससे उनके करियर पर भयंकर असर पड़ा जिसका सीधा फायदा अलका को मिला. अनुराधा सीन से लगभग गायब हो गई और अलका प्लेबैक सिंगिंग में टॉप पर पहुंच गई. वहां से नीचे तभी उतरी जब बहुत बाद में श्रेया घोषाल, सुनिधि चौहान जैसी गायिकाओं का आगमन हुआ.
अनु मलिक – अलीशा चिनॉय:
‘मेड इन इंडिया’ फेम सिंगर अलीशा चिनॉय ने एक बार संगीतकार अनु मलिक पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का इल्ज़ाम लगा कर सनसनी फैला दी थी. ये 1996 की बात है. अलीशा ने कहा था कि अनु ने उनका शारीरिक उत्पीड़न किया है और हर्जाने के तौर पर 26 लाख रुपए की मांग भी कर दी थी. अनु मलिक ने ना सिर्फ इन इल्ज़ामात से इंकार किया बल्कि उल्टा अलीशा पर 2 करोड़ रुपए का मानहानि का दावा ठोक दिया. दोनों ने कसम खाई कि वो एक-दूसरे के साथ कभी भी काम नहीं करेंगे. लेकिन सिर्फ 6 साल बाद 2002 में फिल्म ‘इश्क-विश्क’ के लिए दोनों साथ आएं. फिर इंडियन आइडल में भी दोनों एक साथ जज भी बने थे.
इन सब किस्सों को जान कर लगता है कि बड़े फ़नकार भी उतने ही आम इंसान हैं जितने बाकी के लोग. शायद ये अच्छी बात ही हो.
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